भारत ने इजरायल से Heron MK-II Drones की नई खेप इमरजेंसी प्रोविजन के तहत खरीदी है। ऑपरेशन सिंदूर में इनके सफल उपयोग के बाद यह निर्णय लिया गया। नई तैनाती से सेना, वायुसेना और नौसेना की real-time surveillance क्षमता और मजबूत होगी।
Heron MK-II Drones: भारत और इजरायल के रक्षा संबंध लंबे समय से मजबूत रहे हैं। इन संबंधों को और आगे बढ़ाते हुए दोनों देशों ने Heron MK-II Drones की नई खेप खरीदने के लिए एक अहम समझौता किया है। इस डील की पुष्टि इजरायल की एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज के वरिष्ठ अधिकारी ने की, जिन्होंने बताया कि भारत ने यह करार इमरजेंसी प्रोविजन के तहत किया है।
यह फैसला हाल ही में हुए ऑपरेशन सिंदूर में इस ड्रोन के प्रभावी प्रदर्शन को देखते हुए लिया गया है। ऑपरेशन के दौरान इस ड्रोन ने जिस तरह आतंकियों की लोकेशन ट्रैक की, सुरक्षा बलों को रियल-टाइम surveillance दिया और मुश्किल इलाकों में भी सटीक visuals उपलब्ध कराए, उसने इसकी ताकत साबित कर दी।
नई खरीद का निर्णय
इजरायल की एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज के अधिकारी ने बताया कि भारत पहले से ही Heron MK-II Drones का उपयोग कर रहा है। सेना और वायुसेना दोनों के पास ये ड्रोन मौजूद हैं। लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने महसूस किया कि इनकी संख्या बढ़ाना जरूरी है। यही वजह है कि भारत ने बिना देरी किए इमरजेंसी प्रोविजन के तहत नई खेप की खरीद पर सहमति दी। अधिकारी ने कहा कि भारत पिछले तीन दशकों से इजरायली तकनीक और हथियार प्रणाली पर भरोसा करता आया है, और यह साझेदारी लगातार मजबूत होती जा रही है।
नौसेना में तैनाती
नई खेप का सबसे बड़ा बदलाव यह है कि Heron MK-II अब भारतीय नौसेना में भी शामिल किए जाएंगे। इससे समुद्री सुरक्षा अभूतपूर्व रूप से मजबूत होगी। हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों, दूरस्थ समुद्री सीमाओं की निगरानी और संदिग्ध जहाजों की मूवमेंट को ट्रैक करने के लिए यह ड्रोन बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। रियल-टाइम surveillance और लंबी endurance क्षमता के कारण नौसेना को लगातार डेटा मिलता रहेगा, जिससे किसी भी खतरे की पहचान समय पर हो सकेगी।

Heron MK-II की क्षमता
Heron MK-II एक Medium Altitude Long Endurance (MALE) ड्रोन है जो आधुनिक surveillance मिशनों के लिए बनाया गया है। यह 35,000 फीट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है और 45 घंटे तक लगातार हवा में रह सकता है। इतनी लंबी endurance क्षमता दुनिया के बहुत कम ड्रोन्स में मिलती है। इसकी surveillance system में Electro-Optical sensors, Infrared cameras और Synthetic Aperture Radar शामिल हैं, जो हर मौसम में काम करते हैं। दुश्मन की पोस्ट, घुसपैठ की गतिविधियों और कठिन भूभागों की निगरानी इस ड्रोन के लिए बेहद आसान मानी जाती है।
Heron MK-II High-Security Communication Link के साथ आता है, जिससे लंबे अंतर पर भी भेजा गया डेटा इंटरसेप्ट नहीं किया जा सकता। यह सुविधा विशेष रूप से उन इलाकों में काम आती है जहां सुरक्षा की संवेदनशीलता बहुत अधिक होती है। इजरायल की वायुसेना समेत कई देशों की सेनाएं इसे उपयोग में ला रही हैं, जिससे इसकी विश्वसनीयता साबित होती है।
ऑपरेशन सिंदूर का अनुभव
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। इस अभियान में Heron MK-II Drones का उपयोग बड़े पैमाने पर किया गया। इन ड्रोन्स ने घने जंगलों में आतंकियों की मूवमेंट पकड़ने में मदद की, सीमावर्ती इलाकों में संदिग्ध गतिविधियों को ट्रैक किया और सुरक्षा बलों को साफ और सटीक visuals उपलब्ध कराए। इस ड्रोन की endurance और optical clarity ने ऑपरेशन को तेजी से आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसी वजह से सुरक्षा एजेंसियों ने इसे भविष्य के अभियानों के लिए अनिवार्य माना।
मेक इन इंडिया प्राथमिकता
इजरायली एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज के अधिकारी ने कहा कि उनका लक्ष्य सिर्फ ड्रोन्स की आपूर्ति करना नहीं है, बल्कि भारत की Make in India योजना के तहत स्थानीय निर्माण को भी बढ़ावा देना है। वे भारत में संयुक्त उत्पादन, तकनीक हस्तांतरण और निर्माण क्षमताओं को विकसित करने पर भी काम करना चाहते हैं। इससे भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सकेगा। आने वाले वर्षों में भारत न सिर्फ इन ड्रोन्स का उपयोग करेगा, बल्कि इन्हें बनाने में भी सक्षम होगा।
भारत की सैन्य क्षमता में मजबूती
Heron MK-II की नई खेप भारतीय सुरक्षा तंत्र को कई क्षेत्रों में मजबूत करेगी। इससे सीमा सुरक्षा बेहतर होगी, आतंकवाद विरोधी अभियानों में intelligence गुणवत्ता बढ़ेगी, नौसेना की समुद्री निगरानी क्षमता में तेज सुधार होगा और तीनों सेनाओं को रियल-टाइम surveillance मिलेगा। यह ड्रोन लंबी दूरी की निगरानी के लिए बेहद उपयुक्त है, जिससे किसी भी बड़े खतरे की पहचान समय रहते की जा सकेगी।












