Flipkart ने अपनी होल्डिंग कंपनी Singapore से भारत शिफ्ट कर दी है। Walmart समर्थित कंपनी का यह कदम संभावित IPO की तैयारी माना जा रहा है, जिससे भारतीय शेयर बाजार में लिस्टिंग का रास्ता आसान होगा।
बिज़नेस न्यूज़: ई-कॉमर्स सेक्टर की बड़ी कंपनी Flipkart ने अपनी होल्डिंग कंपनी के पंजीकृत पते को सिंगापुर से भारत में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया पूरी कर ली है। कंपनी के लिए यह कदम रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे भारत में संभावित Initial Public Offering यानी IPO लाने की राह आसान हो सकती है।
Flipkart वॉलमार्ट के स्वामित्व वाली कंपनी है और भारत के ई-कॉमर्स बाजार में इसकी मजबूत पकड़ है। कंपनी के इस फैसले को लंबे समय से चर्चा में चल रहे ‘रिवर्स फ्लिपिंग’ यानी विदेश से वापस भारत में कॉरपोरेट संरचना लाने की प्रक्रिया के रूप में देखा जा रहा है।
केंद्र सरकार से मिली अहम मंजूरी
Flipkart की होल्डिंग कंपनी को भारत में स्थानांतरित करने के लिए केंद्र सरकार की मंजूरी बेहद महत्वपूर्ण थी। इस प्रक्रिया में प्रेस नोट 3 से जुड़ी मंजूरी भी शामिल थी। प्रेस नोट 3 विदेशी निवेश से जुड़ा एक महत्वपूर्ण नियम है जिसके तहत कुछ पड़ोसी देशों के निवेशकों को भारत में निवेश के लिए अतिरिक्त सरकारी अनुमति की जरूरत होती है।
Flipkart में चीन की प्रमुख टेक कंपनी Tencent की लगभग 5 से 6 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसी वजह से इस प्रक्रिया के दौरान प्रेस नोट 3 की मंजूरी का इंतजार किया जा रहा था।
सरकारी मंजूरी मिलने के बाद कंपनी ने अब औपचारिक रूप से अपनी होल्डिंग संरचना को भारत में स्थानांतरित कर दिया है।
NCLT से भी मिली थी हरी झंडी
सूत्रों के अनुसार कंपनी को करीब तीन महीने पहले राष्ट्रीय कंपनी विधिक पंचाट यानी NCLT से भी महत्वपूर्ण अनुमति मिल चुकी थी। NCLT ने Flipkart समूह की कई संस्थाओं के विलय को मंजूरी दी थी। यह मंजूरी कंपनी की कानूनी संरचना को सिंगापुर से भारत में स्थानांतरित करने के लिए आवश्यक थी।
हालांकि अंतिम प्रक्रिया पूरी करने के लिए प्रेस नोट 3 की मंजूरी जरूरी थी। अब यह मंजूरी मिलने के बाद Flipkart की भारत वापसी की प्रक्रिया पूरी हो गई है।
15 साल बाद भारत लौटी कंपनी
Flipkart की स्थापना भारत में हुई थी लेकिन 2011 में कंपनी ने अपनी होल्डिंग कंपनी को सिंगापुर स्थानांतरित कर दिया था। उस समय कई भारतीय स्टार्टअप विदेश में पंजीकरण कराने को बेहतर विकल्प मानते थे क्योंकि वहां का नियामकीय माहौल ज्यादा अनुकूल माना जाता था।
पिछले कुछ वर्षों में भारत का स्टार्टअप और टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम काफी मजबूत हुआ है। इसके साथ ही भारतीय पूंजी बाजार भी तेजी से विकसित हुआ है। इसी कारण अब कई भारतीय स्टार्टअप विदेश से अपनी होल्डिंग कंपनियों को वापस भारत में लाने की प्रक्रिया अपना रहे हैं। Flipkart की ‘घर वापसी’ भी इसी ट्रेंड का हिस्सा मानी जा रही है।
IPO से पहले कॉरपोरेट ढांचे को सरल बनाने की योजना
विश्लेषकों के अनुसार Flipkart का मुख्य उद्देश्य अपने संभावित IPO से पहले कॉरपोरेट संरचना को सरल बनाना है। जब कोई कंपनी शेयर बाजार में लिस्ट होने की तैयारी करती है तो निवेशकों के लिए उसका ढांचा स्पष्ट और पारदर्शी होना जरूरी होता है।
