मार्क-48 टारपीडो: अमेरिका का घातक हथियार जिसने ईरानी युद्धपोत को डुबाया

मार्क-48 टारपीडो: अमेरिका का घातक हथियार जिसने ईरानी युद्धपोत को डुबाया

United States और Iran के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे यह संकट केवल मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहकर एशिया क्षेत्र तक भी फैल गया है।

World News: हिंद महासागर में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी नौसेना ने ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस डेना (IRIS Dena) को निशाना बनाया और इसे डुबो दिया। इस हमले में अमेरिकी नौसैनिकों ने मार्क-48 टारपीडो का इस्तेमाल किया, जो आधुनिक और घातक तकनीक से लैस माना जाता है। ईरान ने इस हमले में अपने 87 नाविकों के मारे जाने की पुष्टि की है और इसे अमेरिकी "क्रूरता" बताया है।

आईआरआईएस डेना: ईरान का शक्तिशाली युद्धपोत

आईआरआईएस डेना ईरान के सबसे आधुनिक युद्धपोतों में से एक था। यह गहरे पानी में गश्त करने में सक्षम था और भारी हथियारों से लैस था। इसमें शामिल हैं:

  • सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें
  • जहाज-रोधी मिसाइलें
  • तोप और टारपीडो
  • हेलीकॉप्टर संचालन क्षमता

इस युद्धपोत की विशेषताओं और क्षमता के कारण इसे निशाना बनाना अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण था।

मार्क-48 टारपीडो: कैसे काम करता है

मार्क-48 टारपीडो अमेरिकी नौसेना का सबसे खतरनाक हथियारों में से एक है। इसे रेडियो मार्गदर्शन के माध्यम से मैन्युअल रूप से या ध्वनिक होमिंग (acoustic homing) तकनीक द्वारा अपने लक्ष्य तक पहुँचाया जाता है। मुख्य विशेषताएँ:

  • वजन: लगभग 1,700 किलोग्राम
  • गति: लगभग 100 किमी प्रति घंटे
  • मार्गदर्शन प्रणाली: आधुनिक MK-48 ADCAP तकनीक, एक्टिव और पैसिव सोनार
  • प्रभाव: सीधे जहाज की नींव पर निशाना लगाता है, जिससे जहाज को पूरी तरह नष्ट किया जा सकता है

मार्क-48 टारपीडो की तकनीक इसे आधुनिक युद्ध की सबसे खतरनाक समुद्री हथियारों में शामिल करती है। यह किसी भी बड़े युद्धपोत को लगभग बिना चेतावनी के नष्ट करने में सक्षम है।

हमले का तरीका

अमेरिका ने आईआरआईएस डेना को मारने के लिए इसे घातक रूप से निशाना बनाया। टारपीडो अपने लक्ष्य की सोनार प्रतिक्रिया और रेडियो कमांड के माध्यम से मार्गदर्शन के जरिए सीधे जहाज की नींव पर हमला करता है। इस हमले में अमेरिकी पनडुब्बी ने सिर्फ एक ही मार्क-48 टारपीडो का इस्तेमाल किया, जिससे युद्धपोत पूरी तरह डूब गया।

मार्क-48 टारपीडो द्वारा किए गए इस हमले ने अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को और बढ़ा दिया है। ईरान ने इसे समुद्र में अमेरिकी "क्रूरता" बताया है। अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम हिंद महासागर में अमेरिकी समुद्री प्रभुत्व और ईरानी नौसैनिक क्षमता को नियंत्रित करने की रणनीति का हिस्सा है।

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