बंदर का मोबाइल: बच्चों को तकनीक से दूरी सिखाने वाली मजेदार कहानी

बंदर का मोबाइल: बच्चों को तकनीक से दूरी सिखाने वाली मजेदार कहानी
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चंपकवन जंगल में 'जग्गू' नाम का एक बहुत ही शरारती और जिज्ञासु बंदर रहता था। एक दिन, पेड़ से कूदते समय उसे झाड़ियों में पर्यटकों द्वारा गिराया हुआ एक चमचमाती चीज़ मिली, एक स्मार्टफ़ोन। जंगल में इस अजीब 'जादुई डिब्बे' के आने से जानवरों के बीच क्या हड़कंप मचा और अंत में क्या हुआ, यह कहानी उसी मज़ेदार किस्से के बारे में है।

कहानी

चंपकवन का जंगल हमेशा पक्षियों की चहचहाहट और जानवरों की आवाज़ों से गूँजता रहता था। लेकिन आज जंगल के एक हिस्से में अजीब सी शांति थी, और फिर अचानक शोर शुरू हो गया। इसका कारण था जग्गू बंदर। जग्गू को आम के पेड़ के नीचे एक आयताकार, काली और चमकदार चीज़ मिली थी। यह एक मोबाइल फ़ोन था जो जंगल सफारी पर आए किसी इंसान की जेब से गिर गया था।

जग्गू ने उसे उलट-पलट कर देखा। उसे लगा शायद यह कोई नया फल है। उसने उसे दाँत से काटने की कोशिश की। 'कट्ट!' की आवाज़ आई, लेकिन कोई स्वाद नहीं आया। 'थू-थू! यह तो पत्थर जैसा है,' जग्गू ने मुँह बनाते हुए कहा।

गुस्से में उसने उस चीज़ को अपनी उंगली से ज़ोर से दबाया। तभी चमत्कार हुआ! वह काली चीज़ अचानक जगमगा उठी और उसमें से एक तेज़ रोशनी निकली। जग्गू डर के मारे पीछे कूद गया। 'बाप रे! इसमें तो आग है!' वह चिल्लाया।

लेकिन जब उसने देखा कि वह चीज़ उसे जला नहीं रही है, तो वह धीरे-धीरे पास गया। उसने फिर से स्क्रीन को छुआ। स्क्रीन पर रंग-बिरंगे ऐप्स के आइकॉन थे। जग्गू ने गलती से 'कैमरा' खोल दिया। अचानक उसे स्क्रीन पर अपना ही चेहरा दिखाई दिया।

'अरे! इसमें तो मेरा जुड़वा भाई फँसा है!' जग्गू ने हैरानी से कहा। वह दाँत दिखाकर हँसा, तो स्क्रीन वाला बंदर भी हँसा। जग्गू को बड़ा मज़ा आया।

थोड़ी ही देर में उसने अनजाने में 'म्यूज़िक प्लेयर' चला दिया। जंगल में ज़ोर से गाना बजने लगा, 'लकड़ी की काठी, काठी पे घोड़ा...'।

आवाज़ सुनकर आस-पास के जानवर वहाँ जमा हो गए। गोलू हाथी, मीकू खरगोश, और प्यारी हिरणी सब हैरानी से उस 'जादुई डिब्बे' को देखने लगे।

जग्गू अब सबका लीडर बन गया था। वह शान से बोला, 'देखो दोस्तों, यह मेरा नया खिलौना है। यह गाता भी है और इसमें लोग भी रहते हैं।'

अब जंगल का नज़ारा बदल गया। जो जानवर पहले शिकार ढूँढते थे या खेलते थे, वे अब जग्गू के चारों ओर घेरा बनाकर बैठ गए। गोलू हाथी ने अपना नहाना छोड़ दिया। मीकू खरगोश ने गाजर खाना छोड़ दिया। तोता अब उड़ने के बजाय मोबाइल की स्क्रीन को टुकुर-टुकुर देखता रहता।

वे घंटों तक उस छोटी सी स्क्रीन पर विडियो देखते रहे। उन्हें पता ही नहीं चला कि कब दोपहर से शाम हो गई। किसी को भूख का अहसास नहीं हुआ। जंगल की असली आवाज़ें-हवा की सरसराहट और नदियों का बहना-अब किसी को सुनाई नहीं दे रहा था। सब बस उस नीली रोशनी में खोए हुए थे।

तभी, स्क्रीन पर एक लाल बत्ती जली और एक आवाज़ आई-'टू-टू'। बैटरी ख़त्म हो रही थी। जग्गू चिल्लाया, 'अरे! यह जादुई डिब्बा बीमार हो गया है!' उसने मोबाइल को हिलाया, उसे थपकी दी, लेकिन स्क्रीन की रोशनी धीरे-धीरे कम होने लगी और अंत में मोबाइल पूरी तरह बंद (Switch off) हो गया। काली स्क्रीन वापस आ गई।

जानवर परेशान हो गए। 'अरे, गाना कहाँ गया?' गोलू ने पूछा। 'मेरा जुड़वा भाई कहाँ छुप गया?' जग्गू ने स्क्रीन को ठोकते हुए कहा। वे काफ़ी देर तक उस 'मरे हुए डिब्बे' को जगाने की कोशिश करते रहे, लेकिन वह नहीं चला।

तभी जंगल के सबसे बुजुर्ग और समझदार उल्लू काका वहाँ आए। उन्होंने देखा कि सारे जानवर एक बेकार डिब्बे के लिए उदास बैठे हैं। उल्लू काका ने हँसते हुए कहा, 'पागलो! तुम लोग एक बेजान चीज़ के लिए अपनी असली दुनिया को भूल गए? देखो, ऊपर देखो!'

सबने ऊपर देखा। आसमान में पूरा चाँद खिला था और ठंडी हवा चल रही थी। जुगनू टिमटिमा रहे थे, जो मोबाइल की रोशनी से कहीं ज़्यादा सुंदर थे। उल्लू काका ने समझाया, 'वह डिब्बा सिर्फ़ एक मशीन था। लेकिन यह जंगल, यह हवा, यह चाँद और तुम सबकी दोस्ती-यह असली जादू है। उस नकली दुनिया के चक्कर में तुम सबने आज का दिन बर्बाद कर दिया।'

जग्गू को अपनी गलती समझ आ गई। उसने वह मोबाइल उठाया और उसे एक गहरी झाड़ी में फेंक दिया। उसने कहा, 'काका सही कह रहे हैं। चलो, पकड़म-पकड़ाई खेलते हैं!'

जग्गू ने मीकू खरगोश की पूँछ खींची और पेड़ पर चढ़ गया। सारे जानवर हँस पड़े। जंगल में फिर से वही पुरानी रौनक लौट आई। मोबाइल अब झाड़ियों में पड़ा था, लेकिन जग्गू और उसके दोस्तों ने फिर कभी उसकी तरफ मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने समझ लिया था कि असली मज़ा स्क्रीन पर उंगली चलाने में नहीं, बल्कि दोस्तों के साथ मिट्टी में खेलने में है।

सीख 

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि 'तकनीक और गैजेट्स का इस्तेमाल करना अच्छा है, लेकिन इसकी लत नहीं लगनी चाहिए। असली खुशी मोबाइल की स्क्रीन के अंदर नहीं, बल्कि हमारे परिवार, दोस्तों और प्रकृति के साथ समय बिताने में है।'

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