राजस्थान सरकार ने ग्रामीण रोजगार और गाय पालन को बढ़ावा देने के लिए गांव ग्वाला योजना शुरू की है। इस योजना के तहत हर 70 गायों पर एक ग्वाला नियुक्त होगा, जो उनका पालन-पोषण करेगा। ग्वालों को मासिक 10,000 रुपये वेतन मिलेगा। यह पहल प्राचीन गोचर परंपरा को संरक्षित करने और ग्रामीणों को आर्थिक सुरक्षा देने का उद्देश्य रखती है।
गांव ग्वाला योजना: राजस्थान सरकार ने ग्रामीण रोजगार और गाय पालन को बढ़ावा देने के लिए नई योजना शुरू की है। योजना के तहत कोटा जिले के खेड़ली गांव से शुरुआत हुई, जिसमें हर 70 गायों पर एक ग्वाला नियुक्त किया जाएगा। ग्वाले का मासिक वेतन 10,000 रुपये निर्धारित है। इस पहल के साथ सरकार प्राचीन गोचर परंपरा को संरक्षित करने, ग्रामीण रोजगार बढ़ाने और बच्चों के स्वास्थ्य व विकास में योगदान देने का लक्ष्य रखती है।
योजना का उद्देश्य और महत्व
इस योजना का मुख्य उद्देश्य भारत की प्राचीन गोचर परंपरा को बचाना और ग्रामीण रोजगार बढ़ाना है। सरकार का मानना है कि ग्वालों को सम्मान और आर्थिक सुरक्षा मिलने से गायों का पालन-पोषण बेहतर तरीके से हो सकेगा। ग्रामीण बच्चों के स्वास्थ्य और मानसिक विकास में गाय का दूध योगदान देता है, और इस पहल से स्थानीय समुदाय में रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे।

शुरुआत और सम्मान समारोह
गांव ग्वाला योजना की शुरुआत कोटा जिले के रामगंजमंडी विधानसभा क्षेत्र के खेड़ली गांव से हुई। शिक्षा मंत्री मदन सिंह दिलावर ने 14 गांवों के चयनित ग्वालों को मंच पर साफा और माला पहनाकर सम्मानित किया। मंत्री ने कहा कि बच्चों के लिए गाय का दूध विशेष रूप से फायदेमंद है और यह योजना ग्रामीण जीवन में सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व भी रखती है।
नियुक्ति और वेतन विवरण
योजना में हर ग्वाले की जिम्मेदारी सुबह गांव के घरों से गायें इकट्ठा करना, पूरे दिन चराना और शाम को घर वापस पहुंचाना होगी। ग्वालों का मासिक वेतन 10,000 रुपये निर्धारित किया गया है। यह भुगतान सरकारी बजट से नहीं, बल्कि भामाशाह सहयोग और स्थानीय दान से किया जाएगा। अगर किसी गांव में गायों की संख्या बढ़ती है, तो अतिरिक्त ग्वाले भी नियुक्त किए जाएंगे।











