महेंद्र सिंह धोनी को बड़ी राहत, BCCI एथिक्स ऑफिसर ने हितों के टकराव के आरोप किए खारिज

महेंद्र सिंह धोनी को बड़ी राहत, BCCI एथिक्स ऑफिसर ने हितों के टकराव के आरोप किए खारिज

Board of Control for Cricket in India (बीसीसीआई) के एथिक्स ऑफिसर न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) Arun Mishra ने पूर्व भारतीय कप्तान MS Dhoni के खिलाफ हितों के टकराव के कथित उल्लंघन को लेकर दायर शिकायत को खारिज कर दिया है।

स्पोर्ट्स न्यूज़: इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 से पहले भारतीय क्रिकेट के दिग्गज खिलाड़ी महेंद्र सिंह धोनी को बड़ी राहत मिली है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के एथिक्स ऑफिसर और पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा ने धोनी के खिलाफ दायर हितों के टकराव (Conflict of Interest) से जुड़ी शिकायत को खारिज कर दिया है। जांच के बाद यह निष्कर्ष निकाला गया कि धोनी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त और ठोस सबूत मौजूद नहीं हैं।

यह शिकायत इस आधार पर दायर की गई थी कि धोनी एक सक्रिय आईपीएल खिलाड़ी होने के साथ-साथ क्रिकेट अकादमियों से जुड़े हुए हैं, जिससे कथित तौर पर BCCI के हितों के टकराव से जुड़े नियमों का उल्लंघन हो सकता है। हालांकि एथिक्स ऑफिसर ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर ऐसा कोई मामला स्थापित नहीं होता।

2017 के समझौते को माना गया महत्वपूर्ण

फैसले में यह भी कहा गया कि धोनी को मेसर्स आरका स्पोर्ट्स एंड मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड द्वारा संचालित क्रिकेट अकादमियों से जुड़ा माना जा सकता है। लेकिन यह समझौता वर्ष 2017 में किया गया था, जबकि BCCI के हितों के टकराव से संबंधित नियम सितंबर 2018 में लागू हुए थे। इस आधार पर एथिक्स ऑफिसर ने कहा कि उस समय लागू नियमों के तहत धोनी के खिलाफ किसी प्रकार का उल्लंघन साबित नहीं होता। 

आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया कि जब यह समझौता हुआ था, उस समय धोनी भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व कर रहे थे और उनके खिलाफ किसी प्रकार का संस्थागत हितों का टकराव स्थापित नहीं किया जा सकता।

ठोस सबूतों का अभाव

न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा ने अपने फैसले में कहा कि शिकायतकर्ता ऐसे कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर पाए, जिनसे यह साबित हो सके कि धोनी की आईपीएल में खिलाड़ी के रूप में भागीदारी ने उन्हें किसी प्रशासनिक नियंत्रण या निर्णय लेने की स्थिति में रखा हो। फैसले में यह भी कहा गया कि क्रिकेट अकादमी से जुड़े होने के बावजूद धोनी द्वारा किसी प्रकार का पक्षपात, भेदभाव या तरजीही व्यवहार किए जाने का कोई उदाहरण सामने नहीं आया है।

एथिक्स ऑफिसर के अनुसार, केवल एक खिलाड़ी के रूप में आईपीएल में खेलना, बिना किसी प्रशासनिक भूमिका के, BCCI के नियमों के अनुसार हितों के टकराव की श्रेणी में नहीं आता।

शिकायत में लगाए गए थे कई आरोप

फरवरी 2024 में दायर इस शिकायत में आरोप लगाया गया था कि धोनी एक “वर्तमान खिलाड़ी” होने के साथ-साथ क्रिकेट अकादमी के मालिक भी हैं। शिकायतकर्ता का दावा था कि यह स्थिति BCCI के नियम 38(4)(क) और 38(4)(घ) का उल्लंघन करती है। इसके अलावा शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया था कि 2018 में नियमों में संशोधन के बाद धोनी ने नियम 38(2) और 38(5) के तहत आवश्यक खुलासा (Disclosure) नहीं किया।

हालांकि जांच के दौरान एथिक्स ऑफिसर ने पाया कि शिकायत में किए गए कई अतिरिक्त आरोप व्यक्तिगत विवाद से जुड़े हुए थे और वे BCCI के हितों के टकराव संबंधी नियमों के दायरे में नहीं आते। फैसले में यह भी कहा गया कि शिकायतकर्ता और धोनी के बीच एक व्यावसायिक विवाद की पृष्ठभूमि भी रही है। इसके अलावा शिकायतकर्ता ने एक तीसरे पक्ष से जुड़े विवाद में भी पक्ष लिया था, जो कि इस मंच पर विचार करने योग्य नहीं था।

आदेश में कहा गया कि यह मामला मूल रूप से एक व्यावसायिक विवाद से प्रभावित प्रतीत होता है और इसे आईपीएल में धोनी की भागीदारी से जोड़कर हितों के टकराव के रूप में प्रस्तुत किया गया।

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