बिहार में नियुक्ति कार्यक्रम के दौरान डॉक्टर नुसरत परवीन का हिजाब हटाने का मामला राजनीतिक विवाद बन गया। विपक्ष और मुस्लिम संगठनों ने नीतीश कुमार पर सवाल उठाए, जबकि मामला महाराष्ट्र अल्पसंख्यक आयोग तक पहुंच गया।
Patna: बिहार में नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम के दौरान एक मुस्लिम महिला डॉक्टर का हिजाब हटाए जाने का मामला अब बड़ा राजनीतिक और सामाजिक विवाद बन चुका है। आयुष विभाग की डॉक्टर नुसरत परवीन के साथ हुए इस घटनाक्रम को लेकर मुस्लिम संगठनों और विपक्षी दलों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर कड़ी नाराजगी जताई है। मामला अब बिहार की सीमाओं से बाहर निकलकर महाराष्ट्र अल्पसंख्यक आयोग तक पहुंच गया है, जहां मुख्यमंत्री के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई है।
नियुक्ति कार्यक्रम के दौरान क्या हुआ
यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब बिहार में सरकारी नियुक्ति पत्र वितरण का कार्यक्रम चल रहा था। इसी कार्यक्रम के दौरान आयुष डॉक्टर नुसरत परवीन का हिजाब हटवाया गया। इस घटना का वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। मुस्लिम समुदाय ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता और महिला सम्मान से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया। धीरे धीरे यह मामला राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया।
विपक्ष ने नीतीश कुमार पर साधा निशाना
इस घटना के बाद विपक्षी दलों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर सीधा हमला बोला। समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने इस पूरे घटनाक्रम को अपमानजनक करार दिया। उन्होंने कहा कि एक महिला डॉक्टर के साथ इस तरह का व्यवहार न सिर्फ गलत है बल्कि संविधान में दिए गए धार्मिक अधिकारों का भी उल्लंघन है। इकरा हसन ने मुख्यमंत्री से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की और कहा कि सरकार को इस मामले में संवेदनशीलता दिखानी चाहिए।
AIMIM का तीखा बयान

ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने भी इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाया है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने हिजाब और बुर्के को मुस्लिम महिलाओं के सम्मान और गरिमा का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि हिजाब और बुर्का महिलाओं के सिर का ताज हैं और इसे जबरन हटवाना किसी भी तरह से स्वीकार्य नहीं है। वारिस पठान ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से बिना शर्त माफी मांगने की मांग की और कहा कि इस तरह की घटनाएं समाज में गलत संदेश देती हैं।
महाराष्ट्र अल्पसंख्यक आयोग तक पहुंचा मामला
हिजाब विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। मुस्लिम समाज की ओर से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ महाराष्ट्र अल्पसंख्यक आयोग में शिकायत दर्ज कराई गई है। आयोग के अध्यक्ष प्यारे खान ने इस मामले को गंभीर बताया है। उन्होंने कहा कि वह इस संबंध में केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्री को पत्र लिखेंगे ताकि भविष्य में किसी भी राज्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो।
आयोग अध्यक्ष प्यारे खान की प्रतिक्रिया
महाराष्ट्र अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष प्यारे खान ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की आलोचना करते हुए कहा कि जो भी हुआ वह बिल्कुल गलत था। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह किसी भी सरकार या लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है। प्यारे खान ने यह भी कहा कि यह भारतीय जनता पार्टी की न तो विचारधारा है और न ही संस्कृति। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नारे सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबके लिए प्रयास का जिक्र करते हुए कहा कि इस घटना का उन मूल्यों से कोई मेल नहीं है।
धार्मिक भावना से जुड़ा मामला
प्यारे खान ने कहा कि यह मामला सिर्फ एक प्रशासनिक गलती नहीं बल्कि धार्मिक भावना से जुड़ा हुआ है। उन्होंने इसे एक बेटी के साथ किया गया अभद्र व्यवहार बताया। आयोग अध्यक्ष के अनुसार मुस्लिम समाज में इस घटना को लेकर काफी रोष है और लगातार शिकायतें आ रही हैं। हालांकि यह मामला बिहार का होने के कारण महाराष्ट्र अल्पसंख्यक आयोग सीधे तौर पर कोई कार्रवाई नहीं कर सकता, लेकिन वह अपनी रिपोर्ट और सिफारिशें केंद्र सरकार तक जरूर पहुंचाएगा।











