HAM के विधायक कैबिनेट से बाहर, फिर भी मांझी ने जीत पर क्यों जताया संतोष?

HAM के विधायक कैबिनेट से बाहर, फिर भी मांझी ने जीत पर क्यों जताया संतोष?

बिहार चुनाव 2025 में HAM के पांच विधायक जीतने के बावजूद नीतीश कैबिनेट में जगह नहीं मिली। संतोष सुमन तीसरी बार मंत्री बने, जिससे पार्टी की राजनीतिक स्थिति मजबूत बनी और HAM की सक्रियता बनी रही।

Patna: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) ने NDA के तहत कुल 6 सीटों पर चुनाव लड़ा था। इस बार पार्टी के पांच नेताओं ने जीत हासिल की, लेकिन चुनावी सफलता के बावजूद किसी भी विधायक को नीतीश कुमार की नई कैबिनेट में जगह नहीं मिली। इस पर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि HAM के नेताओं को नजरअंदाज किया गया।

जीतन राम मांझी की प्रतिक्रिया

HAM के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने कैबिनेट में विधायकों को जगह न मिलने के बावजूद संतोष व्यक्त किया। उनका कहना है कि पार्टी की राजनीतिक स्थिति मजबूत है और उनका ध्यान आगामी विधानसभा और स्थानीय चुनावों पर है। मांझी का मनोबल बढ़ा हुआ है क्योंकि उनके बेटे संतोष सुमन को एक बार फिर मंत्री बनाया गया है।

जीतन राम मांझी के पांच विजेता विधायक

HAM की जीत हासिल करने वाले पांच विधायक इस प्रकार हैं-

  • इमामगंज से दीपा मांझी (जीतन राम मांझी की बहू)
  • कुटुंबा से ललन राम, जिन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम को हराया
  • बाराचट्टी से ज्योति देवी (जीतन राम मांझी की समधन)
  • अतरी से रोमित कुमार
  • सिकंदरा से प्रफुल्ल कुमार मांझी

इन सभी विधायकों को कैबिनेट में जगह नहीं दी गई, बावजूद इसके पार्टी में किसी प्रकार की नाराजगी सामने नहीं आई। राजनीतिक विश्लेषक इसे HAM की रणनीतिक स्थिरता के संकेत के रूप में देख रहे हैं।

संतोष सुमन का तीसरा कार्यकाल

HAM के लिए सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक घटना है जीतन राम मांझी के बेटे संतोष सुमन का तीसरी बार मंत्री बनना। संतोष सुमन HAM के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और बिहार विधान परिषद के सदस्य भी। उनका मंत्री बनना पार्टी की राजनीतिक स्थिति को मजबूत करने वाला कदम माना जा रहा है।

संतोष सुमन की राजनीतिक

संतोष सुमन को पढ़े-लिखे और योजनाबद्ध नेता के रूप में जाना जाता है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में मास्टर की डिग्री हासिल की और UGC-NET पास किया। इसके अलावा उन्होंने मगध विश्वविद्यालय से पीएचडी भी प्राप्त की। राजनीति में आने से पहले वे लेक्चरर और सोशल वर्कर के रूप में कार्यरत रहे।

मंत्री रहते हुए उन्होंने अनुसूचित जाति और जनजाति कल्याण विभाग में कई अहम योजनाओं को लागू किया। 2023 में उन्होंने नीतीश कैबिनेट से इस्तीफा दिया था, जिससे पार्टी की स्वतंत्र पहचान को मजबूत राजनीतिक संदेश मिला।

HAM का चुनावी प्रदर्शन

हालांकि 2025 के बिहार चुनाव में HAM का प्रदर्शन बहुत बड़ा नहीं रहा, फिर भी राजनीतिक समीकरणों में यह पार्टी अहम भूमिका निभा रही है। HAM की राजनीतिक सक्रियता और संतोष सुमन का कैबिनेट में होना, पार्टी की स्थिति को मजबूत करता है। 

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