ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान में बौखलाहट दिखी है। ISPR प्रमुख अहमद शरीफ चौधरी के गैर-जिम्मेदार बयान ने विवाद खड़ा किया है, जिससे भारत-पाक संबंधों में तनाव बढ़ा और पाकिस्तान की सैन्य सोच पर सवाल उठे हैं।
Pakistan: भारत द्वारा किए गए ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान में बेचैनी साफ नजर आने लगी है। इसी बौखलाहट के बीच पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता और इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) के डायरेक्टर लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी का एक बयान चर्चा में आ गया है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने जिस भाषा का इस्तेमाल किया, उसे सड़क छाप और गैर-जिम्मेदाराना बताया जा रहा है। उनके बयान ने न सिर्फ भारत-पाक संबंधों में तनाव बढ़ाया है, बल्कि पाकिस्तान की सैन्य सोच पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत को धमकी भरा संदेश
हाल ही में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने भारत को लेकर कई आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि अफगानिस्तान से संचालित आतंकवादी समूह भारत के साथ मिलकर पाकिस्तान के खिलाफ काम कर रहे हैं। बिना किसी ठोस सबूत के लगाए गए इन आरोपों को विशेषज्ञों ने बेबुनियाद बताया है।
इसी दौरान चौधरी ने भारत को धमकी भरे लहजे में कहा, “मज़ा न कराया तो पैसे वापस।” इस बयान को पाकिस्तान की सैन्य भाषा और परंपरा के खिलाफ माना जा रहा है। आम तौर पर सेना के शीर्ष अधिकारी संयमित और कूटनीतिक भाषा का उपयोग करते हैं, लेकिन इस बार शब्द चयन ने पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर असहज स्थिति में डाल दिया है।
ISPR प्रमुख के बयान पर उठे सवाल
लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी का यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान पहले से ही आंतरिक और बाहरी दबावों से जूझ रहा है। आर्थिक संकट, राजनीतिक अस्थिरता और सुरक्षा चुनौतियों के बीच इस तरह के बयान को गैर-जिम्मेदाराना माना जा रहा है।
इससे पहले भी चौधरी एक प्रेस मीट के दौरान पत्रकार को आंख मारने की वजह से आलोचनाओं के घेरे में आ चुके हैं। ऐसे व्यवहार से ISPR जैसे संवेदनशील सैन्य विभाग की गंभीरता पर सवाल उठते हैं।
भारत के अस्तित्व को न मानने का दावा

अपने बयान में ISPR प्रमुख ने यह भी कहा कि भारत पाकिस्तान के अस्तित्व को स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने दावा किया कि भारत की नीति “मेरे दुश्मन का दुश्मन मेरा दोस्त” जैसी सोच पर आधारित है। चौधरी के अनुसार भारत, अफगानिस्तान और प्रतिबंधित आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के साथ मिलकर पाकिस्तान के खिलाफ साजिश रच रहा है।
हालांकि, भारत पहले ही कई बार साफ कर चुका है कि उसकी नीति आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी भारत ने लगातार पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के सबूत पेश किए हैं।
साल 2026 को लेकर डर और आशंका
लेफ्टिनेंट जनरल चौधरी ने साल 2026 को लेकर भी विवादित टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि वह कैसे खड़ा होता है और कैसे प्रतिक्रिया देता है। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान “अल्लाह का तोहफा” है और जो चाहे जहां से आए, उसे जवाब मिलेगा।
उन्होंने कहा कि चाहे कोई अकेले आए या समूह में, ऊपर से आए या नीचे से, जवाब जरूर दिया जाएगा। इसी संदर्भ में उन्होंने दोहराया कि “एक बार मजा न करा दिया तो पैसे वापस।” इस बयान को सैन्य चेतावनी की बजाय एक भड़काऊ भाषण माना गया।
पाकिस्तानी नेतृत्व की पुरानी रणनीति
यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान के किसी वरिष्ठ अधिकारी ने भारत पर इस तरह के आरोप लगाए हों। इससे पहले पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ भी अफगानिस्तान, भारत और TTP के बीच सांठगांठ का आरोप लगा चुके हैं। हालांकि, इन दावों के समर्थन में पाकिस्तान आज तक कोई ठोस प्रमाण पेश नहीं कर पाया है।
विश्लेषकों का मानना है कि जब भी पाकिस्तान अंदरूनी समस्याओं से घिरता है, तब भारत विरोधी बयानबाजी तेज कर दी जाती है। इससे घरेलू जनता का ध्यान असली मुद्दों से हटाने की कोशिश की जाती है।
ऑपरेशन सिंदूर से बढ़ी बेचैनी
ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान की प्रतिक्रिया यह संकेत देती है कि भारत की कार्रवाई ने वहां की सुरक्षा व्यवस्था को झकझोर दिया है। यही वजह है कि अब सैन्य प्रवक्ता सार्वजनिक मंचों पर असंयमित बयान दे रहे हैं।
भारत ने हमेशा साफ कहा है कि उसकी कार्रवाई आत्मरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ होती है। किसी भी पड़ोसी देश के खिलाफ आक्रामक नीति भारत की रणनीति का हिस्सा नहीं रही है।











