बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए (NDA) की बड़ी जीत के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने देश के रक्षा मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता राजनाथ सिंह से मुलाकात की है।
नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अभी भले ही समय है, लेकिन राजनीतिक गतिविधियां तेज हो चुकी हैं और रणनीति को लेकर बैठकों का दौर शुरू हो गया है। इसी क्रम में गुरुवार को उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की, जिसे भले ही शिष्टाचार भेंट बताया जा रहा हो, लेकिन इसके राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। वहीं लखनऊ में एक कार्यक्रम के दौरान केशव प्रसाद मौर्य को मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश कहे जाने के बाद सियासी चर्चाएं और तेज हो गई हैं, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इसे केवल भूल नहीं माना जा सकता, बल्कि इसके पीछे बीजेपी की सोची-समझी रणनीति भी हो सकती है। गौरतलब है कि केशव प्रसाद मौर्य बिहार चुनाव में एनडीए सरकार के गठन में भी अहम भूमिका निभा चुके हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरें
केशव प्रसाद मौर्य ने राजनाथ सिंह से मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा करते हुए लिखा कि उन्होंने वरिष्ठ नेता से मार्गदर्शन प्राप्त किया और उनके समय के लिए आभार व्यक्त किया। इसके बाद यह मुलाकात राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बन गई। खास बात यह रही कि हाल ही में लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान गलती से केशव प्रसाद मौर्य को “मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश” कहे जाने का मामला भी सामने आया, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं।
बिहार विधानसभा चुनाव में केशव प्रसाद मौर्य को एनडीए का सह-चुनाव प्रभारी बनाया गया था। चुनाव नतीजों में एनडीए की मजबूत वापसी के बाद उनके रणनीतिक कौशल की काफी चर्चा हो रही है। बीजेपी के भीतर उन्हें एक कुशल संगठनकर्ता और चुनावी रणनीतिकार के रूप में देखा जाता है। बिहार में बीजेपी के बेहतर प्रदर्शन के पीछे उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

लगातार बढ़ती जिम्मेदारियां बढ़ा रहीं कयास
केशव प्रसाद मौर्य को पिछले कुछ वर्षों में पार्टी और सरकार की ओर से लगातार बड़ी जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। अब जब बीजेपी को राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियां करनी हैं, तब उनके नाम को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। वह बीजेपी के ओबीसी वर्ग के सबसे बड़े नेताओं में गिने जाते हैं और उन्हें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का करीबी भी माना जाता है। ऐसे में पार्टी के संगठनात्मक संतुलन और सामाजिक समीकरणों में उनकी भूमिका को बेहद अहम माना जा रहा है।
उत्तर प्रदेश में पिछड़े वर्ग (OBC) की आबादी काफी बड़ी है। 2017 और 2019 के चुनावों में इस वर्ग का भारी समर्थन बीजेपी को मिला था। हालांकि हाल के वर्षों में समाजवादी पार्टी अपने PDA (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) फॉर्मूले के जरिए बीजेपी के कोर वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रही है। ऐसे में केशव प्रसाद मौर्य को बीजेपी का एक बड़ा ट्रंप कार्ड माना जा रहा है, जो ओबीसी वोटरों के बीच पार्टी की पकड़ मजबूत बनाए रखने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
2017 की जीत से जुड़ा रहा है मौर्य का नाम
गौरतलब है कि 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जब बीजेपी ने ऐतिहासिक बहुमत हासिल किया था, उस समय केशव प्रसाद मौर्य प्रदेश अध्यक्ष थे। उनकी अगुवाई में पार्टी ने बड़ी जीत दर्ज की थी, जिसके बाद वे उपमुख्यमंत्री बने। अब एक बार फिर उनका नाम यूपी की राजनीति के केंद्र में आ गया है।केशव प्रसाद मौर्य लगातार यह दावा करते रहे हैं कि बीजेपी 2027 में भी 2017 जैसी बड़ी जीत दोहराएगी। बिहार चुनाव में उनकी रणनीति की सफलता के बाद इस दावे को और मजबूती मिलती दिखाई दे रही है।











