दावोस में ट्रंप ने 'बोर्ड ऑफ पीस' किया लॉन्च, मुस्लिम देशों ने जताया समर्थन

दावोस में ट्रंप ने 'बोर्ड ऑफ पीस' किया लॉन्च, मुस्लिम देशों ने जताया समर्थन

दावोस में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने Board of Peace का उद्घाटन किया। इसका उद्देश्य गाजा युद्धविराम से शुरू होकर अब वैश्विक संघर्षों को सुलझाना है। पाकिस्तान और मुस्लिम देशों ने समर्थन दिया, जबकि यूरोप और भारत ने शामिल नहीं हुए।

World News: स्विट्जरलैंड के दावोस में गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने प्रस्तावित 'बोर्ड ऑफ पीस' (Board of Peace) का औपचारिक उद्घाटन किया। यह कार्यक्रम विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum) के दौरान आयोजित किया गया। इस बोर्ड को वैश्विक संघर्षों (Global Conflicts) को सुलझाने के उद्देश्य से बनाया गया है। शुरुआत में यह इजरायल और हमास (Israel-Hamas) के बीच गाजा पट्टी (Gaza Strip) में युद्धविराम और पुनर्निर्माण (Reconstruction) की निगरानी के लिए था, लेकिन अब इसका दायरा वैश्विक स्तर तक फैलाया जा चुका है।

इस चार्टर (Charter) की स्थायी सदस्यता के लिए 1 अरब डॉलर का मूल्य टैग रखा गया है। उद्घाटन समारोह में पाकिस्तान, तुर्की, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), मिस्र, कतर और कई अन्य देशों ने इस चार्टर पर हस्ताक्षर किए। हालांकि चीन और कुछ यूरोपीय देशों ने फिलहाल इसमें शामिल होने से दूरी बनाई है।

ट्रंप ने उद्घाटन के दौरान क्या कहा

उद्घाटन भाषण में ट्रंप ने कहा कि "हर कोई" इस बोर्ड का हिस्सा बनना चाहता है। उन्होंने यह भी कहा कि वे संयुक्त राष्ट्र (United Nations) और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ मिलकर काम करेंगे। ट्रंप ने इसे "बहुत रोमांचक दिन" बताया और कहा कि बोर्ड "सुंदर ढंग से काम कर रहा है"। समारोह में कई देशों के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और शीर्ष राजनयिक मौजूद थे।

ट्रंप ने बोर्ड के फाउंडिंग एग्जीक्यूटिव बोर्ड (Founding Executive Board) का विस्तृत परिचय भी दिया। इसमें अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो (Marco Rubio), जारेड कुश्नर (Jared Kushner), ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर (Tony Blair) समेत कई नाम शामिल हैं। ट्रंप ने कहा कि यह बोर्ड "सबसे प्रभावशाली और काम पूरा करने वाला" निकाय होगा और उन्होंने इसे खुद जीवन भर की अध्यक्षता (Chairmanship) देने की बात कही।

प्रमुख नेताओं ने किया हस्ताक्षर

बोर्ड के चार्टर पर हस्ताक्षर करने वाले प्रमुख नेताओं में शामिल हैं:

  • अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर मिलेई (Javier Milei)
  • इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो (Prabowo Subianto)
  • पराग्वे के राष्ट्रपति सैंटियागो पेना (Santiago Pena)
  • उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शवकत मिर्ज़ियोयेव (Shavkat Mirziyoyev)
  • पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (Shehbaz Sharif)
  • आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पाशिन्यान (Nikol Pashinyan)
  • अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव (Ilham Aliyev)

इसके अलावा सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, मिस्र, कतर, जॉर्डन, तुर्की, मोरक्को, हंगरी, कजाकिस्तान, कोसोवो, बेलारूस, वियतनाम और इजरायल ने भी शामिल होने की पुष्टि की है।

