बीजेपी का नया लक्ष्य: 2026 में तमिलनाडु और केरल में लहराना हैं सियासी परचम

बीजेपी का नया लक्ष्य: 2026 में तमिलनाडु और केरल में लहराना हैं सियासी परचम

2024 के लोकसभा चुनावों और 2025 में दिल्ली व बिहार में हुए विधानसभा चुनावों के बाद भारतीय राजनीति का रुख एक बार फिर साफ दिखाई देने लगा है। उत्तर भारत में अपनी मजबूत पकड़ को और पुख्ता करने के बाद अब भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की नजर देश के दक्षिणी राज्यों पर टिक गई है।

नई दिल्ली: उत्तर भारत में लगातार चुनावी सफलताओं के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) अब 2026 के तमिलनाडु और केरल विधानसभा चुनावों पर फोकस कर रही है। पार्टी का मानना है कि इन दोनों दक्षिणी राज्यों में अच्छी पकड़ बनाने से भविष्य में देश की राजनीति में लंबी अवधि के लिए बढ़त हासिल की जा सकती है। 2024 के लोकसभा चुनाव और 2025 में दिल्ली और बिहार विधानसभा चुनावों में जीत के बाद बीजेपी का आत्मविश्वास पहले से कहीं अधिक मजबूत हो गया है।

उत्तर भारत की सफलता से मिला आत्मविश्वास

2025 बीजेपी के लिए राजनीतिक रूप से बेहद अहम वर्ष रहा। दिल्ली और बिहार में मिली जीत ने पार्टी की स्थिति और मजबूत कर दी। महाराष्ट्र और हरियाणा में 2024 में हुई सफलता ने संगठनात्मक ढांचे और चुनावी रणनीति की मजबूती साबित कर दी। इन सभी जीतों ने पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाया और विपक्ष को संकेत दिया कि बीजेपी अभी भी चुनाव प्रबंधन और नेतृत्व में प्रभावी है।

बीजेपी ने उत्तर भारत के कई राज्यों में अपनी पकड़ मजबूत कर ली है, लेकिन पार्टी केवल ‘हिंदी पट्टी’ तक सीमित नहीं रहना चाहती। पार्टी का मानना है कि यदि राष्ट्रीय राजनीति में लंबे समय तक बढ़त बनाए रखनी है, तो दक्षिण भारत में पैठ बनाना अनिवार्य है। फिलहाल दक्षिण में बीजेपी का एकमात्र मजबूत किला कर्नाटक है। तमिलनाडु और केरल में चुनावी तैयारियां इस दृष्टि से अहम मानी जा रही हैं।

तमिलनाडु में बीजेपी की संभावनाएं

तमिलनाडु की राजनीति दशकों से DMK और AIADMK जैसे द्रविड़ पार्टियों के इर्द-गिर्द घूमती रही है। वर्तमान में DMK सत्ता में है और मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की पकड़ मजबूत है। वहीं, AIADMK अंदरूनी कलह से जूझ रही है। बीजेपी ने पिछले वर्षों में तमिलनाडु में अपना संगठन मजबूत करने की कोशिश की है और 2024-25 के चुनावी अनुभवों से पार्टी को यह समझ आया है कि स्थानीय नेतृत्व और क्षेत्रीय मुद्दों की समझ के बिना सफलता मुश्किल है।

बीजेपी का फोकस अब सहयोगी दलों के साथ तालमेल, स्थानीय नेताओं को सामने लाने और सांस्कृतिक मुद्दों पर संतुलित राजनीति करने पर है। सीधे सत्ता में आना मुश्किल है, लेकिन वोट शेयर बढ़ाकर और विधानसभा में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराकर पार्टी तमिलनाडु में सियासी ताकत बन सकती है।

केरल में बीजेपी की रणनीति

केरल की राजनीति मुख्यतः वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) और संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (UDF) के बीच केंद्रित है। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के नेतृत्व में LDF सत्ता में है। केरल में बीजेपी के लिए वैचारिक और सामाजिक चुनौतियां अधिक हैं, लेकिन स्थानीय निकाय चुनावों में पार्टी ने हाल ही में अपनी स्थिति मजबूत की है। तिरुवनंतपुरम नगर निकाय चुनाव में ऐतिहासिक जीत और पहली बार मेयर पद पर बीजेपी की जीत ने पार्टी के आत्मविश्वास को बढ़ाया है।

बीजेपी के लिए केरल में शहरी क्षेत्रों और युवाओं पर फोकस करना रणनीति का हिस्सा है। पार्टी विकास, सामाजिक मुद्दों और भ्रष्टाचार जैसे विषयों के जरिए वोटरों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है।

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