अमेरिकी सांसदों ने उमर खालिद की रिहाई और निष्पक्ष सुनवाई की मांग पत्र में की। भाजपा ने राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं पर विदेशों में भारत विरोधी लॉबी का समर्थन करने का आरोप लगाते हुए राजनीतिक बहस तेज की।
New Delhi: दिल्ली दंगे 2020 के आरोप में जेल में बंद छात्र नेता उमर खालिद की रिहाई को लेकर अमेरिकी सांसदों ने भारतीय सरकार को पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने खालिद को ज़मानत देने और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने की मांग की है। इस पत्र में खालिद के मामले पर गंभीर चिंता जताई गई है, जिसे लेकर भारत में राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
भाजपा ने राहुल गांधी को निशाने पर लिया
मामले पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शुक्रवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और भारत विरोधी लॉबी पर तीखा हमला किया। भाजपा ने राहुल गांधी और अमेरिका की सांसद शाकोव्स्की के बीच 2024 में हुई मुलाकात का हवाला देते हुए इसे कांग्रेस नेता के भारत विरोधी रवैये का उदाहरण बताया।
प्रदीप भंडारी ने पोस्ट के जरिए साधा निशाना
भाजपा के प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने सोशल मीडिया पर राहुल गांधी की शाकोव्स्की और इल्हान उमर के साथ एक तस्वीर पोस्ट की। उन्होंने लिखा,

"राहुल गांधी - भारत विरोधी लॉबी कैसे काम करती है? 2024 में शाकोव्स्की अमेरिका में राहुल गांधी से मिलती हैं। साथ में भारत विरोधी इल्हान उमर भी होती हैं। जनवरी 2025 में शाकोव्स्की ‘अंतर्राष्ट्रीय इस्लामोफोबिया का मुकाबला करने वाला अधिनियम’ पेश करती हैं, जिसमें साफ तौर पर भारत का नाम लिया गया और मुस्लिम समुदायों पर कार्रवाई का आरोप लगाया गया। जनवरी 2026 में वही शाकोव्स्की भारत सरकार को पत्र लिखती हैं और उमर खालिद के मामले में ‘चिंता’ जताती हैं।"
भंडारी ने आगे लिखा कि "जब भी विदेश में भारत विरोधी कहानी फैलती है, बैकग्राउंड में बार-बार एक नाम आता है: राहुल गांधी। जो लोग भारत को कमजोर करना चाहते हैं और उसके आतंकवाद विरोधी कानूनों को कमजोर करना चाहते हैं, वे अनिवार्य रूप से उनके आसपास इकट्ठा हो जाते हैं।"
अमेरिका यात्रा और बिल के बीच संबंध
भंडारी ने अपने पोस्ट में दावा किया कि राहुल गांधी की 2024 की अमेरिका यात्रा, शाकोव्स्की और उमर खालिद से मुलाकात, और जनवरी 2025 में पेश किए गए बिल के बीच सीधा संबंध है। यह बिल अंतर्राष्ट्रीय इस्लामोफोबिया से मुकाबला करने वाला अधिनियम था। इस अधिनियम में यह प्रस्ताव रखा गया था कि अमेरिका में एक ऑफिस बनाया जाए जो इस्लामोफोबिया और उससे जुड़ी समस्याओं की निगरानी करे।
बिल में क्या था?
इस बिल में यह भी शामिल था कि अमेरिकी कांग्रेस को दी जाने वाली मौजूदा सालाना रिपोर्टों में दूसरे देशों में मानवाधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति के बारे में जानकारी दी जाए। खासकर उन मीडिया रिपोर्टों पर ध्यान दिया जाए जो इस्लामोफोबिया और मुस्लिम विरोधी प्रोपेगेंडा से जुड़ी हों। इसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर धार्मिक स्वतंत्रता और समानता की निगरानी करना बताया गया।
शाकोव्स्की की भारत सरकार से मांग
अमेरिकी सांसद शाकोव्स्की ने 30 दिसंबर को लिखे पत्र में भारत सरकार से खालिद को ज़मानत देने का आग्रह किया। उन्होंने भारत से अनुरोध किया कि खालिद की सुनवाई निष्पक्ष और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार हो। इस पत्र के बाद भारतीय राजनीति में इस मामले को लेकर गर्म बहस छिड़ गई।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
भाजपा ने इस पत्र को भारत विरोधी गतिविधि और विपक्षी दलों की रणनीति के रूप में देखा। पार्टी का कहना है कि राहुल गांधी और कांग्रेस नेता वैश्विक मंच पर भारत की छवि कमजोर करने के प्रयास कर रहे हैं। प्रदीप भंडारी के अनुसार, यह मुद्दा दिखाता है कि विदेशों में भारत विरोधी लॉबी किस तरह काम करती है और इसमें विपक्षी नेता की भूमिका रहती है।
खालिद मामले पर भारत की संवेदनशीलता
उमर खालिद का मामला देश में संवेदनशील विषय माना जाता है। दिल्ली दंगे 2020 के आरोपों में शामिल खालिद पर भारत के आतंकवाद विरोधी कानून UAPA के तहत केस चल रहा है। ऐसे मामलों में भारत सरकार की चिंता यह रहती है कि किसी भी विदेशी हस्तक्षेप से देश की न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।










