Republic Day 2026: लालकिला में दिखेगी बिहार की ‘मखाना’ झांकी, दुनिया देखेगी मिथिला की ताकत

Republic Day 2026: लालकिला में दिखेगी बिहार की ‘मखाना’ झांकी, दुनिया देखेगी मिथिला की ताकत

गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर बिहार को एक बड़ी राष्ट्रीय और वैश्विक पहचान मिलने जा रही है। रक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित भारत पर्व के तहत बिहार की ‘मखाना’ आधारित झांकी का चयन किया गया है, जिसे नई दिल्ली के ऐतिहासिक लालकिला परिसर में प्रदर्शित किया जाएगा। 

पटना: गणतंत्र दिवस समारोह के अवसर पर रक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित भारत पर्व के अंतर्गत राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की चयनित झांकियों में बिहार से मखाना को शामिल किया गया है। इसका प्रदर्शन नई दिल्ली के लाल किला परिसर में किया जाएगा। बिहार की झांकी की थीम “मखाना: लोकल से ग्लोबल तक” रखी गई है। 

भारत पर्व के तहत देश की सांस्कृतिक, आर्थिक और सामाजिक विविधताओं को झांकियों, हस्तशिल्प, खानपान और परंपराओं के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा। भारत पर्व गणतंत्र दिवस समारोह का एक अहम हिस्सा है, जहां देश के विभिन्न राज्य और केंद्रशासित प्रदेश अपनी सांस्कृतिक विविधता, पारंपरिक ज्ञान, आजीविका के स्रोत और विकास की कहानी को झांकियों के माध्यम से प्रस्तुत करते हैं। यह आयोजन ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को मजबूती देता है और राज्यों की विशिष्ट पहचान को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचाता है।

बिहार का ‘सफेद सोना’ मखाना

बिहार की झांकी का केंद्र है — मखाना, जिसे ‘बिहार का सफेद सोना’ कहा जाता है। आज यह मखाना मिथिलांचल के पारंपरिक तालाबों और पोखरों से निकलकर सुपरफूड के रूप में दुनिया भर की थाली तक पहुंच चुका है। भारत विश्व में मखाना का सबसे बड़ा उत्पादक देश है और इसमें बिहार की हिस्सेदारी लगभग 85 से 90 प्रतिशत है। विशेष रूप से मिथिला क्षेत्र का मखाना, जिसे वर्ष 2022 में जीआई टैग (Geographical Indication) प्राप्त हुआ, अब वैश्विक बाजार में एक विशिष्ट और प्रमाणिक पहचान रखता है।

बिहार की मखाना झांकी को दो प्रमुख खंडों में तैयार किया गया है, जो मखाना की पूरी यात्रा को दृश्य रूप में दर्शाती है। पहले खंड में कमल के पत्तों के बीच उभरा हुआ सफेद ‘लावा मखाना’, उसके साथ जीआई टैग का प्रतीक और चारों ओर मिथिला पेंटिंग की पारंपरिक बॉर्डर दिखाई देगी। यह दृश्य मिथिला की सांस्कृतिक समृद्धि और मखाना की विशिष्ट पहचान को दर्शाता है। दूसरे खंड में मखाना उत्पादन की पारंपरिक और श्रमसाध्य प्रक्रिया को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया है —

  • मखाना की कटाई
  • बीजों का संग्रह
  • ग्रेडिंग और भुनाई
  • दानों को फोड़ना
  • पैकिंग और गुणवत्ता जांच

एक ओर मिट्टी के चूल्हे पर लोहे की कढ़ाही में मखाना भूनती महिला और दूसरी ओर लकड़ी के मूसल से मखाना फोड़ता पुरुष — ये दृश्य महिला सहभागिता, पारंपरिक श्रम और स्थानीय कौशल को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करते हैं।

केवल कृषि उत्पाद नहीं, एक विरासत

यह झांकी यह स्पष्ट संदेश देती है कि मखाना सिर्फ एक कृषि उत्पाद नहीं है, बल्कि यह विरासत, आजीविका, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण उद्यमिता का प्रतीक है। मखाना उत्पादन से जुड़े हजारों परिवारों की आजीविका इससे चलती है, खासकर मिथिलांचल क्षेत्र में। लालकिला जैसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय मंच पर मखाना झांकी का प्रदर्शन बिहार को वैश्विक दर्शकों के सामने एक नई पहचान देगा। यह झांकी दिखाएगी कि कैसे पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय उत्पाद आधुनिक बाजार से जुड़कर लोकल से ग्लोबल की यात्रा तय कर सकते हैं।

Leave a comment