Infosys ने अपने इतिहास के सबसे बड़े ₹18,000 करोड़ शेयर बायबैक का कार्यक्रम शुरू किया। 20 से 26 नवंबर तक निवेशक अपने शेयर टेंडर कर सकते हैं। इस बायबैक से लाभ, बेहतर रिटर्न और टैक्स योजना का अवसर मिलेगा।
Infosys Share: आईटी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी Infosys ने 20 नवंबर से अपने इतिहास के सबसे बड़े शेयर बायबैक का प्रोग्राम शुरू कर दिया है। कंपनी इस बायबैक के तहत कुल ₹18,000 करोड़ खर्च करके अपने शेयरों को वापस खरीदेगी। बायबैक का उद्देश्य कंपनी की फाइनेंशियल स्ट्रेंथ को दिखाना और शेयरहोल्डर्स को लाभ पहुंचाना है। निवेशकों के लिए यह मौका खास है, क्योंकि एलिजिबल शेयरधारकों को तय कीमत पर अपने शेयर टेंडर करने का अवसर मिलेगा, जिससे उन्हें मार्केट प्राइस की तुलना में बेहतर रिटर्न मिल सकता है।
बायबैक की समयसीमा
Infosys का यह शेयर बायबैक 20 नवंबर से शुरू होकर 26 नवंबर शाम 5 बजे तक चलेगा। बायबैक में हिस्सा लेने वाले निवेशकों को भुगतान 3 दिसंबर तक कर दिया जाएगा। यह प्रक्रिया केवल उन शेयरधारकों के लिए खुली है जिनके पास 14 नवंबर तक Infosys के शेयर डिमैट अकाउंट में मौजूद थे। इस डेट को Record Date कहा गया है।
इसके तहत एलिजिबल शेयरहोल्डर्स अपने शेयरों को टेंडर ऑफर के जरिए कंपनी को बेच सकते हैं। केफिन टेक्नोलॉजीज लिमिटेड इस बायबैक का रजिस्ट्रार है, जबकि Kotak Investment Banking पूरे सौदे का प्रबंधन कर रही है।
बायबैक के प्रमुख विवरण
इस बायबैक के तहत Infosys 5 रुपये फेस वैल्यू वाले 10 करोड़ तक के फुली-पेड शेयर वापस खरीदेगी। बायबैक की कीमत 1,800 रुपये प्रति शेयर तय की गई है। कंपनी अपनी उपलब्ध नकदी का इस्तेमाल करके यह बायबैक पूरा करेगी और इसके कारण कंपनी की वित्तीय स्थिति पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा।
छोटे शेयरधारकों के लिए हर 11 शेयर पर 2 शेयर टेंडर करने का हक तय किया गया है, जबकि सामान्य श्रेणी के अन्य शेयरधारकों के लिए हर 706 शेयर पर 17 शेयर की एलिजिबिलिटी निर्धारित की गई है। यह शर्तें सुनिश्चित करती हैं कि छोटे निवेशक भी इस अवसर का लाभ उठा सकें और सभी शेयरधारकों के लिए प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे।
बायबैक में निवेश करने के फायदे
विशेषज्ञों का कहना है कि निचले टैक्स ब्रैकेट में आने वाले निवेशकों के लिए बायबैक में हिस्सा लेना बेहतर हो सकता है, क्योंकि इससे उन्हें अधिक नकदी उपलब्ध होगी। हालांकि उच्च टैक्स श्रेणी वाले निवेशकों के लिए यह विकल्प हमेशा फायदेमंद नहीं होता। 16 लाख रुपये से अधिक वार्षिक आय वाले निवेशकों के लिए खुले बाजार में शेयर बेचकर टैक्स बचाने की संभावना अधिक रहती है। बायबैक से मिलने वाली राशि को नए टैक्स नियमों के तहत Dividend Income माना जाएगा और इस पर व्यक्तिगत टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लगेगा।
कैपिटल लॉस और टैक्स सेट-ऑफ की सुविधा
Infosys द्वारा खरीदे गए शेयरों की लागत शेयरधारकों के लिए Capital Loss मानी जाएगी। यह नुकसान उन्हें अपनी अन्य Capital Gain के साथ Adjust करने का मौका देगा। यदि चालू वर्ष में कैपिटल गेन कम हैं और यह घाटा पूरी तरह एडजस्ट नहीं होता, तो इसे अगले आठ वर्षों तक आगे ले जाकर भविष्य के Capital Gain के खिलाफ Set-off किया जा सकता है। इस तरह बायबैक न केवल निवेशकों को तत्काल नकदी देता है, बल्कि टैक्स योजना के लिहाज से भी लाभकारी साबित हो सकता है।










