प्रधानमंत्री कार्यालय अब ‘सेवा तीर्थ’ के नाम से जाना जाएगा, सरकार ने लिया ऐतिहासिक फैसला

प्रधानमंत्री कार्यालय अब ‘सेवा तीर्थ’ के नाम से जाना जाएगा, सरकार ने लिया ऐतिहासिक फैसला

केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का नाम बदलकर ‘सेवा तीर्थ’ कर दिया है। यह कदम प्रधानमंत्री कार्यालय की कार्यशैली और जन सेवा के प्रति समर्पण को देखते हुए उठाया गया है। 

PMO Seva Teerth: केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का नाम बदलकर ‘सेवा तीर्थ’ कर दिया है। बताया जा रहा है कि पीएमओ जल्द ही नई कॉम्प्लेक्स में शिफ्ट होगा, जिसका नाम सेवा तीर्थ रखा गया है। यह नया कॉम्प्लेक्स पहले सेंट्रल विस्टा रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत ‘एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव’ के नाम से जाना जाता था और अब इसके अंतिम निर्माण चरण में है।

‘एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव’ में प्रधानमंत्री कार्यालय के अलावा कैबिनेट सचिवालय, नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल सचिवालय और इंडिया हाउस के ऑफिस भी होंगे। यह स्थान उच्च स्तरीय बातचीत और महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए इस्तेमाल होगा। अधिकारियों के अनुसार, ‘सेवा तीर्थ’ एक ऐसा वर्कप्लेस होगा जिसे सेवा की भावना के साथ डिजाइन किया गया है, जहां नेशनल प्रायोरिटीज़ आकार लेंगी।

प्रधानमंत्री कार्यालय का नया नाम और नई बिल्डिंग

प्रधानमंत्री कार्यालय जल्द ही नई बिल्डिंग में शिफ्ट होगा, और इस बिल्डिंग का नाम ही सेवा तीर्थ रखा गया है। यह कदम सिर्फ नाम बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रशासनिक केंद्र में जनता और सरकार के बीच की दूरी को कम करने का प्रतीक है। अधिकारियों का कहना है कि इससे पीएमओ की छवि एक जनसेवा केंद्र के रूप में मजबूत होगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में उपनिवेशकालीन शाही ठिकानों और प्रशासनिक इमारतों के नाम बदलने की यह एक और महत्वपूर्ण कड़ी है। इससे पहले भी कई प्रतिष्ठित भवनों और मार्गों के नाम बदले जा चुके हैं।

नाम परिवर्तन की पहल का इतिहास

प्रधानमंत्री मोदी ने 2016 में अपने आवास का नाम बदलकर इसकी शुरुआत की थी। उनका आवास पहले 7, रेस कोर्स रोड के नाम से जाना जाता था, जिसे बदलकर 7, लोक कल्याण मार्ग कर दिया गया। इसके बाद 2022 में राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ रखा गया। केंद्रीय सचिवालय का नाम अब कत्रव्य भवन है।

सरकार के अनुसार, ये बदलाव सत्ता और नियंत्रण की परंपरागत छवि को हटाकर सेवा, कर्तव्य और जवाबदेही को प्राथमिकता देने का प्रतीक हैं। इन नाम परिवर्तनों का उद्देश्य केवल छवि निर्माण नहीं, बल्कि प्रशासनिक सोच और शासन की शैली में परिवर्तन लाना है।

‘सेवा तीर्थ’ का उद्देश्य

प्रधानमंत्री कार्यालय के नाम को ‘सेवा तीर्थ’ रखने का मुख्य उद्देश्य है कि यह जनता के लिए एक तीर्थस्थान की तरह काम करे। जनता को यह संदेश देना है कि प्रधानमंत्री कार्यालय का हर कार्य और हर निर्णय सेवा और उत्तरदायित्व पर आधारित है। केंद्रीय अधिकारी बताते हैं, "यह बदलाव शासन की सोच में बदलाव का प्रतीक है। सत्ता और निर्णय लेने के परंपरागत केंद्र अब जनता की सेवा का प्रतीक बनेंगे। सेवा तीर्थ, जनता और प्रशासन के बीच एक मजबूत पुल का काम करेगा।

  • सुलभता: जनता के लिए पीएमओ तक पहुंच आसान होगी।
  • पारदर्शिता: निर्णय प्रक्रिया और सरकारी योजनाओं के प्रति जनता में विश्वास बढ़ेगा।
  • उत्तरदायित्व: प्रशासनिक निर्णय जनता की भलाई और सेवा के दृष्टिकोण से होंगे।

विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम सिर्फ नाम बदलने तक सीमित नहीं, बल्कि यह भारत में शासन शैली में बदलाव और प्रशासनिक दृष्टिकोण को जनता-केंद्रित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

 

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