केंद्र सरकार ने गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सोशल सिक्योरिटी देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। Social Security Code Rules 2025 के ड्राफ्ट के तहत बीमा, पहचान और रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था की गई है।
New Delhi: देशभर में सही सैलरी, बेहतर working conditions और social security की मांग को लेकर क्रिसमस और नए साल पर हड़ताल कर चुके गिग वर्कर्स के लिए राहत की खबर सामने आई है। श्रम और रोजगार मंत्रालय ने गिग वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मंत्रालय ने सोशल सिक्योरिटी कोड (Central) रूल्स, 2025 के तहत ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं, जिनका मकसद गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को रजिस्ट्रेशन, पहचान और सामाजिक सुरक्षा लाभ देना है।
क्या है सोशल सिक्योरिटी कोड (Central) रूल्स, 2025
श्रम मंत्रालय द्वारा जारी यह ड्राफ्ट नियम गिग वर्कर्स और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए एक औपचारिक social security framework तैयार करता है। इसके तहत ऐसे वर्कर्स को स्वास्थ्य बीमा, जीवन बीमा और personal accident insurance जैसे लाभ मिल सकेंगे। हालांकि इसके लिए कुछ शर्तें तय की गई हैं, जिन्हें पूरा करना जरूरी होगा।
पात्रता की सबसे अहम शर्त क्या है
ड्राफ्ट नियमों के अनुसार, किसी भी गिग वर्कर को social security benefits पाने के लिए न्यूनतम कार्य अवधि पूरी करनी होगी। यदि कोई वर्कर एक ही एग्रीगेटर के साथ काम करता है, तो उसे कम से कम 90 दिनों तक उस एग्रीगेटर से जुड़ा होना जरूरी होगा। वहीं, यदि वर्कर कई एग्रीगेटर्स के साथ काम करता है, तो उसे पिछले financial year में कुल मिलाकर 120 दिनों का काम पूरा करना होगा।
काम के दिन गिनने का तरीका बदला
इन नियमों में काम के दिन गिनने का तरीका भी साफ किया गया है। किसी वर्कर को उस दिन से एग्रीगेटर से जुड़ा हुआ माना जाएगा, जिस दिन से उसने कमाई शुरू की। कमाई की रकम कितनी है, इसका कोई महत्व नहीं होगा। जिस भी calendar day में इनकम हुई है, वह दिन पात्रता के लिए गिना जाएगा।
एक दिन में कई एग्रीगेटर्स पर काम का नियम
ड्राफ्ट नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई गिग वर्कर एक ही दिन में कई एग्रीगेटर्स के लिए काम करता है, तो हर एग्रीगेटर के लिए उसे अलग दिन के रूप में गिना जाएगा। उदाहरण के तौर पर, अगर कोई वर्कर एक दिन में तीन अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स के लिए काम करता है, तो उसके खाते में तीन working days जोड़े जाएंगे।
रजिस्ट्रेशन के लिए उम्र और डॉक्यूमेंट्स
नए नियमों के तहत 16 साल से अधिक उम्र के गिग वर्कर्स रजिस्ट्रेशन के लिए पात्र होंगे। रजिस्ट्रेशन के लिए आधार नंबर और अन्य जरूरी documents का इस्तेमाल करना होगा। यह रजिस्ट्रेशन एक तय central portal के जरिए किया जाएगा, जिससे गिग वर्कर्स की पहचान और डेटा को एक ही सिस्टम में लाया जा सके।
यूनिक ID और Universal Account Number की व्यवस्था
ड्राफ्ट नियमों में एग्रीगेटर्स की जिम्मेदारी भी तय की गई है। एग्रीगेटर्स को गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स की जानकारी central portal पर साझा करनी होगी, ताकि हर वर्कर के लिए यूनिवर्सल अकाउंट नंबर या यूनिक ID तैयार की जा सके। इससे वर्कर की पहचान, काम का रिकॉर्ड और social security benefits को ट्रैक करना आसान होगा।
हर रजिस्टर्ड वर्कर को मिलेगा पहचान पत्र
नियमों के अनुसार, हर योग्य और रजिस्टर्ड गिग वर्कर को एक identity card दिया जाएगा। यह कार्ड डिजिटल या फिजिकल दोनों रूप में हो सकता है। इस कार्ड पर वर्कर की फोटो और जरूरी जानकारी होगी। वर्कर इस कार्ड को तय central portal से डाउनलोड भी कर सकेगा।
सोशल सिक्योरिटी फंड कैसे बनेगा
केंद्र सरकार एक अधिकारी या एजेंसी को नामित करेगी, जो एग्रीगेटर्स से contribution इकट्ठा करने की जिम्मेदारी संभालेगी। यह contribution गिग वर्कर्स और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए बनाए गए एक अलग social security fund में जमा किया जाएगा। यह फंड भविष्य में वर्कर्स को मिलने वाले लाभों के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।
किन हालात में लाभ बंद हो जाएंगे
ड्राफ्ट नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि कोई भी रजिस्टर्ड वर्कर 60 साल की उम्र पूरी करने के बाद social security schemes के लाभ के लिए पात्र नहीं रहेगा। इसके अलावा, यदि कोई वर्कर 90 दिनों से कम समय के लिए किसी भी एग्रीगेटर के साथ काम करता है, या कई एग्रीगेटर्स के मामले में पिछले financial year में 120 दिनों से कम काम करता है, तो वह भी लाभ के लिए एलिजिबल नहीं माना जाएगा।
राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड में प्रतिनिधित्व
नए नियमों के तहत केंद्र सरकार असंगठित श्रमिकों के लिए राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड में गिग वर्कर्स और प्लेटफॉर्म वर्कर्स का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करेगी। बोर्ड में इन वर्कर्स की अलग-अलग कैटेगरी का प्रतिनिधित्व करने वाले पांच सदस्यों को rotation के आधार पर नामित किया जाएगा। इसका मकसद नीतियों में गिग वर्कर्स की आवाज को जगह देना है।
गिग वर्कर्स की लंबे समय से चली आ रही मांग
गिग इकॉनमी से जुड़े लाखों वर्कर्स लंबे समय से यह मांग कर रहे थे कि उन्हें भी संगठित क्षेत्र की तरह social security मिले। food delivery, ride-hailing, e-commerce और logistics जैसे सेक्टर्स में काम करने वाले वर्कर्स ने बार-बार सुरक्षा, बीमा और स्थायित्व की कमी की बात उठाई है। यह ड्राफ्ट नियम उनकी इन्हीं मांगों के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है।
अभी ड्राफ्ट है, नियमों में हो सकता है बदलाव
यह ध्यान रखना जरूरी है कि सोशल सिक्योरिटी कोड (Central) रूल्स, 2025 फिलहाल ड्राफ्ट स्टेज में हैं। आने वाले समय में इसमें सुझावों और आपत्तियों के आधार पर बदलाव संभव हैं। इसके बाद ही इन्हें अंतिम रूप दिया जाएगा और पूरे देश में लागू किया जाएगा।












