इंडिगो एयरलाइन की 70 से अधिक उड़ानें बुधवार को रद्द हुईं। FDТL नियमों के नए चरण के कारण चालक दल की कमी बढ़ गई। यात्रियों को देरी और रद्द उड़ानों से परेशानी का सामना करना पड़ा, एयरलाइन ने सुरक्षा को प्राथमिकता बताया।
New Delhi: इंडिगो एयरलाइन के यात्रियों को बुधवार को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ा, जब 70 से अधिक उड़ानें रद्द कर दी गईं। एयरलाइन ने इसके पीछे चालक दल की कमी को मुख्य कारण बताया है। सूत्रों के अनुसार, यह कमी उड़ान ड्यूटी समय सीमा (Flight Duty Time Limit – FDТL) के दूसरे चरण के लागू होने के बाद और बढ़ गई है। नए नियमों के कारण एयरलाइन को अपने चालक दल का समय और कार्यभार सावधानीपूर्वक संतुलित करना पड़ रहा है, जिससे कई हवाई अड्डों पर उड़ानों में देरी और रद्द होने की स्थिति उत्पन्न हो रही है।
इंडिगो के प्रवक्ता ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में तकनीकी समस्याओं, हवाई अड्डों पर भीड़ और परिचालन आवश्यकताओं के कारण कई उड़ानों में देरी हुई और कुछ उड़ानें रद्द भी हुई हैं। हालांकि, एयरलाइन के लिए सबसे बड़ी चुनौती एफडीटीएल नियमों का दूसरा चरण रहा, जिसने रात्रि उड़ानों और रात्रि लैंडिंग पर नई सीमाएं तय की हैं।
रद्द और देरी वाली उड़ानों का असर
सूत्रों ने बताया कि एयरलाइन के लिए स्थिति मंगलवार को ही गंभीर हो गई थी, लेकिन बुधवार को यह और भी जटिल हो गई। देश के प्रमुख हवाई अड्डों से कई उड़ानें रद्द हुईं और जो उड़ानें उड़ीं, उनमें भारी देरी हुई। नागरिक उड्डयन मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, मंगलवार को छह प्रमुख घरेलू हवाई अड्डों पर इंडिगो की समय पर उड़ानें केवल 35 प्रतिशत रही। इसी अवधि में एयर इंडिया का प्रदर्शन 67.2 प्रतिशत, एयर इंडिया एक्सप्रेस 79.5 प्रतिशत, स्पाइसजेट 82.5 प्रतिशत और आकाश एयर 73.2 प्रतिशत रहा।
यात्री उन उड़ानों के कारण असुविधा का सामना कर रहे हैं, जो तय समय पर नहीं उड़ पाईं या रद्द कर दी गईं। इंडिगो के यात्रियों के लिए यह स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है क्योंकि कई लोग काम, बैठक और अन्य योजनाओं के लिए इस एयरलाइन पर निर्भर हैं।
एफडीटीएल नियमों में बदलाव
नए FDТL नियमों का उद्देश्य एयरलाइन कर्मचारियों की थकान और सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इन नियमों में साप्ताहिक विश्राम अवधि को 48 घंटे करना, रात्रि उड़ानों के समय में बदलाव और रात्रि लैंडिंग की संख्या को पहले छह से दो तक सीमित करना शामिल है।
शुरुआत में इंडिगो और एयर इंडिया समेत अन्य घरेलू एयरलाइनों ने इन नियमों का विरोध किया था। उनका कहना था कि नए नियमों से चालक दल की पर्याप्त उपलब्धता पर असर पड़ेगा और परिचालन में कठिनाइयाँ आएंगी।
हालांकि, दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद डीजीसीए ने इन नियमों को एक वर्ष से अधिक की देरी के बाद चरणबद्ध तरीके से लागू किया। पहला चरण जुलाई से शुरू हुआ, जबकि दूसरा चरण, जिसमें रात्रि लैंडिंग सीमित की गई, 1 नवंबर से लागू किया गया। एयरलाइनों को नियमों के कार्यान्वयन में कुछ बदलाव की अनुमति भी दी गई, ताकि परिचालन प्रभावित न हो।











