बांग्लादेश में सुबह 4.1 तीव्रता का भूकंप, ढाका और आसपास के जिलों में महसूस हुए झटके

बांग्लादेश में सुबह 4.1 तीव्रता का भूकंप, ढाका और आसपास के जिलों में महसूस हुए झटके

बांग्लादेश में सुबह 6:14 बजे 4.1 तीव्रता का भूकंप आया। झटके राजधानी ढाका और आसपास के जिलों में महसूस किए गए। भूकंप का केंद्र नरसिंगडी जिले में 30 किलोमीटर गहराई पर था। किसी तरह का नुकसान या चोट की खबर नहीं मिली।

Bangladesh Earthquake: भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। झटके राजधानी ढाका और आसपास के जिलों में भी महसूस किए गए। रिक्टर स्केल (Richter scale) पर भूकंप की तीव्रता 4.1 मापी गई। यूरोपियन-मेडिटेरेनियन सीस्मोलॉजिकल सेंटर (European-Mediterranean Seismological Centre) के अनुसार भूकंप स्थानीय समय के हिसाब से सुबह 6:14 बजे आया। इसका केंद्र नरसिंगडी जिले में 30 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था।

नुकसान की कोई रिपोर्ट नहीं

खुशखबरी यह है कि इस भूकंप के कारण किसी तरह का नुकसान या घायल होने की खबर नहीं है। न्यूज रिपोर्ट के अनुसार भूकंप की कम गहराई की वजह से ढाका और आसपास के इलाकों में केवल हल्के झटके महसूस हुए। स्थानीय लोग सुबह-सुबह अचानक झटके महसूस करके थोड़ा घबराए, लेकिन किसी को गंभीर चोट नहीं आई।

ढाका भूकंप के लिहाज से संवेदनशील

भूकंप के लिहाज से बांग्लादेश का ढाका बेहद संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। ढाका दुनिया के 20 सबसे अधिक भूकंप संभावित शहरों में शामिल है। राजधानी का यह हिस्सा घनी आबादी वाला है और यहां कई पुरानी टूटी-फूटी इमारतें मौजूद हैं। इतिहास में भी इस इलाके में तेज भूकंपों का रिकॉर्ड है। 1869 से 1930 के बीच ढाका में पांच बड़े भूकंप आए जिनकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 7.0 से ऊपर रही।

तीन टेक्टोनिक प्लेटों का जंक्शन

बांग्लादेश को भूकंप के लिहाज से संवेदनशील बनाने में इसकी भौगोलिक स्थिति अहम है। यह क्षेत्र तीन बड़ी टेक्टोनिक प्लेटों के जंक्शन पर स्थित है – इंडियन प्लेट (Indian Plate), म्यांमार प्लेट (Myanmar Plate) और यूरेशियन प्लेट (Eurasian Plate)। इसी वजह से यहां छोटे-छोटे झटके अक्सर महसूस होते रहते हैं और समय-समय पर बड़े भूकंप की संभावना बनी रहती है।

इतिहास के विनाशकारी भूकंप

बांग्लादेश में भूकंप का इतिहास बहुत पुराना और विनाशकारी रहा है। 12 जून 1897 को असम क्षेत्र में आए भूकंप का असर बांग्लादेश में भी बहुत महसूस किया गया था। उस समय बांग्लादेश ब्रिटिश भारत का हिस्सा था। इस भूकंप की रिक्टर पैमाने पर तीव्रता लगभग 8.1 मापी गई। यह भूकंप इतिहास के सबसे बड़े और विनाशकारी भूकंपों में गिना जाता है। भूकंप के कारण कई जगह जमीन फट गई थी और बड़े पैमाने पर भवनों और ढांचों को नुकसान पहुंचा।

भूकंप से हुई जनहानि

1897 के भूकंप ने बांग्लादेश के सिलहट, मयमनसिंह, ढाका और चिटगांव समेत कई जिलों को बुरी तरह प्रभावित किया। हजारों मकान ढह गए और पुलों तथा सड़कों को भारी नुकसान पहुंचा। उस समय आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, हजारों लोगों की मौत हुई और लाखों लोग प्रभावित हुए। यह भूकंप ग्रेट अर्थक्वेक (Great Earthquake) की श्रेणी में आता है और इसे आज भी बांग्लादेश के इतिहास का सबसे गंभीर प्राकृतिक आपदा माना जाता है।

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