नेचर विद हेरिटेज: यूपी सरकार बदल रही है पर्यटन की तस्वीर, जंगल सफारी से रोजगार को मिलेगी मजबूती

नेचर विद हेरिटेज: यूपी सरकार बदल रही है पर्यटन की तस्वीर, जंगल सफारी से रोजगार को मिलेगी मजबूती

उत्तर प्रदेश, जो राम मंदिर, काशी विश्वनाथ और ताज महल जैसी विश्वप्रसिद्ध धार्मिक स्थलों के लिए जाना जाता है, अब पर्यटन के नए आयामों की ओर बढ़ रहा है। राज्य सरकार की नई पहल में ईको-टूरिज्म (Eco-Tourism) को बढ़ावा दिया जा रहा है। 

लखनऊ: राम मंदिर, काशी विश्वनाथ और ताज महल जैसी विश्वविख्यात धरोहरों के लिए पहचाने जाने वाला उत्तर प्रदेश अब अपनी पहचान को एक नया रूप देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। योगी सरकार राज्य में पर्यटन को नया आयाम देने की तैयारी में है, जिसका मुख्य फोकस अब ‘ईको-टूरिज्म’ पर रहेगा। इसका उद्देश्य केवल ऐतिहासिक धरोहरों तक सीमित न रहकर पर्यटकों को प्रकृति के करीब लाना भी है। इस पहल के जरिए उत्तर प्रदेश न केवल सांस्कृतिक और धार्मिक पर्यटन का केंद्र बनेगा, बल्कि प्राकृतिक पर्यटन के क्षेत्र में भी नई संभावनाएं खोलेगा।

प्रकृति और इतिहास का संगम

यूपी सरकार की नई रणनीति के तहत, राज्य के प्राकृतिक स्थलों और ऐतिहासिक इमारतों को एक टूरिज्म सर्किट के रूप में विकसित किया जा रहा है। अब पर्यटक सिर्फ पुराने किले या मंदिर नहीं देखेंगे, बल्कि जंगल, झील, वन्यजीव और झरनों का भी आनंद ले सकेंगे। इस पहल के प्रमुख पहलू इस प्रकार हैं:

1. यूपी ईको-टूरिज्म बोर्ड का गठन

सरकार ने विशेष रूप से ईको-टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड का गठन किया है। यह बोर्ड वन विभाग और पर्यटन विभाग के बीच समन्वय स्थापित करता है और पर्यावरणीय पर्यटन के लिए रणनीतियां तैयार करता है। बोर्ड की मुख्य जिम्मेदारी पर्यटन स्थलों में उच्च तकनीकी और सुविधाजनक इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाना है।

2. प्रमुख सर्किट का विकास

उत्तर प्रदेश के प्रमुख नेचर और हेरिटेज सर्किट में शामिल हैं:

  • दुधवा नेशनल पार्क और पीलीभीत टाइगर रिज़र्व
  • कतर्नियाघाट वन्यजीव अभयारण्य
  • चंबल अभयारण्य

इन स्थलों में अब नेचर वॉक, जंगल सफारी, बोटिंग और एडवेंचर ट्रेल्स जैसी सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं। पर्यटक इन स्थलों पर वन्यजीवों और पक्षियों का आनंद ले सकते हैं।

3. बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र का रोमांच

बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र अपने ऐतिहासिक किलों और स्मारकों के लिए मशहूर हैं। अब इन क्षेत्रों में झरने, वॉटरफॉल और ट्रैकिंग ट्रेल्स का विकास किया जा रहा है। इसका उद्देश्य पर्यटकों को इतिहास और रोमांच का संयोजन प्रदान करना है।

4. ग्रामीण पर्यटन (Rural Tourism)

सरकार ने वन क्षेत्रों के पास बसे गांवों को ‘टूरिज्म विलेज’ के रूप में विकसित करने की योजना बनाई है। यहां पर्यटकों को होम-स्टे (Home-stay) का अनुभव मिलेगा। इस पहल से न केवल स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा, बल्कि पर्यटक देसी संस्कृति और जीवनशैली का अनुभव भी कर सकेंगे।

क्यों है यह पहल खास?

विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना महामारी के बाद पर्यटकों का रुझान भीड़भाड़ वाली जगहों से हटकर शांत और प्राकृतिक स्थलों की तरफ बढ़ा है। उत्तर प्रदेश का यह ‘नेचर और हेरिटेज’ मॉडल न सिर्फ राज्य की आर्थिक मजबूती में योगदान देगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को भी जागरूक करेगा।आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश न केवल धार्मिक पर्यटन में अग्रणी रहेगा, बल्कि नेचर लवर्स और एडवेंचर प्रेमियों के लिए भी देश का पसंदीदा पर्यटन स्थल बन जाएगा।

Leave a comment