फैटी लिवर अब सिर्फ शराब पीने वालों या मोटे लोगों तक सीमित नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार नॉन-अल्कोहॉलिक फैटी लिवर (NAFLD) और लीन NAFLD दुबले-पतले लोगों में भी पाया जा सकता है। शुरुआती स्टेज में लिवर ब्लड टेस्ट सामान्य दिख सकता है, लेकिन लिवर में फैट जमा हो रहा होता है। सही खानपान, व्यायाम और समय पर जांच से इसे नियंत्रित किया जा सकता है।
Fatty Liver Health: फैटी लिवर अब केवल शराब पीने वालों या मोटे लोगों तक सीमित नहीं है। दिल्ली के सफ़दरजंग हॉस्पिटल के डॉ. दीपक सुमन के अनुसार नॉन-अल्कोहॉलिक फैटी लिवर (NAFLD) और लीन NAFLD दुबले-पतले लोगों में भी बढ़ रहा है। शुरुआती स्टेज में लिवर ब्लड टेस्ट नॉर्मल दिख सकता है, लेकिन शरीर में फैट जमा होने लगता है। खानपान सुधारना, नियमित व्यायाम करना और हर साल लिवर जांच कराना इस बीमारी से बचाव के लिए जरूरी है।
मिथक 1 फैटी लिवर सिर्फ शराब पीने वालों को होता है
कई लोग मानते हैं कि शराब ही फैटी लिवर का मुख्य कारण है। डॉ. सुमन बताते हैं कि अब शराब न पीने वालों में भी फैटी लिवर पाया जा रहा है। खराब खानपान, मोटापा और इंसुलिन रेजिस्टेंस इसके बड़े कारण हैं।
शरीर में जमा नॉन-अल्कोहॉलिक फैट लिवर की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है। शुरुआती स्टेज में इसे नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन नजरअंदाज करने पर गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।

मिथक 2 केवल मोटे लोगों को होता है फैटी लिवर
फैटी लिवर सिर्फ मोटे लोगों तक सीमित नहीं है। लीन NAFLD दुबले-पतले लोगों में भी हो सकता है। बाहरी रूप से पतला दिखने वाला व्यक्ति अंदर से फैट जमा होने की वजह से लिवर संबंधी समस्या का शिकार हो सकता है।
इसलिए वजन को देखकर केवल स्वास्थ्य का अनुमान लगाना सही नहीं है। सही डायग्नोसिस और नियमित जांच से इसे जल्दी पहचाना जा सकता है।
मिथक 3 और 4 लिवर ब्लड टेस्ट नॉर्मल या बीमारी हमेशा ठीक हो जाती है
कई लोग सोचते हैं कि SGPT या लिवर एंजाइम्स सामान्य आने पर लिवर सुरक्षित है। विशेषज्ञ बताते हैं कि शुरुआती स्टेज में ब्लड टेस्ट सामान्य दिख सकता है, लेकिन लिवर में फैट जमा होना शुरू हो चुका होता है।
फैटी लिवर ग्रेड बढ़ने पर फाइब्रोसिस और सिरोसिस जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए खानपान, व्यायाम, शराब से परहेज और सालाना जांच जरूरी है।
स्वस्थ लिवर के लिए उपाय
- ताजे फल, सब्जियां, फाइबर युक्त आहार अपनाएं और मैदा व तली-भुनी चीजें कम करें।
- रोज़ाना व्यायाम या शारीरिक गतिविधि को दिनचर्या में शामिल करें।
- शराब का सेवन न करें और नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं।
- शुरुआती स्टेज में सुधार संभव है, इसलिए लिवर संकेतों को नजरअंदाज न करें।