बोर्ड की संरचना और उद्देश्य

ट्रंप ने बताया कि यह बोर्ड शुरू में गाजा के पुनर्निर्माण, मानवीय सहायता (Humanitarian Aid) और स्थानीय शासन (Local Governance) पर ध्यान केंद्रित करता था। अब इसे वैश्विक संघर्षों को सुलझाने वाले निकाय (Global Conflict Resolution Body) के रूप में पेश किया जा रहा है। बोर्ड का उद्देश्य स्थायी युद्धविराम (Permanent Ceasefire) सुनिश्चित करना, मानवीय राहत प्रदान करना और अंतरराष्ट्रीय कानून (International Law) के अनुसार न्यायपूर्ण और स्थायी शांति (Peace) स्थापित करना है।

ट्रंप ने कहा कि बोर्ड संयुक्त राष्ट्र (UN) के साथ सहयोग करेगा, लेकिन इसकी संरचना यूएन के कार्यों को बेहतर बनाने और उन्हें पूरी तरह से लागू कराने की कोशिश करेगी। उन्होंने दावा किया कि बोर्ड में शामिल होने वाले नेता प्रभावशाली (Influential) हैं और काम पूरा करने में सक्षम हैं।

पाकिस्तान और मुस्लिम देशों का समर्थन

पाकिस्तान समेत कई मुस्लिम-बहुल देशों ने बोर्ड में शामिल होने का समर्थन किया। इनमें सऊदी अरब, तुर्की, मिस्र, जॉर्डन, इंडोनेशिया और कतर शामिल हैं। इन देशों ने संयुक्त बयान में गाजा में स्थायी युद्धविराम, पुनर्निर्माण और "न्यायपूर्ण शांति" (Just Peace) का समर्थन किया।

यूरोप और चीन ने किया दूरी

फ्रांस, नॉर्वे, स्वीडन और ब्रिटेन ने बोर्ड में शामिल होने से फिलहाल दूरी बनाई है। यूरोपीय देशों ने कहा कि उन्हें चिंता है कि बोर्ड संयुक्त राष्ट्र के संघर्ष समाधान के मुख्य मंच को कमजोर कर सकता है। चीन ने स्पष्ट रूप से बोर्ड में शामिल होने से इनकार किया है। रूस, यूक्रेन और कुछ अन्य देशों ने अभी इस पर निर्णय नहीं लिया है।

ब्रिटेन के विदेश मंत्री यवेट कूपर (Yvette Cooper) ने कहा कि रूस की भागीदारी (Participation of Russia) और बोर्ड की व्यापक कानूनी संरचना (Legal Framework) के कारण ब्रिटेन हस्ताक्षर नहीं करेगा।

भारत ने बोर्ड में नहीं किया शामिल

ट्रंप द्वारा बोर्ड के उद्घाटन के दौरान भारत ने हस्ताक्षर नहीं किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य वैश्विक नेता अमेरिकी राष्ट्रपति के आमंत्रण के बावजूद इस चार्टर में शामिल नहीं हुए। भारत ने स्पष्ट किया कि वह संयुक्त राष्ट्र (UN) के प्रमुख भूमिका वाले मंच को प्राथमिकता देता है और किसी नए विवादास्पद निकाय में भाग लेने से फिलहाल परहेज करेगा।

ट्रंप की मंशा

ट्रंप ने बोर्ड को "सबसे प्रभावशाली और काम पूरा करने वाला निकाय" बताया। उनका मानना है कि इस बोर्ड से वैश्विक संघर्षों (Global Conflicts) का समाधान जल्द और प्रभावी रूप से किया जा सकेगा। ट्रंप ने इसे अपनी 20-सूत्री गाजा सीजफायर योजना (Gaza Ceasefire Plan) का हिस्सा बताया, जिसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने भी समर्थन दिया।

ट्रंप का यह भी कहना है कि बोर्ड भविष्य में यूक्रेन (Ukraine) और अन्य क्षेत्रीय विवादों में भी भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि यह निकाय उन नेताओं का समूह होगा जो काम पूरा कर सकते हैं और जिनके पास वास्तविक प्रभाव (Influence) है।

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