Milan 2026 बहुराष्ट्रीय समुद्री अभ्यास के दौरान ईरानी वॉरशिप IRIS Dena पर अमेरिकी सबमरीन ने हमला किया। 87 सैनिक मरे, 60 लापता। भारत की भूमिका केवल अभ्यास की मेजबानी तक सीमित रही, घटना से अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा पर प्रभाव।
Milan 2026: इंडियन नेवी का बहुराष्ट्रीय समुद्री अभ्यास, Milan 2026, भारत के विशाखापत्तनम के पास आयोजित किया गया था। यह अभ्यास 21 फरवरी से 25 फरवरी 2026 तक चला और इसका उद्देश्य क्षेत्रीय नौसैनिक सहयोग को मजबूत करना और समुद्री सुरक्षा पर सामूहिक रणनीति को परखना था। Milan एक्सरसाइज का यह 13वां संस्करण था और इसे अब तक का सबसे बड़ा अभ्यास माना जा रहा है। इसमें 74 देशों ने हिस्सा लिया, जिनमें जर्मनी, फिलीपींस और UAE ने पहली बार अपने मिलिट्री एसेट्स के साथ भाग लिया।
अभ्यास में शामिल सैन्य उपकरण
Milan 2026 में लगभग 42 वॉरशिप और 29 सैन्य विमान हिस्सा ले रहे थे। इसमें 18 विदेशी वॉरशिप शामिल थीं, जो विभिन्न देशों की नौसेनाओं का प्रतिनिधित्व कर रही थीं। इंडियन नेवी के अनुसार, ये वॉरशिप और विमान सामरिक अभ्यास, समुद्री नियंत्रण और आपसी तालमेल के लिए इस्तेमाल किए गए। इस अभ्यास में भाग लेने वाले जहाजों में ईरान का वॉरशिप IRIS Dena भी शामिल था। यह जहाज अभ्यास समाप्त होने के बाद ईरान लौट रहा था।
ईरानी वॉरशिप IRIS Dena पर हमला
IRIS Dena के साथ दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई जब यह जहाज श्रीलंका के पास Indian Ocean में यात्रा कर रहा था। अमेरिकी नेवी की एक सबमरीन ने इस वॉरशिप पर तारपीडो हमला किया। इस हमले में IRIS Dena समुद्र में डूब गया और जहाज पर सवार करीब 180 सैनिकों में से कम से कम 87 की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि लगभग 60 लोग अभी भी लापता हैं। श्रीलंकाई नेवी ने 32 नाविकों को बचाया। अमेरिकी रक्षा विभाग ने इस घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि यह विश्व युद्ध-2 के बाद किसी वॉरशिप को तारपीडो से डुबाने का पहला मामला है।
घटना की गंभीरता
विशेषज्ञों के अनुसार, IRIS Dena पर हमला केवल एक naval clash नहीं था बल्कि यह एक ऐतिहासिक सैन्य क्षण भी माना जा रहा है। ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी विदेशी वॉरशिप को बहुराष्ट्रीय अभ्यास से लौटते समय समुद्र में तारपीडो से मार गिराया गया। यह घटना खाड़ी क्षेत्र और Indian Ocean में बढ़ते सैन्य तनाव का संकेत देती है।

ईरान का रुख
ईरान ने इस हमले के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है और चेतावनी दी है कि ऐसे कृत्य की पुनरावृत्ति बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके साथ ही ईरान ने यह भी रेखांकित किया कि IRIS Dena हाल ही में इंडिया के Milan अभ्यास में शामिल था। ईरानी अधिकारियों ने इस घटना को अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक नियमों की सीमा के तहत देखा और इसे अमेरिकी आक्रामकता के रूप में प्रस्तुत किया।
अंतरराष्ट्रीय नियमों की व्याख्या
किसी भी देश की वॉरशिप उसकी खुद की नेवी के अधीन होती है। जब यह जहाज किसी दूसरे देश के पोर्ट पर आता है तो वहां तक उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी अतिथि देश की होती है। लेकिन जैसे ही वह high seas में प्रवेश करता है, उसकी सुरक्षा पूरी तरह से मूल देश की नेवी के जिम्मे होती है।
इसलिए IRIS Dena के साथ जो हुआ, वह अंतरराष्ट्रीय नियमों के हिसाब से अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का नतीजा माना जा रहा है। भारत की भूमिका केवल Milan अभ्यास की मेजबानी तक सीमित थी।
Milan 2026 के महत्व
Milan अभ्यास का उद्देश्य नौसैनिक तालमेल, रणनीतिक अभ्यास और समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करना था। भारत ने इस अभ्यास के दौरान अपनी समुद्री सीमा में सभी जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित की। अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हुए इस हमले को भारत की जिम्मेदारी से जोड़ना गलत है। विशेषज्ञों का कहना है कि Milan अभ्यास भारत की कूटनीतिक और सैन्य दक्षता का प्रदर्शन था और इसके जरिए भारत ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा दिया।
IRIS Dena पर हमला मध्य पूर्व और Indian Ocean में चल रहे संघर्ष का विस्तार है। इससे स्पष्ट है कि ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव का असर समुद्र और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों तक पहुंच गया है। इस घटना ने समुद्री व्यापार, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।










