1 फरवरी को केंद्रीय बजट 2026 पेश होने वाला है और इसके मद्देनजर भारत का वित्तीय सेवा क्षेत्र—जिसमें बीमा कंपनियां, ब्रोकर्स, एनबीएफसी और डिजिटल लेंडर्स शामिल हैं—एक साझा एजेंडे पर एकजुट होता नजर आ रहा है।
Budget 2026 Finance Update: 1 फरवरी 2026 को पेश होने वाले केंद्रीय बजट को लेकर वित्तीय क्षेत्र में व्यापक चर्चाएं शुरू हो गई हैं। बीमा कंपनियां, एनबीएफसी (Non-Banking Financial Companies), डिजिटल लेंडर्स और ब्रोकर्स वित्तीय सुधारों के लिए सरकार से स्पष्ट रोडमैप की मांग कर रहे हैं। इनकी प्रमुख मांगें पेंशन और बीमा उत्पादों पर टैक्स समानता, जलवायु जोखिम बीमा, डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर, कंपोजिट लाइसेंसिंग और एमएसएमई क्रेडिट सुधार से जुड़ी हैं।
1. पेंशन और एन्युटी उत्पादों पर टैक्स समानता
बीमा उद्योग की सबसे बड़ी मांग पेंशन और एन्युटी उत्पादों के टैक्स ट्रीटमेंट से संबंधित है। वर्तमान में बीमा एन्युटी से मिलने वाली पूरी राशि पर टैक्स लगता है, जबकि निवेश के दौरान मूलधन पहले ही टैक्स दे दिया गया होता है। इसके विपरीत नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में निवेशकों को अतिरिक्त टैक्स छूट मिलती है।
इंडस्ट्री का कहना है कि इससे निवेशक नियमित आय देने वाले रिटायरमेंट उत्पादों की बजाय टैक्स-सेविंग विकल्पों की ओर आकर्षित होते हैं। बीमा कंपनियां चाहती हैं कि एन्युटी पर केवल रिटर्न हिस्से पर टैक्स लगाया जाए और बीमा आधारित पेंशन उत्पादों को भी NPS जैसी छूट मिले।
2. जलवायु जोखिम और पैरामीट्रिक बीमा
बाढ़, हीटवेव और चरम मौसम की घटनाओं से नुकसान बढ़ रहा है। इसके लिए उद्योग पैरामीट्रिक बीमा को बढ़ावा देने की मांग कर रहा है, जिसमें नुकसान के आकलन के बजाय तय मानकों के आधार पर तेजी से भुगतान होता है। इसके लिए सरकार से सह-वित्तपोषण, पब्लिक-प्राइवेट रिस्क पूल और बेहतर क्लाइमेट डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर की भी उम्मीद है।

3. डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर और एआई आधारित समाधान
बीमा उद्योग में टेलीमैटिक्स, एआई आधारित अंडरराइटिंग और हेल्थ डेटा प्लेटफॉर्म्स के उपयोग के बावजूद डेटा बिखराव एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। उद्योग एक यूनिफाइड इंश्योरेंस डेटा एक्सचेंज की मांग कर रहा है, जिससे:
- फ्रॉड कम होगा
- पर्सनलाइज्ड प्राइसिंग संभव होगी
- उपभोक्ता भरोसा बढ़ेगा
इससे वित्तीय सेवाओं का डिजिटलीकरण और अधिक प्रभावी होगा।
4. कंपोजिट लाइसेंसिंग और बीमा सुधार
बीमा कंपनियां कंपोजिट लाइसेंसिंग की मांग कर रही हैं ताकि एक ही कंपनी जीवन और नॉन-लाइफ उत्पाद दोनों पेश कर सके। इससे उत्पाद लागत घटेगी और ग्राहक जीवन-घटनाओं के अनुरूप समाधान पा सकेंगे। एसबीआई जनरल इंश्योरेंस के एमडी नवीन चंद्र झा के अनुसार, यह कदम बजट में रोडमैप के रूप में सामने आ सकता है।
5. एमएसएमई और डिजिटल लेंडिंग सुधार
एनबीएफसी और डिजिटल लेंडर्स चाहते हैं कि ग्रामीण और सेमी-अर्बन एमएसएमई को बेहतर रीफाइनेंस, बैंक जैसी टैक्स और रेगुलेटरी सुविधा मिले। साथ ही डिजिटल लेंडर्स चाहते हैं कि डिजिटल क्रेडिट में पारदर्शिता, डेटा-आधारित अंडरराइटिंग और स्पष्ट नियम हों। बजाज लाइफ इंश्योरेंस के एमडी तरुण चुघ के मुताबिक, बीमा का लक्ष्य सिर्फ वित्तीय उत्पाद नहीं, बल्कि हर भारतीय परिवार की आर्थिक सुरक्षा बनना चाहिए। बजट 2026 इस दिशा में महत्वपूर्ण अवसर दे सकता है।
बजट 2026 में संभावित ध्यान
ICICI सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के अनुसार, FY26 में विकास दर स्थिर लेकिन असमान रह सकती है। बजट में:
- इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश
- डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर
- एमएसएमई सपोर्ट
- वित्तीय समावेशन और निजी निवेश आकर्षित करना
पर जोर रहने की उम्मीद है। बड़े फिस्कल विस्तार की बजाय खर्च की गुणवत्ता, निजी निवेश और राजकोषीय संतुलन पर ध्यान केंद्रित किया जा सकता है।











