राष्ट्रपति मुर्मू प्रोटोकॉल विवाद पर मायावती की प्रतिक्रिया, कहा- 'संवैधानिक पदों का सम्मान जरूरी'

राष्ट्रपति मुर्मू प्रोटोकॉल विवाद पर मायावती की प्रतिक्रिया, कहा- 'संवैधानिक पदों का सम्मान जरूरी'

पश्चिम बंगाल में Droupadi Murmu के कार्यक्रम से जुड़े प्रोटोकॉल विवाद पर Mayawati ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक पदों का सम्मान करना सभी नागरिकों की जिम्मेदारी है और इन पदों को किसी भी राजनीतिक उद्देश्य के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

लखनऊ: पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति Droupadi Murmu के दौरे के दौरान सामने आए प्रोटोकॉल विवाद पर बहुजन समाज पार्टी (BSP) सुप्रीमो और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री Mayawati ने प्रतिक्रिया दी है। मायावती ने कहा कि संवैधानिक पदों का सम्मान करना हर भारतीय की जिम्मेदारी है और इन पदों का राजनीतिकरण कतई स्वीकार्य नहीं है।

BSP प्रमुख ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि भारतीय संविधान के अनुसार राष्ट्रपति पद का सम्मान करना सभी नागरिकों के लिए अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के दौरे के दौरान प्रोटोकॉल का पालन करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह पद देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा का प्रतीक है।

राष्ट्रपति पद का आदिवासी और महिला प्रतिनिधित्व

मायावती ने अपने बयान में विशेष रूप से उल्लेख किया कि वर्तमान में भारत की राष्ट्रपति Droupadi Murmu आदिवासी समाज से आती हैं और महिला होने के साथ-साथ उन्हें देश के सभी नागरिकों का प्रतिनिधित्व करना चाहिए। ऐसे में उनके दौरे के दौरान जो प्रोटोकॉल संबंधी समस्याएँ सामने आईं, वे अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण हैं।

उन्होंने कहा, यह स्थिति संवैधानिक पद की गरिमा को प्रभावित करती है और लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए ठीक नहीं है। संवैधानिक पद का राजनीतिकरण किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है।

संसद और अन्य संवैधानिक पदों पर चिंता

मायावती ने अपने बयान में केवल राष्ट्रपति के प्रोटोकॉल तक ही बात सीमित नहीं रखी। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले कुछ समय में संसद में संवैधानिक पदों के राजनीतिकरण की प्रवृत्ति भी बढ़ रही है। विशेष रूप से लोकसभा अध्यक्ष के पद को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप सामने आते रहे हैं। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि संवैधानिक पदों का सम्मान दलगत राजनीति से ऊपर रखा जाए। 

उनका मानना है कि संसद का आगामी सत्र देश और जनता के हित में सुचारु रूप से चलना चाहिए। यह न केवल लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक है, बल्कि जनता की अपेक्षाओं और समय की मांग भी है। पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में आयोजित एक आदिवासी सम्मेलन के दौरान यह प्रोटोकॉल विवाद सामने आया। रिपोर्टों के अनुसार, राष्ट्रपति के स्वागत के लिए राज्य सरकार या मुख्यमंत्री के किसी वरिष्ठ प्रतिनिधि की अनुपस्थिति थी। 

कार्यक्रम स्थल छोटा और व्यवस्थाओं में कमी की वजह से भी विवाद बढ़ा। राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने इस बात पर नाराजगी जताई कि उनका दौरा उचित व्यवस्था और सम्मान के साथ नहीं हुआ। इस घटना के बाद भाजपा ने टीएमसी सरकार पर आरोप लगाया कि राज्य ने राष्ट्रपति और आदिवासी समाज का अपमान किया।

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