भारत में महिला आरक्षण लागू करने की तैयारी: संसद और विधानसभाओं में बढ़ेगा महिलाओं का प्रतिनिधित्व

भारत में महिला आरक्षण लागू करने की तैयारी: संसद और विधानसभाओं में बढ़ेगा महिलाओं का प्रतिनिधित्व

देश में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार महिला आरक्षण को जल्द लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। सरकार नारी वंदन अधिनियम में बदलाव कर संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण देने की तैयारी कर रही है।

नई दिल्ली: भारत में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को बढ़ाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार संसद और राज्य विधानसभाओं में एक-तिहाई महिला आरक्षण लागू करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। सरकार इस व्यवस्था को जल्द लागू करने के लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन करने और संविधान में बदलाव लाने पर विचार कर रही है। यदि प्रस्तावित योजना लागू होती है, तो 2027 में होने वाले कुछ प्रमुख राज्य विधानसभा चुनावों में महिलाओं को आरक्षित सीटों का लाभ मिल सकता है।

महिला आरक्षण लागू करने की नई योजना

सरकार का लक्ष्य है कि महिला आरक्षण व्यवस्था को जल्द से जल्द लागू किया जाए ताकि महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हो सके। वर्तमान कानून के अनुसार, महिला आरक्षण लागू करने से पहले राष्ट्रीय जनगणना और उसके बाद निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन (Delimitation) आवश्यक है। यह प्रक्रिया कई वर्षों तक चल सकती है, जिससे आरक्षण लागू होने में देरी हो सकती है।

इसी कारण केंद्र सरकार इस प्रावधान को संशोधित करने के विकल्प तलाश रही है। प्रस्तावित बदलाव के तहत महिला आरक्षण को जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया से अलग करने पर विचार किया जा रहा है, जिससे इसे जल्दी लागू किया जा सके।

2027 के विधानसभा चुनावों में संभावित लागू

सरकार की योजना है कि 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड के विधानसभा चुनावों में महिला आरक्षण लागू किया जाए। यदि यह योजना सफल होती है, तो इन राज्यों की विधानसभाओं में लगभग 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन राज्यों में महिला आरक्षण लागू होता है, तो यह 2029 के लोकसभा चुनावों के लिए भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। इससे राष्ट्रीय स्तर पर महिला राजनीतिक प्रतिनिधित्व को मजबूत आधार मिल सकता है।

महिला आरक्षण को जल्दी लागू करने के लिए सरकार कुछ वैकल्पिक मॉडल पर भी विचार कर रही है। इनमें 33 प्रतिशत सीटों पर दोहरे प्रतिनिधित्व (Dual Representation) जैसी व्यवस्था शामिल हो सकती है। इस मॉडल के तहत मौजूदा निर्वाचन क्षेत्रों में अतिरिक्त प्रतिनिधित्व देकर महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में शामिल किया जा सकता है।

हालांकि इस तरह के किसी भी मॉडल को लागू करने के लिए संविधान में संशोधन आवश्यक होगा और इसके लिए संसद में व्यापक समर्थन की जरूरत पड़ेगी।

विपक्षी दलों से समर्थन की कोशिश

सरकार इस मुद्दे पर विपक्षी दलों के साथ सहमति बनाने की कोशिश कर रही है। कई प्रमुख राजनीतिक दल पहले से ही महिला आरक्षण के समर्थन में रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे सहित कई विपक्षी नेताओं ने पहले भी कहा है कि महिला आरक्षण को जल्द लागू किया जाना चाहिए और इसे जनगणना या परिसीमन से जोड़ना जरूरी नहीं है।

सरकार का मानना है कि यदि इस मुद्दे पर व्यापक राजनीतिक सहमति बनती है, तो संसद में संविधान संशोधन पारित करना आसान हो जाएगा। भारत की संसद में वर्तमान में महिलाओं का प्रतिनिधित्व अपेक्षाकृत कम है। लोकसभा की 543 सीटों में से लगभग 78 महिला सांसद हैं, जो कुल संख्या का लगभग 14 प्रतिशत है। यदि एक-तिहाई आरक्षण लागू होता है, तो यह संख्या बढ़कर लगभग 181 तक पहुंच सकती है।

इसी तरह राज्यसभा में भी महिलाओं की संख्या बढ़ सकती है। वर्तमान में 245 सदस्यों में से लगभग 32 महिला सांसद हैं, लेकिन आरक्षण लागू होने पर यह संख्या लगभग 80 तक पहुंच सकती है।

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