निफ्टी 50 कंपनियों की कमाई चार तिमाहियों से धीमी, मिड–स्मॉलकैप का प्रदर्शन मजबूत

निफ्टी 50 कंपनियों की कमाई चार तिमाहियों से धीमी, मिड–स्मॉलकैप का प्रदर्शन मजबूत

निफ्टी 50 कंपनियों की कमाई लगातार चौथी तिमाही कमजोर रही, जबकि मिड और स्मॉलकैप कंपनियों ने तेज वृद्धि दर्ज की। बड़ी कंपनियों की बिक्री 17 तिमाहियों के निचले स्तर पर आ गई है और कॉर्पोरेट मुनाफे में उनकी हिस्सेदारी 50 प्रतिशत पर सिमट गई है।

Stock: सितंबर 2025 तिमाही के कमजोर नतीजों के बाद निफ्टी 50 कंपनियों की आय वृद्धि दर लगातार चौथी तिमाही भी बाकी सभी सूचीबद्ध कंपनियों के संयुक्त प्रदर्शन से पीछे रही। वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में इन कंपनियों का संयुक्त शुद्ध मुनाफा सिर्फ 1.2 प्रतिशत बढ़ा, जो 12 तिमाहियों में सबसे धीमी बढ़ोतरी है। इसके उलट सभी सूचीबद्ध कंपनियों का संयुक्त शुद्ध मुनाफा 10.8 प्रतिशत बढ़ा, जो छह तिमाहियों में सबसे तेज रफ्तार है।

बिक्री वृद्धि 17 तिमाहियों के निचले स्तर पर

निफ्टी 50 कंपनियों की संयुक्त शुद्ध बिक्री (Net Sales) भी धीमी रही। वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में बिक्री वृद्धि सिर्फ 6.4 प्रतिशत दर्ज हुई। यह पिछले 17 तिमाहियों की सबसे कम ग्रोथ है। तुलना में सभी सूचीबद्ध कंपनियों की संयुक्त बिक्री 7.2 प्रतिशत बढ़ी, जो पहली तिमाही के 6.64 प्रतिशत से बेहतर और पिछले साल की दूसरी तिमाही के 7 प्रतिशत से अधिक है।

आय वृद्धि में लगातार कमजोरी

सितंबर 2025 के बाद से निफ्टी 50 कंपनियां लगातार चार तिमाहियों से बाकी सभी कंपनियों की संयुक्त आय से पिछड़ रही हैं। जून 2023 से शुरू होकर पिछली 10 तिमाहियों में से 8 में निफ्टी 50 का प्रदर्शन कमजोर रहा। यह उस दौर के ठीक विपरीत है जब मार्च 2022 से मार्च 2023 के बीच बड़ी कंपनियों ने लगातार पांच तिमाहियों तक बेहतर प्रदर्शन किया था।

कुल कॉर्पोरेट मुनाफे में हिस्सेदारी घटी

निफ्टी 50 कंपनियों का देश की कुल कॉर्पोरेट कमाई में योगदान तेजी से गिरा है। वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में इन कंपनियों की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत रह गई। यह पिछले पांच वर्षों का सबसे निचला स्तर है, जबकि तीन वर्ष पहले यही हिस्सेदारी लगभग 60 प्रतिशत थी। इससे साफ है कि बड़ी कंपनियां वर्तमान आर्थिक माहौल में अधिक दबाव झेल रही हैं।

तिमाही–दर–तिमाही कमाई में गिरावट

निफ्टी 50 कंपनियों का संयुक्त शुद्ध मुनाफा वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में बढ़कर 1.81 लाख करोड़ रुपये हुआ। यह पिछले साल की दूसरी तिमाही में दर्ज 1.79 लाख करोड़ रुपये से थोड़ा बेहतर है। लेकिन पहली तिमाही के 2.02 लाख करोड़ रुपये की तुलना में कमाई में 10.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। यह चार तिमाहियों में सबसे कम स्तर है।

मिडकैप–स्मॉलकैप कंपनियों की तेज रफ्तार

बिज़नेस स्टैंडर्ड के अनुसार 2,647 सूचीबद्ध कंपनियों का संयुक्त मुनाफा वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में बढ़कर 3.62 लाख करोड़ रुपये हो गया। विश्लेषकों के मुताबिक निफ्टी 50 की कमाई कमजोर रहने की मुख्य वजह मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों का मजबूत प्रदर्शन है। मिडकैप–150 कंपनियों की आय सालाना आधार पर 27 प्रतिशत बढ़ी, जबकि स्मॉलकैप–250 कंपनियों ने 37 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की। इसके मुकाबले लार्जकैप (Nifty 100) कंपनियों की आय सिर्फ 10 प्रतिशत बढ़ पाई।

बड़ी कंपनियों पर अतिरिक्त दबाव

मोतीलाल ओसवाल और इलारा कैपिटल जैसे ब्रोकरेज का कहना है कि निजी क्षेत्र के बैंकों और वाहन क्षेत्र (Auto Sector) की कमजोर कमाई ने निफ्टी 50 कंपनियों पर अतिरिक्त दबाव डाला है। कई लार्जकैप कंपनियां आर्थिक गतिविधियों पर निर्भर हैं, और धीमी रिकवरी के कारण उनकी कमाई प्रभावित हुई है। हालांकि कुछ विश्लेषकों का अनुमान है कि लार्जकैप और अन्य कंपनियों के प्रदर्शन का अंतर लंबे समय तक जारी नहीं रहेगा।

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