गणतंत्र दिवस पर तिरंगा फहराने और उतारने के लिए नियम बेहद महत्वपूर्ण हैं। झंडा क्षतिग्रस्त नहीं होना चाहिए, आयताकार होना चाहिए और 3:2 अनुपात में होना चाहिए। सही तरीके से फहराकर और मोड़कर ही सुरक्षित रखा जाए।
तिरंगा फहराने के नियम
गणतंत्र दिवस के मौके पर सभी स्कूल, कॉलेज, सरकारी इमारतें और सोसाइटी में तिरंगे को फहराना अनिवार्य होता है। झंडा फहराते समय कुछ विशेष नियमों का पालन करना जरूरी है।
- राष्ट्रीय ध्वज हमेशा ऊँचाई पर और साफ-सुथरी जगह पर फहराना चाहिए।
- झंडा कभी भी जमीन पर नहीं गिरना चाहिए।
- किसी भी प्रकार की अपमानजनक स्थिति, जैसे झंडे को फटे या धुला-धूसरित रखना, उचित नहीं है।
इस दिन विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों, परेड और भाषण प्रतियोगिताओं के दौरान भी ध्वजारोहण का विशेष महत्व होता है।
ध्वज को सुरक्षित तरीके से उतारना

तिरंगा उतारते समय भी सावधानी बरतना जरूरी है। झंडा सुरक्षित और सम्मानपूर्वक मोड़ा जाए।
- झंडे को क्षैतिज रूप में रखें।
- केसरिया और हरे हिस्से वाली पट्टियों को सफेद पट्टी के नीचे फोल्ड करें।
- सफेद पट्टी के नीचे केसरिया और हरे रंग की पट्टियाँ रखें और मोड़ें।
- मोड़े हुए झंडे को हाथों में लेकर सुरक्षित स्थान पर रखें।
इस तरह झंडे का सम्मान बनाए रखा जाता है और किसी भी प्रकार का अपमान नहीं होता।
भारतीय ध्वज संहिता के नियम
भारतीय ध्वज संहिता 26 जनवरी 2002 को लागू की गई थी। इसके अनुसार झंडे का सही उपयोग सुनिश्चित किया जाता है।
- राष्ट्रीय ध्वज आयताकार होना चाहिए और लंबाई तथा चौड़ाई का अनुपात 3:2 होना चाहिए।
- झंडे पर किसी भी प्रकार का लिखा हुआ या चित्र नहीं होना चाहिए।
- अगर झंडा क्षतिग्रस्त, फटा या कटा हुआ है, तो उसे ध्वजारोहण में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
इन नियमों का पालन करके ही गणतंत्र दिवस पर तिरंगे का सम्मान सुनिश्चित किया जा सकता है।













