दार्जिलिंग में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कार्यक्रम पर विवाद, बीजेपी और टीएमसी आमने-सामने

दार्जिलिंग में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कार्यक्रम पर विवाद, बीजेपी और टीएमसी आमने-सामने

पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है। कार्यक्रम में प्रोटोकॉल और व्यवस्थाओं को लेकर उठे सवालों के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। 

नई दिल्ली: Droupadi Murmu के Darjeeling में आयोजित संथाल सम्मेलन कार्यक्रम को लेकर सियासी संग्राम छिड़ गया है। Bharatiya Janata Party ने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति के West Bengal दौरे के दौरान उनका अपमान किया गया, जिसे पार्टी ने शर्मनाक और अभूतपूर्व बताया है। वहीं इन आरोपों पर All India Trinamool Congress ने पलटवार करते हुए कहा कि राज्य सरकार को बदनाम करने के लिए राष्ट्रपति कार्यालय का दुरुपयोग किया जा रहा है। 

इस बीच मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने राष्ट्रपति के कार्यक्रम में शामिल न होने को लेकर भी साफ शब्दों में जवाब देते हुए कहा कि इस मुद्दे को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।

राष्ट्रपति के बयान के बाद बढ़ा विवाद

राष्ट्रपति Droupadi Murmu दार्जिलिंग में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन में शामिल होने पहुंची थीं। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि सम्मेलन का स्थान बदलने के कारण बड़ी संख्या में लोग इसमें शामिल नहीं हो पाए। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि यदि कार्यक्रम बड़े क्षेत्र में आयोजित किया जाता तो अधिक लोगों की भागीदारी संभव थी।

अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि जब देश का राष्ट्रपति किसी राज्य का दौरा करता है तो आमतौर पर मुख्यमंत्री या राज्य सरकार के मंत्री उनका स्वागत करने आते हैं। उन्होंने आश्चर्य व्यक्त किया कि इस कार्यक्रम में राज्य के शीर्ष नेतृत्व की उपस्थिति नहीं थी। राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि वह स्वयं बंगाल की बेटी हैं और मुख्यमंत्री को अपनी बहन की तरह मानती हैं।

बीजेपी ने उठाए प्रोटोकॉल पर सवाल

राष्ट्रपति के बयान के बाद बीजेपी नेताओं ने राज्य सरकार पर कड़ा हमला बोला। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राष्ट्रपति द्वारा व्यक्त की गई पीड़ा ने देशवासियों को दुखी किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल की सरकार ने संवैधानिक पद की गरिमा के अनुरूप व्यवस्था नहीं की।

केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राज्य सरकार ने प्रोटोकॉल की अनदेखी कर राष्ट्रपति का अपमान किया है। उनके अनुसार यह घटना दर्शाती है कि राज्य सरकार संवैधानिक संस्थाओं के प्रति आवश्यक सम्मान नहीं दिखा रही है। रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने भी घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जिस कार्यक्रम में आदिवासी समुदाय की भागीदारी महत्वपूर्ण थी, वहां उचित व्यवस्थाओं की कमी दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इस तरह की स्थिति देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद की गरिमा को प्रभावित करती है।

इसी तरह पश्चिम बंगाल के राज्यपाल और उपराष्ट्रपति पद से जुड़े नेताओं ने भी इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए कहा कि राष्ट्रपति के पद को हमेशा उच्च स्तर का सम्मान और प्रोटोकॉल मिलना चाहिए।

ममता बनर्जी का पलटवार

बीजेपी के आरोपों के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के कार्यक्रम को लेकर लगाए जा रहे आरोप निराधार हैं और राज्य सरकार को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। ममता बनर्जी ने कहा कि यह कोई आधिकारिक सरकारी कार्यक्रम नहीं था और राज्य सरकार इस आयोजन की आयोजक भी नहीं थी। उनके अनुसार राज्य प्रशासन को केवल राष्ट्रपति के आगमन और प्रस्थान की जानकारी दी जाती है, जिसके आधार पर आवश्यक व्यवस्थाएं की जाती हैं।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि यदि राष्ट्रपति राज्य में बार-बार कार्यक्रमों के लिए आती हैं, तो हर बार उनके लिए उपस्थित होना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता आम जनता की समस्याओं का समाधान करना है।

कार्यक्रम स्थल बदलने से पैदा हुआ विवाद

मामले की जड़ कार्यक्रम स्थल में किए गए बदलाव को माना जा रहा है। जानकारी के अनुसार, संथाल सम्मेलन मूल रूप से सिलीगुड़ी के बिधाननगर इलाके में आयोजित होना था। हालांकि सुरक्षा और अन्य व्यवस्थागत कारणों का हवाला देते हुए इसे बागडोगरा हवाई अड्डे के पास गोशाईपुर स्थानांतरित कर दिया गया।जब राष्ट्रपति कार्यक्रम स्थल पर पहुंचीं तो वहां अपेक्षाकृत कम लोग मौजूद थे। रिपोर्टों के अनुसार, सिलीगुड़ी के महापौर गौतम देब हवाई अड्डे पर राष्ट्रपति के स्वागत के लिए उपस्थित थे, लेकिन राज्य सरकार के वरिष्ठ मंत्री या मुख्यमंत्री कार्यक्रम में मौजूद नहीं थे।

भारत में राष्ट्रपति का पद देश का सर्वोच्च संवैधानिक पद माना जाता है। ऐसे में किसी भी राज्य में राष्ट्रपति के दौरे के दौरान प्रोटोकॉल और स्वागत व्यवस्था को लेकर विशेष ध्यान दिया जाता है। इसी वजह से इस घटना को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

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