उत्तर प्रदेश के मैनपुरी के सूरज तिवारी ने गंभीर ट्रेन हादसे में दोनों पैर और एक हाथ खोने के बावजूद हार नहीं मानी। कठिन परिस्थितियों के बीच पढ़ाई जारी रखते हुए उन्होंने फिर से UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास की और ऑल इंडिया रैंक 943 हासिल कर अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय दिया।
UPSC Inspirational Story: उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले के रहने वाले सूरज तिवारी ने संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा 2025 में ऑल इंडिया रैंक 943 हासिल कर एक बार फिर सफलता प्राप्त की है। साल 2017 में गाजियाबाद के दादरी इलाके में हुए भीषण ट्रेन हादसे में उन्होंने अपने दोनों पैर और एक हाथ गंवा दिए थे, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने पढ़ाई नहीं छोड़ी। दिल्ली में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से पढ़ाई करते हुए उन्होंने लगातार मेहनत की और शारीरिक चुनौतियों के बावजूद परीक्षा की तैयारी जारी रखी, जिसके दम पर उन्होंने दोबारा UPSC परीक्षा पास कर ली।
ट्रेन हादसे के बाद भी नहीं टूटा हौसला
सूरज तिवारी की जिंदगी साल 2017 में आए एक भीषण ट्रेन हादसे के बाद पूरी तरह बदल गई थी। 24 जनवरी 2017 को गाजियाबाद के दादरी इलाके में हुए हादसे में उन्होंने अपने दोनों पैर और एक हाथ खो दिया, जबकि दूसरे हाथ की कई उंगलियां भी चली गईं। लंबे समय तक अस्पताल में इलाज और महीनों तक बिस्तर पर रहने के बाद उन्हें नई जिंदगी की शुरुआत करनी पड़ी।
इस कठिन दौर में उनके परिवार को भी कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। इसी बीच उनके भाई का निधन भी हो गया। इतने बड़े झटकों के बावजूद सूरज ने खुद को संभाला और अपने सपनों को छोड़ने के बजाय उन्हें पूरा करने का फैसला किया।

मैनपुरी के छोटे गांव से शुरू हुई पढ़ाई
सूरज तिवारी का जन्म उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले की कुरावली तहसील के घरनाजपुर इलाके में एक साधारण परिवार में हुआ। उनके पिता सिलाई का काम करते हैं और छोटी सी दुकान चलाकर परिवार का खर्च चलाते थे। सीमित संसाधनों के बावजूद सूरज ने पढ़ाई में हमेशा अच्छा प्रदर्शन किया।
उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा महर्षि परशुराम स्कूल से प्राप्त की। इसके बाद एसबीआरएल इंटर कॉलेज, मैनपुरी से 10वीं और संपूर्णानंद इंटर कॉलेज, बेवर से 12वीं की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने बड़े लक्ष्य हासिल करने का सपना देखना शुरू कर दिया था।
कठिन हालात में भी जारी रखी UPSC की तैयारी
हादसे के बाद सूरज ने अपने जीवन को फिर से व्यवस्थित करने की कोशिश की। साल 2018 में वे दिल्ली पहुंचे और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में दाखिला लेकर बीए की पढ़ाई शुरू की। साल 2021 में उन्होंने ग्रेजुएशन पूरी की और आगे एमए में दाखिला लिया। इसी दौरान उन्होंने UPSC परीक्षा की तैयारी भी शुरू कर दी।
अपनी शारीरिक चुनौतियों के बावजूद सूरज रोजाना 15 से 17 घंटे तक पढ़ाई करते थे। उन्होंने किसी बड़े कोचिंग संस्थान पर निर्भर रहने के बजाय खुद की मेहनत और अनुशासन को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया। परीक्षा के दिन वे व्हीलचेयर पर परीक्षा केंद्र पहुंचे और पूरे आत्मविश्वास के साथ परीक्षा दी।
दूसरी बार पास की UPSC परीक्षा
सूरज तिवारी इससे पहले साल 2022 में भी यूपीएससी परीक्षा पास कर चुके हैं। उस समय उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 917 हासिल की थी, जिसके आधार पर उनका चयन भारतीय सूचना सेवा (IIS) में हुआ था। वर्तमान में वे इसी सेवा में अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं।
अब एक बार फिर उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास कर यह साबित कर दिया है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, मजबूत इरादे और मेहनत के आगे हर बाधा छोटी पड़ जाती है।












