भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से तबाही, जहरीले पानी से हुई अब तक 20 लोगों की मौत

भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से तबाही, जहरीले पानी से हुई अब तक 20 लोगों की मौत

भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से 50 से अधिक लोग अस्पताल में भर्ती हैं, 3 वेंटिलेटर पर हैं। 23-25 दिसंबर सबसे खराब दिन थे। सरकार ने राहत राशि देने का आश्वासन दिया और टैंकर व आरओ के जरिए पानी पहुंचाया जा रहा है।

Madhya Pradesh: भागीरथपुरा इलाके में 23 से 25 दिसंबर के बीच पानी की सप्लाई ने सबसे ज्यादा तबाही मचाई। स्थानीय लोगों के अनुसार, पानी देखने में साफ था लेकिन बदबू और स्वाद असामान्य था। कई लोगों ने इसका इस्तेमाल किया, जिससे उल्टी और दस्त की शिकायतें तेजी से बढ़ीं। स्थानीय रहने वाली कौशल्या ने बताया कि उस पानी का स्वाद बेहद खराब था और पांच दिन तक उन्हें आईसीयू में रहना पड़ा। 

पड़ोसी नंदलाल (75) की भी इसी पानी से मौत हुई। इसके अलावा, आशा प्रजापत ने बताया कि पानी को डिब्बों में भरकर रखने पर ढक्कन खोलते ही तेज बदबू आती थी। स्थानीय लोगों ने कहा कि इलाके में पहले भी पानी की समस्या रही थी, लेकिन इन तीन दिनों में आया पानी बेहद दूषित था। इसमें बारीक कीड़े होने की शिकायतें सामने आईं, जिससे कई परिवार बीमार पड़े।

अस्पताल में भर्ती मरीजों की स्थिति

पानी से जुड़ी स्वास्थ्य समस्या धीरे-धीरे गंभीर रूप ले रही थी। 29 दिसंबर तक किसी की मौत नहीं हुई थी, लेकिन डेढ़ सौ से अधिक लोग अस्पताल में भर्ती थे। 30 दिसंबर को वर्मा अस्पताल में नंदलाल की मौत हुई, जिसकी वजह डॉक्टरों ने कार्डियक अरेस्ट बताई। इसके पहले भी 21 दिसंबर को सुमित्रा देवी की घर पर मौत हुई थी, जिसे प्रशासन अब तक इस मामले में शामिल नहीं कर पाया है। 

कुल मिलाकर, दूषित पानी के कारण अस्पतालों में भर्ती मरीजों की संख्या 446 से घटकर अब 50 रह गई है। इनमें से 10 मरीज आईसीयू में हैं, जिनमें 3 वेंटिलेटर पर हैं। फिलहाल इलाके में पानी की आपूर्ति टैंकर के जरिए की जा रही है। कई परिवार मजबूरी में आरओ का पानी पी रहे हैं। बिजली की आपूर्ति बाधित होने के कारण 26 और 27 दिसंबर तक लोग वही दूषित पानी इस्तेमाल कर रहे थे, जिससे हालत और बिगड़ गए।

राहत का आश्वासन

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार केवल आंकड़ों में नहीं उलझेगी। एक भी व्यक्ति की मौत दुखद है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और नगर निगम के रिकॉर्ड के आधार पर मौतों की संख्या तय की जाएगी।

सरकार ने प्रभावित परिवारों को राहत राशि देने का आश्वासन दिया है और कहा कि पीड़ितों के साथ पूरा सहयोग किया जाएगा। नगर निगम और प्रशासन लगातार इलाके में पानी की सप्लाई और स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था में जुटे हुए हैं।

स्थानीय लोगों का दर्द और खर्च

स्थानीय लोगों ने बताया कि अस्पताल में इलाज और दवाइयों पर काफी खर्च हुआ। कौशल्या को पांच दिन तक आईसीयू में रहना पड़ा, जिसमें 40 हजार रुपए से ज्यादा खर्च हुए। लोगों ने बताया कि पानी की बदबू और दुर्गंध ने शुरुआती दिनों में उन्हें सशंकित कर दिया था, लेकिन पानी साफ दिखने के कारण इसका उपयोग कर लिया गया।

इस पूरी घटना ने इलाके के लोगों को मानसिक और शारीरिक दोनों रूप से प्रभावित किया। हालात धीरे-धीरे काबू में आ रहे हैं, लेकिन बीते कुछ दिनों का दर्द अब भी लोगों के चेहरों पर साफ दिख रहा है।

Leave a comment