चैत्र नवरात्र 2026 19 मार्च से शुरू हो रही है। यह हिंदू नववर्ष और मां दुर्गा की भक्ति का महापर्व है, जिसमें व्रत, पूजा और सात्विक जीवनशैली का पालन आवश्यक है। इस दौरान अनुशासन, संयम, दान और मंत्र जाप से व्रत पूर्ण होता है, जबकि तामसिक भोजन और नकारात्मक व्यवहार से बचना चाहिए।
Chaitra Navratri 2026 Guidelines: चैत्र नवरात्र इस साल 19 मार्च से शुरू हो रही है और यह हिंदू नववर्ष के साथ शक्ति और मां दुर्गा की भक्ति का महापर्व है। इस नौ दिवसीय पर्व में घर और मंदिरों में व्रत, पूजा, मंत्र जाप और सात्विक भोजन का पालन किया जाता है। अनुशासन और संयम से भक्त अपनी मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा बढ़ाते हैं, जबकि तामसिक भोजन और कलह से व्रत अधूरा रह सकता है। यह पर्व बच्चों, बुजुर्गों और पूरे परिवार के लिए सुरक्षा और पवित्रता का संदेश भी देता है।
नवरात्र के दौरान अनुशासन और संयम
चैत्र नवरात्र 2026 19 मार्च से शुरू हो रही है। यह हिंदू नववर्ष की शुरुआत के साथ शक्ति और मां दुर्गा की भक्ति का महापर्व है। इस दौरान व्रत और पूजा का पालन केवल परंपरा नहीं, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक अनुशासन का प्रतीक भी है। विशेषज्ञों के अनुसार, व्रत रखने के साथ-साथ कुछ विशेष नियमों का पालन करना आवश्यक है, ताकि पूजा का फल पूर्ण रूप से प्राप्त हो सके।
सात्विक भोजन, समय पर स्नान और नियमित ध्यान इस दौरान अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। माता की कृपा पाने के लिए दुर्गा सप्तशती का पाठ या मंत्र जाप जैसे ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे’ का नियमित अभ्यास करना चाहिए। वहीं व्रत न रखने वाले भी इस समय सात्विक भोजन करें और मानसिक शांति बनाए रखें।
चैत्र नवरात्र में क्या करें
नवरात्र के दौरान सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना शुभ माना जाता है। यह शरीर और मन की शुद्धि के लिए लाभकारी है। साथ ही जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या शिक्षा से जुड़ी चीजें दान करना व्रत का पुण्य बढ़ाता है। विशेष रूप से अष्टमी और नवमी के दिन छोटी कन्याओं को देवी का रूप मानकर भोजन और उपहार देना अत्यंत शुभ माना गया है।
ध्यान और साधना के माध्यम से आत्मिक शांति और ऊर्जा प्राप्त होती है। पूजा और व्रत का महत्व केवल रीतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानसिक स्थिरता और सकारात्मक सोच को भी बढ़ावा देता है। सात्विक भोजन, संयमित जीवन और सेवा भाव से नवरात्र का अनुभव अधिक प्रभावशाली बनता है।

क्या न करें व्रत के दौरान सावधानियां
चैत्र नवरात्र के नौ दिनों में मांस, मदिरा, प्याज, लहसुन जैसी तामसिक चीजों का सेवन वर्जित है। शास्त्रों में कहा गया है कि ‘जैसा अन्न वैसा मन’, इसलिए भोजन की शुद्धता और सात्विकता पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।
इसके अलावा, बाल कटवाने, दाढ़ी बनवाने या नाखून काटने से बचना चाहिए। पूजा के समय चमड़े की वस्तुएं जैसे बेल्ट, जूते और पर्स का उपयोग भी नहीं करना चाहिए, क्योंकि ये सकारात्मक ऊर्जा को कम कर सकते हैं। घर में कलह, अपशब्द बोलना या किसी का अपमान करना भी वर्जित है।
अखंड ज्योति और घर की शुद्धता
यदि घर में अखंड ज्योति जली है, तो उसे कभी खाली न छोड़ें। समय-समय पर उसमें घी या तेल भरते रहें। यह न केवल घर की पवित्रता बनाए रखता है, बल्कि नवरात्र में मां दुर्गा की कृपा भी सुनिश्चित करता है।
नवरात्र के दौरान व्रत का आध्यात्मिक महत्व
नवरात्र केवल उपवास का नाम नहीं है, बल्कि यह मानसिक अनुशासन, संयम और सकारात्मक ऊर्जा का पर्व है। नियमित पूजा, मंत्र जाप, दान और सात्विक जीवनशैली से न केवल मां दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है, बल्कि शरीर और मन दोनों स्वस्थ रहते हैं।
इस दौरान बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें। लंबी यात्रा या नए व्यवसायिक कार्य इस समय से टालना उचित माना जाता है। यदि कोई कार्य अनिवार्य है, तो सावधानी और अनुशासन के साथ उसे संपन्न करें।
उत्सव और पूजा का व्यवस्थित आयोजन
चैत्र नवरात्र में मंदिरों और घरों में विशेष आयोजन होते हैं। भक्तगण दुर्गा सप्तशती का पाठ, अखंड ज्योति और विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। घर और मंदिर में साफ-सफाई बनाए रखना, ध्यान और जप करना इस समय की मुख्य परंपरा है।













