बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना को मानवता के खिलाफ अपराध का दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई गई। अवामी लीग ने इसे राजनीतिक और पक्षपातपूर्ण बताया। ट्रिब्यूनल में 54 गवाहों की सुनवाई हुई।
Bangladesh: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल (ICT-BD) ने मानवता के खिलाफ अपराध का दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई है। इस फैसले में हसीना समेत तीन अन्य लोगों को दंडित किया गया है। हसीना की पार्टी अवामी लीग ने इस फैसले को "पक्षपातपूर्ण और राजनीति से प्रेरित" करार दिया है। पार्टी का कहना है कि यह निर्णय अंतरिम सरकार के चरमपंथी इरादों को उजागर करता है।
कोर्ट के फैसले के बाद हसीना की प्रतिक्रिया
सजा सुनाए जाने के कुछ ही समय बाद शेख हसीना और उनकी पार्टी ने बयान जारी किया। इसमें कहा गया कि यह सजा पूरी तरह से राजनीतिक रूप से प्रेरित है और इसमें न्याय का पालन नहीं किया गया। हसीना ने इस फैसले को खारिज करते हुए कहा कि इसे उनके विरोधियों ने अंतरिम सरकार के भीतर अपने चरमपंथी और जानलेवा इरादों के तहत लागू करवाया है। हसीना के बेटे ने पहले ही अपने सोशल मीडिया पोस्ट में मां को मौत की सजा मिलने की संभावना जताई थी, जो अब सच साबित हुई।
ट्रिब्यूनल की सुनवाई
ICT-BD ने इस मामले की सुनवाई तीन सदस्यों वाली पीठ के माध्यम से 28 दिनों तक की। सुनवाई पूरी होने की तारीख 23 अक्टूबर थी। इस दौरान कुल 54 गवाहों ने अदालत में गवाही दी। ट्रिब्यूनल ने इस मामले में सभी सबूतों का विश्लेषण किया और देखा कि शेख हसीना ने किस प्रकार मानवता के खिलाफ अपराध किए।
ट्रिब्यूनल ने किस आधार पर दोषी ठहराया
फैसले में ट्रिब्यूनल ने कहा कि उस समय प्रधानमंत्री शेख हसीना वरिष्ठ कमांडिंग पद पर थीं। उन्होंने प्रदर्शन के दौरान घातक हथियारों और हेलीकाप्टरों का उपयोग करने के आदेश जारी किए थे, जिसे मानवता के खिलाफ अपराध माना गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि उनके आदेशों और कृत्यों ने आम नागरिकों के जीवन को खतरे में डाला और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों का उल्लंघन किया।

IGP चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून की भूमिका
इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (IGP) चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून इस मामले में सरकारी गवाह बने। उन्होंने ट्रिब्यूनल को मामले का पूरा खुलासा किया और कई अहम सबूत प्रस्तुत किए। अदालत ने कहा कि IGP के खिलाफ भी मृत्युदंड का प्रावधान है, लेकिन उनके द्वारा किए गए खुलासे को देखते हुए उन्हें कम सजा दी गई। यह कदम अदालत ने न्याय प्रक्रिया को पूर्ण और पारदर्शी बनाए रखने के लिए उठाया।
अंतरिम सरकार और चरमपंथियों पर आरोप
अवामी लीग ने बयान में कहा कि अंतरिम सरकार के चरमपंथियों ने जानबूझकर इस मामले को शेख हसीना के खिलाफ मोड़ा। पार्टी का कहना है कि यह राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा है और इसमें अदालत ने पर्याप्त संतुलन बनाए रखने में विफलता दिखाई। बयान में यह भी कहा गया कि यह निर्णय बांग्लादेश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और न्यायिक निष्पक्षता पर प्रश्न चिह्न लगाता है।
हसीना की राजनीतिक स्थिति पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से शेख हसीना की राजनीतिक स्थिति और बांग्लादेश की राजनीति पर बड़ा असर पड़ेगा। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इस फैसले को लेकर निगरानी कर रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ सजा सुनाए जाने के बाद अवामी लीग और उनके समर्थकों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि वे इस फैसले के खिलाफ कानूनी और राजनीतिक रूप से लड़ाई जारी रखेंगे।
ट्रिब्यूनल के महत्वपूर्ण बिंदु
- शेख हसीना और अन्य आरोपियों को मानवता के खिलाफ अपराध का दोषी ठहराया गया।
- प्रदर्शन के दौरान हिंसक हथियारों और हेलीकाप्टर के इस्तेमाल के आदेश दिए गए।
- वरिष्ठ पुलिस अधिकारी IGP चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून ने सरकारी गवाह के रूप में खुलासा किया।
- IGP को कम सजा दी गई, जबकि हसीना और दो अन्य को फांसी की सजा सुनाई गई।
- ट्रिब्यूनल ने पूरी सुनवाई 28 दिनों तक की और 54 गवाहों की गवाही दर्ज की।











