ईरान, अमेरिका और इजरायल के बढ़ते सैन्य तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज प्रभावित होने से कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर पार पहुंचीं, जिससे एशिया के कई देशों में ईंधन आपूर्ति और कीमतों पर दबाव बढ़ गया।
Global Energy Crisis: ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को गहरा झटका दिया है। इस संघर्ष के कारण दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर गंभीर असर पड़ा है। यह वही समुद्री रास्ता है जिसके माध्यम से दुनिया की बड़ी मात्रा में तेल और गैस की सप्लाई होती है।
जब इस मार्ग पर बाधा उत्पन्न हुई तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ने लगीं। कुछ समय पहले तक जहां क्रूड ऑयल लगभग 60 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था, वहीं अब इसकी कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संकट लंबे समय तक जारी रहा तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका बड़ा प्रभाव पड़ सकता है।
इस स्थिति का असर विशेष रूप से एशियाई देशों पर दिखाई दे रहा है। एशिया के कई देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयातित तेल और गैस पर काफी निर्भर हैं। इसलिए जैसे ही सप्लाई प्रभावित हुई, इन देशों में ईंधन की कमी और कीमतों में बढ़ोतरी का खतरा बढ़ गया।
एशिया के 9 देश ऊर्जा संकट से प्रभावित

इस वैश्विक संकट का असर एशिया के कम से कम नौ देशों पर साफ दिखाई दे रहा है। इनमें बांग्लादेश, पाकिस्तान, भारत, थाईलैंड, चीन, वियतनाम, दक्षिण कोरिया, इंडोनेशिया और जापान शामिल हैं। इन देशों की सरकारें स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अलग-अलग रणनीतियां अपना रही हैं।
कुछ देशों ने ईंधन की खपत कम करने के लिए सख्त नियम लागू किए हैं, जबकि कुछ देश ऊर्जा का भंडारण बढ़ा रहे हैं। कई सरकारें वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की तलाश में भी जुटी हुई हैं। इन सभी उपायों का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा की बचत करना और घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखना है।
बांग्लादेश में यूनिवर्सिटी बंद और ईंधन बिक्री पर सीमा
ऊर्जा संकट से निपटने के लिए बांग्लादेश सरकार ने कई बड़े कदम उठाए हैं। देश में बिजली और ईंधन की खपत कम करने के उद्देश्य से सभी यूनिवर्सिटी को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। इसके अलावा ईद की छुट्टियों को भी समय से पहले शुरू कर दिया गया है ताकि ऊर्जा की बचत हो सके।

सरकार ने पेट्रोल और डीजल की दैनिक बिक्री पर भी सीमा तय कर दी है। इसका उद्देश्य जमाखोरी को रोकना और ईंधन की उपलब्धता बनाए रखना है। दरअसल, संकट की खबर फैलते ही कई जगहों पर लोगों ने ईंधन जमा करना शुरू कर दिया था जिससे स्थिति और गंभीर होने का खतरा पैदा हो गया था।
गैस की कमी का असर देश के उद्योगों पर भी पड़ने लगा है। कई फर्टिलाइजर फैक्टरियां गैस की कमी के कारण बंद हो गई हैं। सरकार लगातार स्थिति की निगरानी कर रही है और जरूरत पड़ने पर और सख्त कदम उठाने की तैयारी में है।
पाकिस्तान में खर्च कम करने का बड़ा प्लान
पाकिस्तान ने ऊर्जा संकट से निपटने के लिए सरकारी खर्च कम करने की योजना बनाई है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कई सख्त फैसले घोषित किए हैं ताकि ईंधन की खपत कम की जा सके और अर्थव्यवस्था पर दबाव कम हो।
सरकार ने मंत्रियों और सलाहकारों की विदेश यात्राओं पर पूरी तरह रोक लगा दी है। इसके अलावा कैबिनेट के सदस्य दो महीने तक अपनी सैलरी नहीं लेंगे। सांसदों की सैलरी में भी 25 प्रतिशत कटौती करने का फैसला किया गया है।
सरकारी कार्यालय अब सप्ताह में केवल चार दिन खुलेंगे। कर्मचारियों का एक हिस्सा घर से काम करेगा ताकि यात्रा में होने वाली ईंधन खपत कम हो सके। स्कूलों को दो सप्ताह के लिए बंद रखने का निर्णय भी लिया गया है।
इसके अलावा सरकारी वाहनों के उपयोग में भी भारी कटौती की गई है। सरकारी विभागों को आदेश दिया गया है कि वे अपने खर्च में कम से कम 20 प्रतिशत कमी लाएं। पाकिस्तान सरकार का कहना है कि वैश्विक तेल कीमतों में तेज बढ़ोतरी ने देश की आर्थिक स्थिति पर गंभीर दबाव डाल दिया है।
थाईलैंड में ऊर्जा बचत के अनोखे उपाय
थाईलैंड सरकार ने ऊर्जा बचाने के लिए कई अनोखे निर्देश जारी किए हैं। सरकारी दफ्तरों में कर्मचारियों को लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का उपयोग करने के लिए कहा गया है ताकि बिजली की खपत कम हो सके। सरकारी कर्मचारियों को अधिकतर मामलों में वर्क फ्रॉम होम करने की सलाह दी गई है। हालांकि जनता से सीधे जुड़े अधिकारियों को इस नियम से छूट दी गई है। विदेश यात्राओं पर भी अस्थायी रोक लगा दी गई है।

