मिडिल ईस्ट संकट के बीच यूएई का बड़ा खुलासा, पीएम मोदी ने राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद को किया था फोन

मिडिल ईस्ट संकट के बीच यूएई का बड़ा खुलासा, पीएम मोदी ने राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद को किया था फोन

ईरान-अमेरिका-इजरायल तनाव के बीच यूएई ने स्पष्ट किया कि वह इस संघर्ष में शामिल नहीं होना चाहता। यूएई के पूर्व राजदूत ने बताया कि संकट की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद से फोन पर बातचीत की थी।

World News: मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की भूमिका को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। इस बीच भारत में यूएई के पहले राजदूत हुसैन हसन मिर्ज़ा ने एक अहम खुलासा किया है।

उन्होंने बताया कि मौजूदा संकट की शुरुआत में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीधे यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान को फोन किया था। इस बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने क्षेत्र की स्थिति और वहां रहने वाले लोगों की सुरक्षा पर चर्चा की।

राजदूत के अनुसार यूएई के राष्ट्रपति ने भरोसा दिलाया कि वह इस पूरे मामले को व्यक्तिगत रूप से देख रहे हैं और देश में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।

यूएई युद्ध में शामिल नहीं होना चाहता

राजदूत हुसैन हसन मिर्ज़ा ने एक इंटरव्यू में स्पष्ट कहा कि संयुक्त अरब अमीरात इस संघर्ष का हिस्सा नहीं बनना चाहता। उनका कहना था कि यूएई के पास इस युद्ध में शामिल होने का कोई कारण नहीं है।

उन्होंने बताया कि यूएई की प्राथमिकता क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखना है। मिडिल ईस्ट पहले से ही कई राजनीतिक और सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है, ऐसे में किसी नए सैन्य टकराव से हालात और जटिल हो सकते हैं।

पीएम मोदी की पहल को बताया अहम

यूएई के राजदूत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका को भी काफी अहम बताया। उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों के नेताओं के बीच पीएम मोदी का सम्मान बहुत ज्यादा है। मिर्ज़ा के अनुसार यह सम्मान केवल राजनीतिक स्तर तक सीमित नहीं है बल्कि आम जनता और कारोबारी समुदाय में भी दिखाई देता है। यही वजह है कि भारत की बात को गंभीरता से सुना जाता है।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की विश्वसनीयता केवल खाड़ी देशों तक सीमित नहीं है बल्कि अमेरिका, ईरान और इजरायल जैसे देशों में भी उनकी बात को महत्व दिया जाता है।

एक फोन कॉल से तनाव कम होने की उम्मीद

राजदूत मिर्ज़ा ने कहा कि मौजूदा संकट के दौरान प्रधानमंत्री मोदी द्वारा ईरान और इजरायल के नेताओं से की गई बातचीत भी महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने यहां तक कहा कि यदि सही समय पर संवाद हो तो एक फोन कॉल भी तनाव कम करने में भूमिका निभा सकता है। मिर्ज़ा के अनुसार यह भरोसा प्रधानमंत्री मोदी की उस छवि से आता है जिसमें उन्हें एक मजबूत और स्पष्ट नेतृत्व के रूप में देखा जाता है।

यूएई की भू-राजनीतिक स्थिति

संयुक्त अरब अमीरात की स्थिति मिडिल ईस्ट की राजनीति में काफी संवेदनशील मानी जाती है। एक तरफ यूएई ईरान का पड़ोसी देश है तो दूसरी तरफ वह इजरायल के साथ अब्राहम समझौते के तहत साझेदारी भी रखता है।

इसी वजह से यूएई दोनों पक्षों के साथ संवाद बनाए रखने की स्थिति में है। मिर्ज़ा ने कहा कि यही कारण है कि यूएई इस पूरे मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि यूएई दोनों पक्षों के बीच बातचीत कराने की क्षमता रखता है और वह क्षेत्र में शांति बनाए रखने की दिशा में काम करना चाहता है।

यूएई की धरती पर हो रहे हमले

मौजूदा संघर्ष के दौरान यूएई को भी कुछ हमलों का सामना करना पड़ा है। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते टकराव का असर खाड़ी क्षेत्र पर भी पड़ा है। हालांकि राजदूत मिर्ज़ा ने कहा कि अभी तक यूएई में बड़े नुकसान की खबरें सामने नहीं आई हैं। उन्होंने बताया कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार अब तक केवल मामूली नुकसान हुआ है।

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