पाकिस्तान सूडान को 1.5 अरब डॉलर के JF-17 थंडर और हथियार बेचने की तैयारी में है। यह डील न केवल आर्थिक लाभ बढ़ाएगी, बल्कि गृहयुद्ध और क्षेत्रीय कूटनीतिक संतुलन पर भी महत्वपूर्ण असर डाल सकती है।
Pakistan: पाकिस्तान सूडान को 1.5 अरब डॉलर के लड़ाकू विमान और हथियार बेचने की तैयारी में है। यह डील केवल आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं है, बल्कि सूडान के गृहयुद्ध और क्षेत्रीय कूटनीतिक संतुलन पर भी असर डाल सकती है। पाकिस्तान इस कदम के जरिए अरब और अफ्रीकी देशों में अपने सैन्य प्रभाव को बढ़ाना चाहता है। JF-17 थंडर, जो पाक-चीन द्वारा निर्मित किफायती और बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान है, पाकिस्तान के रक्षा निर्यात को तेजी से बढ़ा रहा है और विदेशी मुद्रा भंडार को भी राहत प्रदान कर सकता है।
सूडान का गृहयुद्ध
सूडान पिछले तीन साल से गृहयुद्ध की आग में झुलस रहा है। यहां सेना और अर्धसैनिक बल रैपिड सपोर्ट फोर्स (RSF) के बीच संघर्ष जारी है। इस संघर्ष में हजारों लोग मारे जा चुके हैं और लाखों बेघर हो चुके हैं। RSF पर महिलाओं और बच्चों के साथ यौन हिंसा करने के गंभीर आरोप भी लगे हैं। ऐसे संवेदनशील हालात में पाकिस्तान द्वारा लड़ाकू विमान और हथियार भेजने की योजना को लेकर चिंता बढ़ रही है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान और सूडान के बीच लगभग 1.5 अरब डॉलर की डील पर बातचीत चल रही है। यह समझौता जल्द अंतिम रूप ले सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस डील से न सिर्फ सूडान के गृहयुद्ध की दिशा प्रभावित होगी, बल्कि अरब और अफ्रीकी देशों में पाकिस्तान की रणनीतिक भूमिका भी मजबूत होगी।
पाकिस्तान की अरब और अफ्रीकी रणनीति
पाकिस्तान पहले मुख्य रूप से अरब देशों को सैन्य प्रशिक्षण और तकनीकी मदद देता था, लेकिन अब वह सीधे हथियार और लड़ाकू विमान बेचने की दिशा में बढ़ रहा है। सऊदी अरब के साथ पाकिस्तान का 'स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट (SMDA)' इसके लिए आधार बना। यह समझौता पिछले साल सितंबर में हुआ था। इसके बाद सऊदी अरब ने JF-17 थंडर में दिलचस्पी दिखाई।

हालांकि सऊदी अरब के पास पहले से ही अमेरिका और यूरोप के अत्याधुनिक लड़ाकू विमान हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि बदलते वैश्विक हालात में सऊदी अरब अपने रक्षा साझेदारों में विविधता चाहता है। पाकिस्तान को भरोसेमंद साझेदार माना जाता है, खासकर चीन के साथ मजबूत रक्षा सहयोग के कारण।
JF-17 थंडर क्यों बन गया आकर्षक विकल्प
JF-17 थंडर पाकिस्तान और चीन द्वारा मिलकर विकसित हल्का और बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान है। इसे पाकिस्तान एयरोनॉटिकल कॉम्प्लेक्स और चीन की चेंगदू एयरक्राफ्ट कंपनी मिलकर बनाती हैं। इसका नया ब्लॉक-3 वर्जन आधुनिक रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और लंबी दूरी की मिसाइलें दागने की क्षमता रखता है।
एक JF-17 की कीमत लगभग 25 से 30 मिलियन डॉलर है, जो पश्चिमी लड़ाकू विमानों की तुलना में काफी कम है। यही कारण है कि कम बजट वाले देशों के लिए यह विमान किफायती विकल्प बन गया है। मई 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए सीमित सैन्य टकराव के बाद इस विमान की चर्चा और बढ़ गई, क्योंकि इसे लड़ाई में परखा हुआ माना जाने लगा।
सूडान और लीबिया में सैन्य सौदे
रिपोर्टों के मुताबिक पाकिस्तान सूडान की सेना को JF-17 देने की तैयारी में है। इसके अलावा लीबिया में भी विद्रोही नेता खलीफा हफ्तार के साथ हथियार सौदे की खबरें हैं। समस्या यह है कि अरब देशों में कई गुट अलग-अलग पक्षों का समर्थन करते हैं। सूडान में सऊदी अरब सेना के साथ जुड़ा माना जाता है, जबकि यूएई RSF का समर्थन करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान को बेहद सावधानी से कदम उठाना होगा, क्योंकि विरोधी पक्षों तक हथियार पहुंचने से कूटनीतिक रिश्ते खराब हो सकते हैं।
पाकिस्तान के रक्षा निर्यात में तेजी
पाकिस्तान अभी भी दुनिया के बड़े हथियार आयातकों में है, लेकिन उसका डिफेंस एक्सपोर्ट तेजी से बढ़ रहा है। पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक के आंकड़ों के अनुसार 2022-23 में हथियार निर्यात 13 मिलियन डॉलर से बढ़कर 400 मिलियन डॉलर से अधिक हो गया। JF-17 से जुड़े मौजूदा और संभावित सौदे पाकिस्तान को 13 अरब डॉलर तक कमा कर दे सकते हैं। इससे विदेशी मुद्रा भंडार को बड़ी राहत मिलेगी और आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
वैश्विक हथियार राजनीति में बदलाव
दुनिया अब एक मल्टीपोलर आर्म्स मार्केट की ओर बढ़ रही है। अमेरिका सबसे बड़ा हथियार निर्यातक है, जबकि चीन तेजी से अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि JF-17 जैसे विमान किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि देशों के लिए विकल्प बढ़ाने का जरिया हैं। अमेरिका भी इसे नकारात्मक रूप में नहीं देख रहा, क्योंकि क्षेत्रीय सुरक्षा की जिम्मेदारी अब ज्यादा स्थानीय साझेदारों पर डाली जा रही है।












