ढाका पहुंचते ही एस जयशंकर ने खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में हिस्सा लिया और उनके बेटे तारिक रहमान से मुलाकात की। पीएम मोदी का शोक संदेश साझा किया। लेकिन यूनुस से दूरी और मुलाकात ना करना सोशल मीडिया पर तेजी से ट्रेंड करने लगी, इसे कूटनीतिक रणनीति माना जा रहा है।
Dhaka: भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने हाल ही में ढाका का दौरा किया, जो कूटनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरे के दौरान उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में हिस्सा लिया और उनके बेटे व बीएनपी नेता तारिक रहमान से मुलाकात की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शोक संदेश भी इस अवसर पर साझा किया गया।
हालांकि इस दौरे की सबसे चर्चा वाली बात रही कि एस जयशंकर ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस से कोई मुलाकात नहीं की। इस कदम ने ढाका की राजनीतिक हवा में भूचाल ला दिया और सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा शुरू हो गई।
यूनुस से दूरी: क्यों बना मुद्दा
यूनुस से मुलाकात ना करना एक ऐसा कदम था जिसने ढाका की राजनीति में तूफान पैदा कर दिया। जानकार मान रहे हैं कि यह केवल शोक संवेदना प्रकट करने का दौरा नहीं था, बल्कि भारत की भविष्य की रणनीति का संकेत भी है। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार यूनुस को भारत ने सिर्फ एक अस्थाई मुखिया के रूप में देखा और भविष्य के संभावित नेतृत्व के लिए तारिक रहमान को प्राथमिकता दी। एस जयशंकर की यह दूरी बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के लिए भी संदेश बन गई कि भारत वर्तमान व्यवस्था को पूरी तरह से स्वीकार नहीं करता।
तारिक रहमान से मुलाकात का महत्व

एस जयशंकर ने बीएनपी नेता तारिक रहमान से मुलाकात को लेकर स्पष्ट संदेश दिया। तारिक रहमान न केवल खालिदा जिया के बेटे हैं, बल्कि उन्हें भविष्य के संभावित प्रधानमंत्री के रूप में भी देखा जा रहा है। इस मुलाकात के दौरान भारत ने यह संकेत दिया कि वह बांग्लादेश के अगले राजनीतिक विकल्पों पर नजर बनाए हुए है। यह कूटनीतिक कदम इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि तारिक रहमान ने पाकिस्तान समर्थित जमात इस्लामी से दूरी बनाई है और बांग्लादेश-फर्स्ट नीति पर ध्यान केंद्रित किया है।
भारत की भविष्य की रणनीति
विदेश नीति विशेषज्ञ मान रहे हैं कि भारत ने ढाका दौरे में अपने कदमों से यह स्पष्ट संदेश दिया कि वह केवल वर्तमान सरकार के प्रति नहीं बल्कि भविष्य के नेतृत्व की संभावनाओं पर भी ध्यान रखता है। यूनुस से दूरी बनाकर भारत ने यह संकेत दिया कि अंतरिम सरकार के फैसलों से दिल्ली पूरी तरह संतुष्ट नहीं है। वहीं, तारिक रहमान के साथ मिलकर भारत ने बीएनपी को समर्थन का इशारा दिया और भविष्य में द्विपक्षीय संबंधों के लिए तैयार रहने की संभावना जताई।
एस जयशंकर की यूनुस से दूरी और तारिक रहमान से मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुईं। इस पर बांग्लादेश में राजनीतिक हलकों में भी बहस छिड़ गई। कई विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम भारत की स्पष्ट नीति का संकेत है कि वह बांग्लादेश में स्थायी और भरोसेमंद नेतृत्व को प्राथमिकता देगा।
कूटनीतिक संदेश के पीछे की सोच
विदेश नीति में अक्सर वही कदम सबसे महत्वपूर्ण होते हैं जो नजर नहीं आते। ढाका में एस जयशंकर का यह दौरा भी ऐसा ही उदाहरण है। उन्होंने केवल अंतिम संस्कार में शामिल होकर शोक व्यक्त नहीं किया, बल्कि अपने हर कदम से राजनीतिक और कूटनीतिक संदेश दिया। यूनुस से दूरी केवल एक व्यक्तिगत निर्णय नहीं था, बल्कि यह भारत की रणनीति का हिस्सा था।