एयर कंडीशनर के तापमान को 26 से 27 डिग्री सेल्सियस के बीच रखने का निर्देश दिया गया है ताकि बिजली की बचत हो सके। कर्मचारियों को औपचारिक सूट और टाई के बजाय हल्के कपड़े पहनने की सलाह दी गई है।
ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार थाईलैंड के पास फिलहाल लगभग 95 दिनों का ऊर्जा भंडार मौजूद है। सरकार अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका से अतिरिक्त LNG खरीदने की कोशिश कर रही है। यदि संकट बढ़ता है तो दुकानों के विज्ञापन बोर्ड की लाइट कम करने और पेट्रोल पंप रात 10 बजे बंद करने जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं।
चीन ने बढ़ाया क्रूड ऑयल का भंडार
चीन ने संभावित ऊर्जा संकट से बचने के लिए पहले से ही तैयारी शुरू कर दी है। सरकार ने क्रूड ऑयल की खरीद बढ़ाकर उसे अपने स्ट्रैटेजिक रिजर्व में जमा करना शुरू कर दिया है। देश की रिफाइनरियों को निर्देश दिया गया है कि वे नए ईंधन निर्यात समझौते न करें। कुछ पुराने निर्यात शिपमेंट भी रद्द किए गए हैं ताकि घरेलू बाजार में पर्याप्त ईंधन उपलब्ध रहे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मिडिल ईस्ट का संकट लंबे समय तक जारी रहता है तो चीन अपने स्ट्रैटेजिक ऑयल रिजर्व का उपयोग कर सकता है। इससे घरेलू बाजार में कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
जापान ने तेल भंडार इस्तेमाल की तैयारी की
जापान ने अपने नेशनल ऑयल रिजर्व को तैयार रहने के निर्देश दिए हैं। सरकार ने देश के ऑयल स्टोरेज सेंटर्स से कहा है कि जरूरत पड़ने पर तुरंत क्रूड ऑयल जारी करने की व्यवस्था रखें।
जापान ऑर्गनाइजेशन फॉर मेटल्स एंड एनर्जी सिक्योरिटी के अधिकारियों के अनुसार यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि यदि वैश्विक सप्लाई बाधित हो जाए तो घरेलू बाजार में ईंधन की कमी न हो। जापान लंबे समय से ऊर्जा सुरक्षा पर ध्यान देता रहा है और उसके पास बड़े स्तर पर तेल भंडारण की क्षमता मौजूद है। यह रणनीति देश को अचानक उत्पन्न होने वाले संकट से बचाने में मदद करती है।
भारत में LPG संकट के संकेत
भारत में भी ऊर्जा संकट के संकेत दिखाई देने लगे हैं। कई राज्यों में कमर्शियल LPG गैस सिलेंडर की सप्लाई प्रभावित हुई है। दिल्ली, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में कई जगहों पर कमर्शियल गैस की आपूर्ति रोक दी गई है।

इसका असर सबसे ज्यादा रेस्टोरेंट और होटल व्यवसाय पर पड़ रहा है। कई छोटे व्यवसायों को संचालन में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। सरकार ने ऑयल रिफाइनरी कंपनियों को घरेलू उपयोग के लिए LPG उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं ताकि स्थिति को नियंत्रित किया जा सके।
दक्षिण कोरिया में ईंधन कीमत पर कैप लगाने की तैयारी
दक्षिण कोरिया भी वैश्विक ऊर्जा संकट से प्रभावित हुआ है। सरकार घरेलू बाजार में ईंधन कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कई विकल्पों पर विचार कर रही है। लगभग तीन दशक बाद पहली बार सरकार पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर कैप लगाने की योजना बना रही है। राष्ट्रपति ली जे-म्युंग का कहना है कि यह कदम आम लोगों को राहत देने के लिए उठाया जा रहा है। सरकार वैकल्पिक ऊर्जा सप्लाई के रास्ते भी तलाश रही है। ऐसे स्रोतों की खोज की जा रही है जो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर निर्भर न हों।
इंडोनेशिया में बायोडीजल पर जोर
इंडोनेशिया ने ऊर्जा संकट से निपटने के लिए ईंधन सब्सिडी बढ़ाने का फैसला किया है। सरकार चाहती है कि तेल की बढ़ती कीमतों का असर आम लोगों पर कम पड़े।
इसके अलावा सरकार B50 बायोडीजल प्रोग्राम पर भी विचार कर रही है। इस योजना के तहत डीजल में 50 प्रतिशत पाम ऑयल आधारित बायोडीजल मिलाया जाएगा। इससे आयातित तेल पर निर्भरता कम होगी और देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हो सकती है।
वियतनाम में वर्क फ्रॉम होम की अपील
वियतनाम सरकार ने कंपनियों से कर्मचारियों को घर से काम करने की सुविधा देने की अपील की है। इसका उद्देश्य यात्रा में होने वाली ईंधन खपत को कम करना है। इंडस्ट्री एंड ट्रेड मंत्रालय का कहना है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ रही है। इसलिए सरकार ईंधन सप्लाई बनाए रखने और खपत कम करने दोनों पर ध्यान दे रही है।










