जिनेवा में हुई ताज़ा वार्ता के बाद अमेरिका और यूक्रेन ने संकेत दिया कि रूस–यूक्रेन युद्ध समाप्त करने की दिशा में कुछ प्रगति हो रही है। शांति प्रस्ताव को लेकर दोनों देश सकारात्मक दिख रहे हैं, हालांकि यूरोपीय देश अभी सतर्क हैं।
Russia-Ukraine War: रूस और यूक्रेन के बीच करीब चार साल से चल रही जंग को समाप्त करने के लिए लगातार कोशिशें जारी हैं। कई देशों की मध्यस्थता के बावजूद संघर्ष थम नहीं पाया है। हालांकि जिनेवा में हुई ताज़ा वार्ता के बाद अमेरिका और यूक्रेन के शीर्ष अधिकारियों ने संकेत दिया है कि युद्ध खत्म करने की दिशा में कुछ प्रगति होती दिख रही है।
अमेरिका-यूक्रेन ने वार्ता को बताया उपयोगी
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने जिनेवा में हुई बातचीत को लंबे समय बाद सबसे सकारात्मक बताया। रुबियो ने कहा कि यह वार्ता बेहद उपयोगी रही और इससे उम्मीद बंधती है कि जंग समाप्त करने के लिए ठोस कदम उठाए जा सकते हैं। उनके अनुसार बातचीत आगे भी जारी रहेगी और किसी भी अंतिम प्रस्ताव को रूस के सामने रखा जाएगा क्योंकि रूस की भूमिका इस प्रक्रिया में अनिवार्य है।
यूक्रेनी वार्ता दल के प्रमुख एंड्री यरमाक ने भी बातचीत को सार्थक बताया। उन्होंने कहा कि जिन मुद्दों पर चर्चा हुई है, वह भविष्य की दिशा तय करेंगे। यरमाक ने स्पष्ट किया कि अगला दौर जल्द शुरू होगा और किसी भी निर्णय की अंतिम मुहर दोनों देशों के राष्ट्रपति लगाएंगे। उनके अनुसार यह वार्ता इस संघर्ष को खत्म करने की दिशा में एक आवश्यक कदम है।
यूक्रेन की बढ़ी चिंता

अमेरिका द्वारा तैयार किए गए शांति प्रस्ताव को लेकर यूरोपीय देशों और यूक्रेन में चिंता बढ़ी है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी प्रस्ताव रूस के प्रति नरम माना जा रहा है और कई यूरोपीय देशों का मानना है कि यह प्रस्ताव संघर्ष की जमीनी स्थिति को ध्यान में नहीं रखता। कुछ सीनेटरों ने तो इसे रूस की ‘इच्छा सूची’ जैसा तक बता दिया था। हालांकि अमेरिकी विदेश विभाग ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि प्रस्ताव संतुलित है और किसी भी पक्ष के हितों को नुकसान नहीं पहुंचाता।
यूक्रेन को डर है कि अगर यह प्रस्ताव रूस के पक्ष में झुक गया तो उसकी संप्रभुता और सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। यही कारण है कि यूरोपीय देश और यूक्रेन इस योजना को लेकर सतर्क दिखाई दे रहे हैं। फिर भी, वार्ता का जारी रहना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि सभी पक्ष किसी न किसी रूप में समाधान चाहते हैं।
जेलेंस्की के सामने मुश्किल विकल्प
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने भी इस स्थिति पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि उनके देश को अपने संप्रभु अधिकारों की रक्षा करने और अमेरिका के आवश्यक समर्थन को बनाए रखने के बीच एक कठिन विकल्प का सामना करना पड़ सकता है। यह बयान इस बात को दिखाता है कि यूक्रेन के लिए स्थिति कितनी जटिल है। एक तरफ उसे अपने हितों की सुरक्षा करनी है और दूसरी ओर अमेरिका जैसे प्रमुख सहयोगी का साथ भी बनाए रखना है।
जंग में भारी जनहानि जारी
रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष लगातार जारी है और इसका असर दोनों देशों पर भारी पड़ा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में चेतावनी देते हुए कहा था कि जो भी देश रूस के साथ व्यापार करेगा, उसके खिलाफ कड़ी पाबंदियां लगाई जाएंगी। इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव और बढ़ा दिया है। जंग के दौरान अब तक 50,000 से ज्यादा यूक्रेनी सैनिकों की मौत हो चुकी है और हजारों सैनिक कैद किए जा चुके हैं।











