PhonePe अपने पहले IPO के जरिए मार्केट में कदम रख रही है। इसमें वॉलमार्ट, टाइगर ग्लोबल और माइक्रोसॉफ्ट कुल ₹10,115 करोड़ की हिस्सेदारी बेचेंगे। IPO पूरी तरह ऑफर-फॉर-सेल है और कंपनी कोई नई पूंजी नहीं जुटाएगी।
PhonePe IPO: भारत की फिनटेक कंपनी फोनपे (PhonePe) अपने पहले पब्लिक आईपीओ (IPO) के जरिए मार्केट में कदम रखने जा रही है। कंपनी का यह आईपीओ पूरी तरह ऑफर-फॉर-सेल (OFS) होगा, यानी इसमें कंपनी कोई नया फ्रेश कैपिटल नहीं जुटाएगी। इसके तहत केवल मौजूदा निवेशक अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे।
अपडेटेड ड्राफ्ट दस्तावेजों (UDRHP) के मुताबिक, फोनपे के प्रमुख निवेशक वॉलमार्ट, टाइगर ग्लोबल और माइक्रोसॉफ्ट ग्लोबल फाइनेंस कुल मिलाकर लगभग ₹10,115 करोड़ की हिस्सेदारी बेचेंगे। यह फाइलिंग ऐसे समय में आई है जब फोनपे को एक दिन पहले ही सेबी से आईपीओ की मंजूरी मिल चुकी है।
कंपनी इस आईपीओ के जरिए कुल ₹12,000 करोड़ जुटाने का लक्ष्य रख रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आईपीओ भारत के डिजिटल पेमेंट्स सेक्टर के लिए एक अहम बेंचमार्क साबित होगा और आने वाले समय में पब्लिक मार्केट में उतरने वाले अन्य फिनटेक यूनिकॉर्न्स के लिए भी रास्ता खोल सकता है।
कितनी होगी हिस्सेदारी बिक्री
फोनपे के इस आईपीओ में कुल 5.06 करोड़ इक्विटी शेयरों की बिक्री शामिल है। इसमें प्रमोटर कंपनी WM Digital कॉमर्स होल्डिंग्स, जो वॉलमार्ट इंटरनेशनल होल्डिंग्स के स्वामित्व में है, लगभग 4.6 करोड़ शेयर बेचने की योजना बना रही है। इसके अलावा टाइगर ग्लोबल करीब 10.39 लाख और माइक्रोसॉफ्ट लगभग 36.78 लाख शेयर बेचेंगे।
फोनपे में वॉलमार्ट की हिस्सेदारी 71.77 प्रतिशत है। इसके अलावा जनरल अटलांटिक के पास 8.98 प्रतिशत और हेडस्टेड के पास 5.73 प्रतिशत हिस्सेदारी है। फोनपे के सह-संस्थापक समीऱ निगम और राहुल चारी के पास कंपनी में 2.55-2.55 प्रतिशत हिस्सेदारी मौजूद है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आईपीओ के इस ऑफर-फॉर-सेल स्ट्रक्चर से मौजूदा निवेशकों को अपनी निवेश राशि वापस लेने का मौका मिलेगा, जबकि कंपनी की कुल वैल्यूएशन लगभग 15 अरब डॉलर आंकी जा रही है।
UPI लेनदेन में फोनपे का दबदबा
फोनपे भारत के डिजिटल पेमेंट्स मार्केट में अग्रणी है। NPCI के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2025 में कंपनी ने 9.8 अरब UPI ट्रांजैक्शन प्रोसेस किए। यह कुल UPI लेनदेन का लगभग 45 प्रतिशत से अधिक हिस्सा है।
कंपनी के मार्केट लीडर होने का यह मतलब है कि फोनपे के पास बड़े पैमाने पर यूजर बेस और ट्रांजैक्शन डेटा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस स्थिति के चलते कंपनी के फाइनेंशियल प्रॉफिटेबिलिटी और ग्रोथ का अंदाजा लगाया जा सकता है।
फोनपे की फाइनैंशियल हेल्थ
वित्त वर्ष 2024-25 में फोनपे का रेवेन्यू 7,115 करोड़ रुपये रहा, जो सालाना आधार पर 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्शाता है। इस दौरान कंपनी फ्री कैश फ्लो पॉजिटिव भी हुई और ऑपरेटिंग कैश फ्लो 1,202 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।
फोनपे का एडजस्टेड मुनाफा, जिसमें ESOP लागत को शामिल नहीं किया गया है, 630 करोड़ रुपये रहा। यह पिछले वर्ष की तुलना में तीन गुना अधिक है। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि यह मजबूत फाइनेंशियल स्थिति फोनपे के आईपीओ को सफल बनाने में मदद करेगी।
ऑफर-फॉर-सेल के फायदे
इस आईपीओ का सबसे बड़ा खासियत यह है कि यह पूरी तरह ऑफर-फॉर-सेल है। इससे मौजूदा निवेशक अपनी हिस्सेदारी बेचकर निवेश राशि वापस ले सकते हैं, जबकि कंपनी की नई पूंजी जुटाने की प्रक्रिया नहीं होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्ट्रक्चर निवेशकों के लिए भी आकर्षक है क्योंकि IPO में कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी और यूजर बेस की ताकत पहले से ही स्थापित है। IPO के दौरान निवेशक कंपनी के मार्केट लीडर होने और फाइनेंशियल हेल्थ को देखकर निर्णय ले सकते हैं।
IPO से डिजिटल पेमेंट्स मार्केट में बढ़त
फोनपे की पब्लिक लिस्टिंग भारत के डिजिटल पेमेंट्स सेक्टर के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती है। इसके अलावा आने वाले समय में अन्य फिनटेक यूनिकॉर्न्स जैसे Razorpay, BharatPe और Groww के लिए भी पब्लिक मार्केट में कदम रखने का रास्ता आसान होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि फोनपे के IPO से निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और डिजिटल पेमेंट्स सेक्टर में निवेश की संभावनाएं मजबूत होंगी।









