इंजीनियरिंग प्रवेश नियमों में संशोधन, वैदिक स्ट्रीम के छात्रों को मौका

इंजीनियरिंग प्रवेश नियमों में संशोधन, वैदिक स्ट्रीम के छात्रों को मौका

AICTE ने वैदिक शिक्षा बोर्ड के छात्रों को इंजीनियरिंग प्रवेश में अन्य बोर्डों के बराबर मानने का निर्देश दिया है। ‘वेद भूषण’ और ‘वेद विभूषण’ प्रमाण पत्र अब 10वीं और 12वीं के समकक्ष माने जाएंगे। हालांकि, बीटेक में प्रवेश के लिए फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स की अनिवार्य शर्त लागू रहेगी।

AICTE Engineering Admission Guidelines: अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद ने महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेद संस्कृत शिक्षा बोर्ड से पास छात्रों को इंजीनियरिंग कोर्स में प्रवेश के लिए समान मान्यता देने का निर्देश जारी किया है। देशभर के तकनीकी संस्थानों को भेजे गए इस निर्देश के तहत ‘वेद भूषण’ और ‘वेद विभूषण’ को क्रमशः 10वीं और 12वीं के बराबर माना जाएगा। हालांकि बीटेक में दाखिले के लिए फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स अनिवार्य रहेंगे। यह कदम तकनीकी शिक्षा में अधिक समावेशन और खाली सीटों की समस्या को देखते हुए उठाया गया है।

वैदिक बोर्ड को मिली बराबरी की मान्यता

यह फैसला Maharshi Sandipani Rashtriya Veda Sanskrit Shiksha Board से जुड़े छात्रों के लिए अहम है। इस बोर्ड के ‘वेद भूषण’ और ‘वेद विभूषण’ प्रमाण पत्रों को अब क्रमशः कक्षा 10 और कक्षा 12 के समकक्ष माना जाएगा।

पहले इस बोर्ड से पढ़े छात्रों को तकनीकी शिक्षा में प्रवेश नहीं मिल पाता था। अब AICTE के नए निर्देश के बाद, यदि छात्र भौतिकी, रसायन और गणित जैसी अनिवार्य विषय योग्यता पूरी करते हैं, तो उन्हें इंजीनियरिंग प्रवेश से रोका नहीं जाएगा।

इंजीनियरिंग एडमिशन के लिए क्या है शर्त

AICTE के नियमों के मुताबिक बीटेक में प्रवेश के लिए 12वीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स का अध्ययन जरूरी है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि वैदिक बोर्ड से उत्तीर्ण छात्र भी यदि ये विषय पढ़े हुए हैं, तो उन्हें समान अवसर दिया जाए।

AICTE के सलाहकार एन.एच. सिद्धलिंगा स्वामी द्वारा जारी पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि Association of Indian Universities पहले ही इस बोर्ड की योग्यता को मान्यता दे चुका है। इसके अलावा शिक्षा मंत्रालय ने भी MSRVSSB को नियमित स्कूल बोर्ड का दर्जा दिया है।

खाली सीटें और नई बहस

विशेषज्ञों का कहना है कि देश के कई इंजीनियरिंग कॉलेजों में हर साल 30 से 40 प्रतिशत सीटें खाली रह जाती हैं। ऐसे में यह फैसला निजी संस्थानों के लिए राहत भरा हो सकता है।

हालांकि, कुछ शिक्षाविद गुणवत्ता और पाठ्यक्रम की समानता को लेकर सवाल भी उठा रहे हैं। उनका मानना है कि तकनीकी शिक्षा में बुनियादी विज्ञान विषयों की मजबूत तैयारी जरूरी है, ताकि छात्रों को आगे चलकर कठिन पाठ्यक्रम में दिक्कत न हो।

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