दिल्ली की सर्दियों में सुपरबग का खतरा: प्रदूषित हवा से स्वास्थ्य जोखिम

दिल्ली की सर्दियों में सुपरबग का खतरा: प्रदूषित हवा से स्वास्थ्य जोखिम

दिल्ली की सर्दियों में बढ़ते प्रदूषण के साथ हवा में सुपरबग यानी एंटीबायोटिक-रेज़िस्टेंट बैक्टीरिया की मौजूदगी गंभीर चिंता का कारण बन रही है। जेएनयू के अध्ययन में पाया गया कि हवा में स्टैफाइलोकोकस समूह के बैक्टीरिया WHO की सुरक्षित सीमा से 16 गुना अधिक हैं और इनमें से कई मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट हैं, जो त्वचा संक्रमण, निमोनिया और खून की गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ाते हैं।

Superbug risk in Delhi: दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के बीच सुपरबग यानी एंटीबायोटिक-रेज़िस्टेंट बैक्टीरिया का खतरा गंभीर हो गया है। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के शोधकर्ताओं ने दिल्ली के बाजारों, झुग्गी बस्तियों, रिहायशी अपार्टमेंट और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से हवा के नमूने लेकर अध्ययन किया। शोध में पाया गया कि हवा में स्टैफाइलोकोकस समूह के कई बैक्टीरिया मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट हैं, जो बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों के लिए गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकते हैं। विशेषज्ञों ने मास्क पहनने, एयर प्यूरीफायर इस्तेमाल करने और सुरक्षा उपाय अपनाने की सलाह दी है।

सुपरबग और प्रदूषण का सीधा कनेक्शन

दिल्ली की जहरीली सर्दियों की हवा में सुपरबग यानी एंटीबायोटिक-रेज़िस्टेंट बैक्टीरिया की उपस्थिति ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। जेएनयू के शोध में पाया गया कि हवा में मौजूद स्टैफाइलोकोकस समूह के बैक्टीरिया, जिनमें मेथिसिलिन रेजिस्टेंट स्टैफाइलोकोकस (MRS) शामिल हैं, त्वचा संक्रमण, निमोनिया, खून के संक्रमण और अस्पतालों में फैलने वाली बीमारियों का कारण बन सकते हैं।

शोध में यह भी सामने आया कि हवा में बैक्टीरिया की मात्रा WHO द्वारा तय सुरक्षित सीमा से 16 गुना अधिक पाई गई। सर्दियों में प्रदूषण चरम पर होने के कारण सुपरबग का खतरा सबसे अधिक रहता है। यह स्थिति बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों के लिए विशेष रूप से खतरनाक है।

कहाँ और कैसे फैले ये बैक्टीरिया

शोधकर्ताओं ने दिल्ली के भीड़भाड़ वाले बाजार, झुग्गी बस्तियां, रिहायशी अपार्टमेंट और जेएनयू परिसर के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से हवा के नमूने इकट्ठा किए। सभी मौसमों में परीक्षण किया गया ताकि यह समझा जा सके कि बैक्टीरिया की मात्रा और उनकी एंटीबायोटिक प्रतिरोधक क्षमता कैसे बदलती है।

इस स्टडी में 73 प्रतिशत बैक्टीरिया मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट (MDR) पाए गए। इनमें आम दवाओं जैसे मैक्रोलाइड्स, बीटा-लैक्टम, ट्राइमेथोप्रिम और जेंटामाइसिन के खिलाफ प्रतिरोध था। 36 MDR बैक्टीरिया में से 14 में mecA जीन मिला, जो मेथिसिलिन और उससे जुड़ी दवाओं को बेअसर कर देता है।

विशेषज्ञों की चेतावनी और सुझाव

शोधकर्ताओं का कहना है कि एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस अब केवल अस्पतालों तक सीमित नहीं है, बल्कि शहरी हवा में भी फैल चुका है। उन्होंने सरकार और स्वास्थ्य एजेंसियों से अपील की है कि दिल्ली की हवा में AMR (एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस) की नियमित निगरानी की जाए और इसके नियंत्रण के लिए ठोस रणनीति बनाई जाए।

सर्दियों में प्रदूषण के साथ सुपरबग का खतरा बढ़ने के कारण विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि लोग मास्क पहनें, एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें और संवेदनशील समूहों की सुरक्षा पर ध्यान दें।

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