डीके शिवकुमार की अचानक मुंबई यात्रा ने कर्नाटक में सत्ता-साझाकरण विवाद को और बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा कि यह केवल पारिवारिक कार्यक्रम था और कोई राजनीतिक मुलाकात नहीं हुई। उनके बयान और सिद्धरमैया की प्रतिक्रियाओं से कांग्रेस के भीतर तनाव बढ़ गया है।
Karnataka Politics: कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की अचानक मुंबई यात्रा ने राज्य की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही खींचतान के बीच इस दौरे ने कई सवाल खड़े कर दिए। हालांकि शिवकुमार का कहना है कि यह यात्रा पूरी तरह निजी है और इसमें किसी भी राजनीतिक बैठक का उद्देश्य नहीं था। उन्होंने साफ बताया कि वह केवल पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल होने आए हैं और किसी भी राजनीतिक चर्चा की योजना नहीं थी।
‘मीटिंग करनी होती तो मुंबई क्यों आता’ – शिवकुमार
मुंबई में पत्रकारों से बातचीत के दौरान शिवकुमार ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी से मुलाकात की खबरों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि वह सिर्फ फैमिली फंक्शन के लिए आए हैं और किसी भी राजनीतिक बैठक की बात सही नहीं है।
उन्होंने कहा, 'मैं यहां सिर्फ फैमिली फंक्शन में आया हूं। कोई मीटिंग नहीं हुई। मीटिंग करनी होती तो मुंबई क्यों आता? वह बेंगलुरु या दिल्ली में होती।' जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने मुख्यमंत्री पद के मुद्दे पर नेतृत्व से बात की, तो शिवकुमार ने जवाब दिया, 'नहीं… मुझे किसी भी चीज की जल्दी नहीं है।'
सिद्धरमैया और शिवकुमार के बीच बढ़ता वाकयुद्ध

इससे पहले मुख्यमंत्री सिद्धरमैया और उपमुख्यमंत्री शिवकुमार के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर खींचतान सार्वजनिक हो गई थी। दोनों के बयानों में यह स्पष्ट दिखा कि सत्ता-साझाकरण को लेकर असहमति गहरा रही है। शिवकुमार ने कहा था कि 'वचन की ताकत ही विश्व-ताकत है।' इसके जवाब में सिद्धरमैया ने कहा, 'वचन तभी ताकत बनता है जब वह लोगों की जिंदगी बेहतर करे।'
सिद्धरमैया का दावा है कि वह पूरा पांच साल का कार्यकाल पूरा करेंगे। वहीं शिवकुमार की मांग है कि सरकार के आधे कार्यकाल पूरे होने के बाद उन्हें मुख्यमंत्री बनाया जाए, जैसा कि कथित वचन में तय हुआ था।
सोशल मीडिया पर भी दिखी बयानबाजी
यह विवाद सोशल मीडिया तक पहुंच गया है। मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने एक्स पर लिखा कि कर्नाटक की जनता ने उन्हें पांच साल की जिम्मेदारी दी है और यही जनादेश उनका कर्तव्य है। इसके जवाब में शिवकुमार ने एक्स पर पोस्ट किया, 'अपनी बात पर कायम रहना दुनिया की सबसे बड़ी ताकत है। वचन की ताकत ही दुनिया की असली शक्ति है।'
उन्होंने यह भी कहा कि चाहे न्यायाधीश हों या कोई और, सभी को अपनी बात पर कायम रहना चाहिए। इस पोस्ट को कांग्रेस हाईकमान को याद दिलाने जैसा माना जा रहा है कि 2023 चुनाव के बाद दोनों नेताओं के बीच कथित रूप से सत्ता-साझाकरण का समझौता हुआ था।
सिद्धरमैया ने वादों का दिया हवाला
सिद्धरमैया ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि उन्होंने जनता से किए वादों को कैसे पूरा किया। उन्होंने पांच गारंटी योजनाओं—‘शक्ति’, ‘गृह लक्ष्मी’, ‘युवा निधि’, ‘अन्न भाग्य’ और ‘गृह ज्योति’—का जिक्र किया। इन योजनाओं में मुफ्त बिजली, महिलाओं को नकद सहायता और महिलाओं के लिए नि:शुल्क बस यात्रा शामिल हैं।
सिद्धरमैया ने बताया कि 2013 से 2018 के कार्यकाल में 165 में से 157 वादे पूरे किए गए थे। मौजूदा कार्यकाल में 593 में से 243 से अधिक वादे पूरे किए जा चुके हैं और बाकी वादे भी प्रतिबद्धता के साथ पूरे किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि कर्नाटक का जनादेश पांच साल की जिम्मेदारी है और कांग्रेस पार्टी अपने वादों को पूरा करने के लिए ईमानदारी से काम कर रही है।