होल्डिंग कंपनी को भारत में लाने से कंपनी के वित्तीय और कानूनी ढांचे को समझना आसान होगा। इससे निवेशकों का भरोसा भी बढ़ सकता है।
Flipkart के प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी को आंतरिक पुनर्गठन के लिए भारत सरकार से मंजूरी मिल गई है। इसके तहत Flipkart Internet Private Limited अब पूरे Flipkart समूह की होल्डिंग कंपनी बन गई है।
भारत के प्रति दीर्घकालिक प्रतिबद्धता
कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि यह कदम Flipkart की भारत के प्रति दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि होल्डिंग कंपनी के भारत आने से Flipkart की ‘वतन वापसी’ पूरी हो गई है और यह कंपनी के विकास का अगला चरण साबित होगा।
Flipkart का मानना है कि भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते डिजिटल और ई-कॉमर्स बाजारों में से एक है। ऐसे में कंपनी अपने भविष्य के विस्तार के लिए भारत को सबसे महत्वपूर्ण बाजार मानती है।
मेगा IPO की तैयारी
मामले से जुड़े लोगों के अनुसार Flipkart आने वाले समय में भारतीय शेयर बाजार में एक बड़ा IPO ला सकती है। यह IPO कैलेंडर वर्ष 2026 के अंत या 2027 में आ सकता है। हालांकि इसका अंतिम फैसला बाजार की परिस्थितियों और निवेशकों की मांग पर निर्भर करेगा।
सूत्रों के अनुसार कंपनी अपने IPO के जरिए 1 से 2 अरब डॉलर तक की पूंजी जुटाने पर विचार कर रही है। यह IPO भारतीय टेक सेक्टर के सबसे बड़े सार्वजनिक निर्गमों में से एक हो सकता है।
कंपनी का संभावित वैल्यूएशन
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक Flipkart अपने IPO के समय लगभग 35 से 50 अरब डॉलर के वैल्यूएशन को लक्ष्य बना सकती है। अगर ऐसा होता है तो यह भारत के ई-कॉमर्स सेक्टर में एक नया बेंचमार्क स्थापित कर सकता है।
कंपनी ने इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए कई बड़े निवेश बैंकों के साथ शुरुआती बातचीत भी शुरू कर दी है। इनमें Goldman Sachs, Morgan Stanley और JP Morgan जैसे वैश्विक निवेश बैंक शामिल हैं।
ई-कॉमर्स बाजार में कड़ी प्रतिस्पर्धा
भारत के ई-कॉमर्स बाजार में Flipkart को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है। कंपनी के प्रमुख प्रतिस्पर्धियों में Amazon, Reliance JioMart और Tata समूह का ई-कॉमर्स कारोबार शामिल हैं।
इन कंपनियों के बीच ग्राहक, लॉजिस्टिक्स और डिजिटल पेमेंट्स जैसे क्षेत्रों में लगातार प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है। इसी वजह से Flipkart अपने बिजनेस ऑपरेशंस को मजबूत करने और बोर्ड संरचना को बेहतर बनाने पर भी काम कर रही है।
भारत का ई-कॉमर्स बाजार तेजी से बढ़ रहा
उद्योग संगठन FICCI और Deloitte की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत का ई-कॉमर्स बाजार आने वाले वर्षों में तेजी से बढ़ने वाला है। रिपोर्ट के मुताबिक यह बाजार करीब 21 प्रतिशत की वार्षिक चक्रवृद्धि दर यानी CAGR से बढ़कर वर्ष 2030 तक लगभग 325 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। इस तेजी से बढ़ते बाजार को देखते हुए Flipkart अपने विस्तार और निवेश योजनाओं को मजबूत कर रही है।












