मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव की तैयारी, विपक्ष ने लगाए गंभीर आरोप

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव की तैयारी, विपक्ष ने लगाए गंभीर आरोप

Gyanesh Kumar के खिलाफ विपक्ष महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, विपक्ष एक-दो दिनों के भीतर उनके खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव पेश कर सकता है।

नई दिल्ली: भारत की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है, जहां विपक्षी दल देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक के सांसद इस प्रस्ताव को संसद में पेश करने के लिए समर्थन जुटा रहे हैं और अब तक लगभग 180 सांसद इस नोटिस पर हस्ताक्षर कर चुके हैं।

बताया जा रहा है कि लोकसभा के करीब 120 और राज्यसभा के लगभग 60 सांसदों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है। संभावना है कि यह प्रस्ताव 12 या 13 मार्च को संसद में प्रस्तुत किया जा सकता है। यदि यह प्रस्ताव औपचारिक रूप से पेश किया जाता है, तो यह भारत के इतिहास में पहली बार होगा जब किसी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

विपक्ष के आरोप

विपक्षी दलों का आरोप है कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। इसी मुद्दे को आधार बनाकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने सबसे पहले मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई थी, जिसे बाद में अन्य विपक्षी दलों ने भी समर्थन दिया।

महाभियोग प्रस्ताव के ड्राफ्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इनमें प्रमुख रूप से मतदाताओं को उनके मतदान अधिकार से वंचित करने का आरोप शामिल है। विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची के संशोधन की प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के नाम हटाए गए, जिससे कई नागरिक मतदान के अधिकार से वंचित हो सकते हैं।

इसके अलावा विपक्ष ने आरोप लगाया है कि जब तृणमूल कांग्रेस के नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग से मिलने गया था, तब उनके साथ कथित रूप से दुर्व्यवहार किया गया। विपक्ष का यह भी दावा है कि संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग किया जा रहा है और चुनावी प्रक्रिया में निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

संविधान में क्या है प्रावधान

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की प्रक्रिया तय की गई है। यह प्रक्रिया लगभग वही है जो सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों को हटाने के लिए अपनाई जाती है। इस प्रक्रिया के तहत संसद के किसी भी सदन में प्रस्ताव लाया जाता है। प्रस्ताव पारित होने के लिए दोनों सदनों में विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है। यदि दोनों सदन इस प्रस्ताव को पारित कर देते हैं, तो उसके बाद राष्ट्रपति द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाया जा सकता है।

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