बाड़मेर के रेगिस्तान में छिपी एमडी ड्रग बनाने की प्रयोगशाला पुलिस के लिए बड़ी सफलता है। आरोपी गिरफ्तार कर पूरे नेटवर्क की जांच जारी है। मामला दर्शाता है कि ड्रग माफिया नए तरीके अपनाकर कानून को चुनौती दे रहे हैं।
Barmer: यह पूरा मामला बाड़मेर जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर सदर थाना क्षेत्र के केरली गांव का है। यहां रेतीले धोरों के बीच एक ढाणी को ड्रग बनाने का गुप्त अड्डा बनाया गया था। पुलिस जांच में सामने आया कि पिछले कई दिनों से इस ढाणी में अवैध रूप से एमडी ड्रग तैयार की जा रही थी।
मुखबिर से सूचना मिलने के बाद पुलिस ने पूरी योजना के साथ कार्रवाई की। एसपी नरेंद्र सिंह मीणा के निर्देशन में डीएसपी शर्मा और सदर थाना पुलिस की टीम ने मौके पर छापेमारी की। जब पुलिस ढाणी में पहुंची तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। ढाणी की छत पर केमिकल्स को मिलाकर ड्रग को सुखाया जा रहा था।
छापे के दौरान पुलिस ने एमडी ड्रग बनाने में इस्तेमाल होने वाले कई तरह के केमिकल्स, तैयार ड्रग और अन्य उपकरण जब्त किए। पूरे परिसर को सील कर सघन तलाशी अभियान चलाया गया।
मुंबई से जुड़े ड्रग माफिया के तार
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस अवैध धंधे का मास्टरमाइंड केरली गांव का निवासी मोटाराम है। मोटाराम मुंबई में लकड़ी का काम करता है। वहीं उसकी पहचान ड्रग माफिया से हुई और धीरे‑धीरे वह इस गैरकानूनी कारोबार में शामिल हो गया।
पुलिस के अनुसार, मोटाराम ने अपने चचेरे भाई को लालच देकर इस धंधे में उतार लिया। चचेरे भाई के लकड़ी के कारखाने से सटी ढाणी में पिछले तीन‑चार दिनों से ड्रग बनाने का काम चल रहा था। मुंबई से जुड़े नेटवर्क के जरिए केमिकल्स मंगवाए जाते थे और यहां उन्हें मिलाकर एमडी ड्रग तैयार की जाती थी।
पुलिस को आशंका है कि तैयार ड्रग को राजस्थान के अलावा अन्य राज्यों में सप्लाई करने की योजना थी। इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां अब पुलिस और एनसीबी मिलकर खंगाल रही हैं।
शोर छिपाने के लिए अपनाया गया नया तरीका
इस अवैध कारोबार को बेहद चालाकी से अंजाम दिया जा रहा था। आरोपियों ने जानबूझकर कोई बड़ी मशीन नहीं लगाई, ताकि ज्यादा शोर न हो और किसी को शक न हो। केमिकल्स को हाथ से मिलाया जाता था और ढाणी की छत पर सुखाया जाता था।
लकड़ी के कारखाने की मशीनें चलाकर केमिकल मिक्सिंग की आवाज को दबा दिया जाता था, जिससे आसपास के लोगों को किसी तरह का अंदेशा न हो। पुलिस का मानना है कि यह तरीका इसलिए अपनाया गया ताकि फैक्ट्री जैसी कोई स्थायी संरचना नजर न आए और कानून की नजर से बचा जा सके।
ड्रग माफिया की बदली रणनीति
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बाड़मेर जिले में इससे पहले भी रामसर और सेड़वा थाना क्षेत्र में अवैध एमडी ड्रग फैक्टरियों का खुलासा हो चुका है। अब ड्रग माफिया अपनी रणनीति बदल रहे हैं। वे पूरी फैक्ट्री लगाने के बजाय रेगिस्तानी इलाकों में केमिकल मिक्सिंग और ड्रग सुखाने का काम कर रहे हैं।
फिलहाल पुलिस ने ढाणी मालिक को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। मामले से जुड़े अन्य आरोपियों और सप्लाई चैन की जानकारी जुटाई जा रही है। एनसीबी की टीम भी जांच में सहयोग कर रही है।












