ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन तीसरे हफ्ते में भी जारी हैं। सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों में अब तक 78 लोग मारे गए और 2600 से अधिक गिरफ्तार। इंटरनेट बंद और हिंसा फैलने से स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।
Iran Protest: ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन लगातार तीसरे हफ्ते में भी जारी हैं। देश के नागरिक महंगाई, बेरोजगारी और रियाल की गिरावट के खिलाफ सड़कों पर उतर रहे हैं। सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों की खबरें लगातार आ रही हैं। चश्मदीदों और मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक, अब तक कम से कम 78 लोगों की मौत हो चुकी है और 2600 से अधिक लोग गिरफ्तार किए गए हैं।
हालांकि ईरानी अधिकारियों ने विरोध को दबाने के लिए सख्त कदम उठाए हैं, लेकिन प्रदर्शन पूरे देश में फैले हुए हैं। चश्मदीदों ने बताया कि सुरक्षा बलों ने राइफल से लैस होकर कई प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाया। कुछ शहरों में अस्पतालों में शवों के ढेर लगे देखे गए हैं, जिससे हिंसा और गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
देशभर में फैली हिंसा
ईरान के 31 प्रांतों में प्रदर्शन फैल चुके हैं। अलग-अलग शहरों से हिंसा की रिपोर्टें मिल रही हैं। कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव हुआ। कई लोगों का कहना है कि पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने विरोध को दबाने के लिए अत्यधिक बल का इस्तेमाल किया। वहीं, कुछ लोगों ने अस्पतालों में मृतकों के ढेर लगे होने की जानकारी दी।

अमेरिका स्थित मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, अब तक कम से कम 78 प्रदर्शनकारी मारे गए हैं और 2600 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है। इनमें महिलाओं और बच्चों की संख्या का भी विवरण सामने आया है। प्रदर्शनकारियों की इस हिम्मत और सुरक्षा बलों की सख्ती के बीच हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं।
इंटरनेट और फोन सेवाओं पर रोक
ईरानी अधिकारियों ने देशभर में इंटरनेट और फोन सेवाएं बंद कर दी हैं। लगभग 60 घंटे से अधिक समय से देश इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क से लगभग पूरी तरह कट गया है। इससे प्रदर्शनकारी और आम नागरिकों की स्थिति जानना मुश्किल हो गया है। मीडिया और बाहरी दुनिया तक सीमित सूचना ही पहुंच पा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह का इंटरनेट ब्लैकआउट सरकार द्वारा विरोध को दबाने और सूचनाओं को नियंत्रित करने की कोशिश है। लेकिन इससे देश के अंदर की वास्तविक स्थिति का पता लगाना और अंतरराष्ट्रीय निगरानी करना और भी चुनौतीपूर्ण हो गया है।
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव
ईरान के संसद अध्यक्ष ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि यदि वॉशिंगटन ने सैन्य हस्तक्षेप किया तो अमेरिकी सैन्य ठिकानों और व्यावसायिक केंद्रों को निशाना बनाया जाएगा। यह बयान अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का संकेत है।

वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका ईरानी लोगों की मदद के लिए तैयार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी परिस्थिति में अमेरिका का उद्देश्य ईरानी नागरिकों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा करना है। इस बीच अमेरिका ने ईरान में संभावित हस्तक्षेप के विकल्पों पर विचार शुरू कर दिया है।
स्थिति पर नजर बनाए रखने की जरूरत
ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शन, इंटरनेट ब्लैकआउट और बढ़ती हिंसा के बीच स्थिति गंभीर बनी हुई है। सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की खबरें, बढ़ती मौतों और गिरफ्तारीयों ने देश के हालात को और तनावपूर्ण बना दिया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भी ईरान की स्थिति पर चिंता जताई है और मानवाधिकार संगठनों ने तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
इस समय आवश्यक है कि ईरानी सरकार और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं दोनों मिलकर स्थिति को शांत करें और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करें। अमेरिका और अन्य देशों को भी तनाव बढ़ाने के बजाय कूटनीतिक रास्ते अपनाने की जरूरत है। इस बीच देश और दुनिया के लोगों की नजर ईरान के अगले कदम और प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा पर टिकी हुई है।











