ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन हिंसक हो गए हैं और राजधानी से ग्रामीण इलाकों तक फैल चुके हैं। आर्थिक संकट के खिलाफ भड़के आंदोलन में अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें एक पैरामिलिट्री जवान भी शामिल है।
Iran Violent Protests: ईरान में सरकार के खिलाफ शुरू हुए विरोध प्रदर्शन अब हिंसक रूप ले चुके हैं। खराब अर्थव्यवस्था और बढ़ती महंगाई के खिलाफ भड़का गुस्सा राजधानी तेहरान से निकलकर ग्रामीण इलाकों तक पहुंच गया है। इन प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा में अब तक कम से कम 7 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें ईरान की पैरामिलिट्री फोर्स का एक जवान भी शामिल है।
7 लोगों की मौत की पुष्टि
रिपोर्ट्स के मुताबिक, गुरुवार को हिंसा के दौरान 5 लोगों की मौत हुई जबकि बुधवार को एक व्यक्ति की जान गई थी। इसके अलावा झड़पों में ईरान की पैरामिलिट्री फोर्स का एक जवान भी मारा गया है। हिंसा में 13 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। मरने वालों की संख्या बढ़ने के बाद हालात और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए हैं।
50 से ज्यादा शहरों तक फैला आंदोलन
तेहरान से शुरू हुआ यह आंदोलन अब ईरान के 50 से ज्यादा शहरों तक फैल चुका है। प्रदर्शनकारियों का गुस्सा खासतौर पर छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में तेजी से बढ़ा है। बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ शुरू हुआ यह प्रदर्शन सुरक्षाबलों की कार्रवाई के बाद और उग्र हो गया। कई जगहों पर हालात पूरी तरह बेकाबू नजर आ रहे हैं।
अजना शहर में सबसे ज्यादा हिंसा

सबसे ज्यादा हिंसक झड़पें तेहरान से करीब 300 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित अजना शहर में हुई हैं। यह शहर लोरेस्तान प्रांत में आता है। यहां प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच आमने-सामने की टक्कर देखने को मिली। कई इमारतों को नुकसान पहुंचाया गया और सरकारी संपत्ति को भी आग के हवाले किया गया।
लोरदेगान में सुरक्षा बलों से मुठभेड़
लोरेस्तान प्रांत के ही लोरदेगान शहर में सुरक्षा बलों और हथियारबंद प्रदर्शनकारियों के बीच भीषण झड़प हुई। रिपोर्ट्स के अनुसार प्रदर्शनकारियों ने गवर्नर के ऑफिस में आग लगा दी। इसके अलावा कुछ शहरों में ईरान रिवोल्यूशनरी गार्ड से जुड़ी इमारतों पर भी कब्जा कर लिया गया। कई जगह अदालतों की बिल्डिंग्स में भी प्रदर्शनकारी घुस गए।
गिरफ्तारियां शुरू
ईरान की सरकारी मीडिया के मुताबिक अब तक 6 लोगों की गिरफ्तारी हुई है। हालांकि यह साफ नहीं किया गया है कि इन गिरफ्तारियों का आधार क्या है। वहीं इंटरनेशनल मीडिया रिपोर्ट्स का दावा है कि अलग-अलग शहरों से करीब 20 लोगों को हिरासत में लिया गया है। सुरक्षा एजेंसियों ने कई इलाकों में गश्त बढ़ा दी है।
कारोबारियों से शुरू हुआ था विरोध
ईरान में विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत राजधानी तेहरान से हुई थी। सबसे पहले तेहरान के कारोबारियों ने व्यापार की खराब स्थिति को लेकर प्रोटेस्ट मार्च निकाला। डॉलर के मुकाबले रियाल की गिरती कीमत और लागत बढ़ने से व्यापारी बुरी तरह प्रभावित हैं।
छात्रों की एंट्री के बाद फैला आंदोलन
कारोबारियों के विरोध प्रदर्शन के बाद तेहरान यूनिवर्सिटी के छात्र भी इस आंदोलन में शामिल हो गए। छात्रों के शामिल होते ही प्रदर्शन ने बड़ा रूप ले लिया। इसके बाद आंदोलन तेजी से दूसरे शहरों में फैल गया और अब देशभर में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए हैं।
प्रतिबंधों से बिगड़ी अर्थव्यवस्था

ईरान की आर्थिक बदहाली की बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध माने जा रहे हैं। 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से अमेरिका और यूरोपीय देशों ने ईरान पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए हैं। इन प्रतिबंधों का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ा है।
इजरायल तनाव और अमेरिकी कार्रवाई
बीते साल जून में पहले इजरायल के साथ टकराव हुआ। इसके बाद अमेरिका द्वारा की गई बमबारी ने हालात और खराब कर दिए। इन घटनाओं के बाद ईरान ने न्यूक्लियर सेक्टर में अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ सहयोग बंद कर दिया। इसके जवाब में अमेरिका और यूरोपीय देशों ने ईरान पर नए प्रतिबंध लागू कर दिए।
रियाल की कीमत में भारी गिरावट
प्रतिबंधों का असर ईरान की करेंसी रियाल पर साफ दिखाई दे रहा है। एक साल पहले जहां 1 अमेरिकी डॉलर करीब 8 लाख रियाल में मिल रहा था, अब वही डॉलर लगभग 15 लाख रियाल तक पहुंच गया है। इस गिरावट ने आम लोगों की कमर तोड़ दी है।
ईरान में महंगाई दर करीब 50 फीसदी तक पहुंच चुकी है। रोजमर्रा की जरूरतों का सामान आम लोगों की पहुंच से बाहर होता जा रहा है। खाने-पीने से लेकर दवाइयों तक की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। यही वजह है कि जनता का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा है।
बैकफुट पर ईरान सरकार
लगातार बढ़ते प्रदर्शनों और हिंसा के बाद ईरान सरकार बैकफुट पर नजर आ रही है। सरकार की ओर से कहा गया है कि वह लोगों की परेशानियों को समझती है और प्रदर्शनकारियों की बात सुनने को तैयार है।
ईरान सरकार की प्रवक्ता फातिमा मोहाजिरानी ने कहा कि भले ही विरोध प्रदर्शन उग्र हों, लेकिन नागरिकों की बात सुनना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि सरकार बातचीत के जरिए शांति बनाए रखने की कोशिश कर रही है।











