बांग्लादेश में हिंदुओं पर हिंसा को लेकर ब्रिटेन ने कड़ी नाराजगी जताई है। यूके ने अंतरिम सरकार को फटकारते हुए अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और शांतिपूर्ण, निष्पक्ष चुनाव कराने की मांग की।
Dhaka: बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रही हिंसा को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। अब इस मुद्दे पर ब्रिटेन ने खुलकर सख्त रुख अपनाया है। लंदन ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार और उसके प्रमुख मुहम्मद यूनुस को कड़ी फटकार लगाते हुए हिंदुओं की हत्याओं, घरों को जलाए जाने और धार्मिक स्थलों पर हमलों की कड़ी निंदा की है।
ब्रिटेन सरकार ने साफ शब्दों में कहा है कि बांग्लादेश में किसी भी तरह की धार्मिक या जातीय हिंसा अस्वीकार्य है और इसे तुरंत रोका जाना चाहिए। इसके साथ ही यूके ने वहां शांतिपूर्ण, समावेशी और विश्वसनीय चुनाव कराने की भी अपील की है।
यूके के हाउस ऑफ कॉमन्स में उठा बांग्लादेश का मुद्दा
बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर यह मुद्दा ब्रिटेन के हाउस ऑफ कॉमन्स में जोरदार तरीके से उठाया गया। विपक्षी कंजर्वेटिव पार्टी के सांसद बॉब ब्लैकमैन ने संसद में कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा एक गंभीर मानवीय संकट का रूप ले चुकी है।
उन्होंने लेबर पार्टी की सरकार से अपील की कि वह इस मामले में केवल बयानबाजी तक सीमित न रहे, बल्कि बांग्लादेश पर दबाव बनाए ताकि वहां अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और आगामी चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से कराए जा सकें।
हिंदुओं की हत्या और मंदिरों को जलाने से आहत यूके सांसद
ब्रिटिश हिंदुओं के लिए All Party Parliamentary Group के अध्यक्ष बॉब ब्लैकमैन ने संसद में भावुक शब्दों में कहा कि वह बांग्लादेश से आ रही खबरों से बेहद चिंतित और आहत हैं। उन्होंने कहा कि सड़कों पर हिंदू पुरुषों की हत्या की जा रही है, उनके घरों को आग के हवाले किया जा रहा है और मंदिरों को निशाना बनाया जा रहा है।
ब्लैकमैन ने यह भी कहा कि केवल हिंदू ही नहीं, बल्कि अन्य धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय भी इसी तरह के डर और हिंसा के माहौल में जीने को मजबूर हैं। उनके अनुसार यह स्थिति लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवाधिकारों के पूरी तरह खिलाफ है।
चुनाव से पहले बढ़ती हिंसा पर सवाल
यूके सांसद ने बांग्लादेश में होने वाले आगामी चुनावों को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगले महीने तथाकथित स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराए जाने की बात की जा रही है, लेकिन जमीनी हालात इसके बिल्कुल उलट नजर आते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि बांग्लादेश की प्रमुख राजनीतिक पार्टी अवामी लीग को चुनाव में भाग लेने से प्रतिबंधित कर दिया गया है, जबकि जनमत सर्वेक्षणों में पार्टी को लगभग 30 प्रतिशत समर्थन मिलने की बात सामने आ रही है। ऐसे में चुनावों की निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
संविधान बदलने की मांग ने बढ़ाई चिंता

बॉब ब्लैकमैन ने संसद में यह मुद्दा भी उठाया कि बांग्लादेश में कुछ इस्लामिक चरमपंथी गुट संविधान में स्थायी बदलाव के लिए जनमत संग्रह कराने की मांग कर रहे हैं। उनके अनुसार अगर ऐसा हुआ तो इससे देश की धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था और अल्पसंख्यकों की स्थिति और कमजोर हो सकती है।
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस दिशा में सतर्क रहना होगा, क्योंकि बांग्लादेश में संविधान में किसी भी तरह का कट्टरपंथी बदलाव पूरे क्षेत्र की स्थिरता को प्रभावित कर सकता है।
ब्रिटेन सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया
सरकार की ओर से हाउस ऑफ कॉमन्स में जवाब देते हुए कॉमन्स के लीडर एलन कैंपबेल ने कहा कि ब्रिटेन बांग्लादेश की मानवीय स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। उन्होंने बताया कि यूके बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के साथ संपर्क में है और शांतिपूर्ण तथा विश्वसनीय चुनावों के लिए समर्थन दे रहा है।
एलन कैंपबेल ने यह भी दोहराया कि मानवाधिकारों का संरक्षण और संवर्धन ब्रिटेन की विदेश नीति का अहम हिस्सा है। उन्होंने कहा कि यूके सभी प्रकार की हिंसा की निंदा करता है, चाहे वह धार्मिक आधार पर हो या जातीय आधार पर।
यूनुस सरकार से किए गए वादों की याद दिलाई
ब्रिटेन सरकार ने यह भी कहा कि वह मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार द्वारा अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर किए गए वादों का स्वागत करती है। इसमें हिंसा के मामलों में गिरफ्तारी और कार्रवाई की बात भी शामिल है।
विदेश सचिव तक पहुंचेगा मामला
एलन कैंपबेल ने सांसद बॉब ब्लैकमैन को आश्वासन दिया कि वह उनके बयान को ब्रिटेन की विदेश सचिव यवेट कूपर तक पहुंचाएंगे। इसके साथ ही विदेश, विकास और राष्ट्रमंडल कार्यालय यानी FCDO इस मुद्दे पर उचित समय पर आधिकारिक बयान जारी करने पर विचार करेगा।
यह हस्तक्षेप ऐसे समय पर हुआ है जब बांग्लादेश की स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
प्रीति पटेल का पत्र
इससे पहले ब्रिटेन की शैडो विदेश सचिव और भारतीय मूल की सांसद प्रीति पटेल ने भी विदेश सचिव यवेट कूपर को पत्र लिखकर बांग्लादेश की स्थिति को बेहद चिंताजनक बताया था।
अपने पत्र में उन्होंने कहा था कि बांग्लादेश में धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा जरूरी है और हिंदुओं की हत्याएं तथा उत्पीड़न किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किए जा सकते। उन्होंने यूके सरकार से आग्रह किया था कि वह अपने प्रभाव और कूटनीतिक ताकत का इस्तेमाल कर बांग्लादेश में स्थिरता लाने में भूमिका निभाए।
ब्रिटिश हिंदू संगठनों का विरोध प्रदर्शन
बांग्लादेश में हो रही घटनाओं के खिलाफ ब्रिटेन में हिंदू संगठनों ने भी आवाज बुलंद की है। Bengali Hindu Adarsha Sangha UK के नेतृत्व में लंदन में कई विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए हैं।
प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेश में अंतरधार्मिक आवाज चिन्मय प्रभु की गिरफ्तारी और दीपू दास की कथित सार्वजनिक लिंचिंग की निंदा की। इसके साथ ही ढाका से आ रही अन्य हिंसक घटनाओं पर भी गहरी चिंता जताई गई।











