चीथवाड़ी ग्राम सेवा सहकारी समिति में 6 करोड़ से अधिक राशि के गबन मामले में फरार चल रहे व्यवस्थापक शंकरलाल शर्मा को पुलिस ने चंदवाजी क्षेत्र के लबाना गांव से गिरफ्तार कर लिया। आरोपी अपने ससुराल में आयोजित शादी समारोह में शामिल होने पहुंचा था, जहां पुलिस ने घेराबंदी कर उसे दबोच लिया।
जयपुर। चीथवाड़ी ग्राम सेवा सहकारी समिति के व्यवस्थापक रहे शंकरलाल शर्मा पर समिति के फंड में 6 करोड़ 35 लाख 96 हजार रुपए के गबन करने का आरोप है। पुलिस के अनुसार आरोपी ने व्यवस्थापक के पद का दुरुपयोग करते हुए एक लंबे समय तक अनियमित वित्तीय लेन-देन किए, जिसकी शिकायत के बाद करीब दो महीने पहले उसके खिलाफ मामला दर्ज हुआ था। मामला दर्ज होने के तुरंत बाद वह फरार हो गया था और लगातार लोकेशन बदलकर पुलिस से बचता रहा।
शनिवार को सूचना मिली कि शंकरलाल चंदवाजी इलाके के लबाना गांव स्थित अपने ससुराल में एक शादी समारोह में शामिल होने पहुंचा है। चौमूं पुलिस ने मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की और आरोपी को शांतिपूर्वक हिरासत में ले लिया। प्रारंभिक पूछताछ में उसने कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ साझा की हैं। पुलिस अब गबन की पूरी राशि और उसमें शामिल संभावित अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
दो दिन की गुप्त निगरानी
चौमूं पुलिस को सूचना मिली थी कि गबन का आरोपी अपने ससुराल में आयोजित शादी समारोह में शामिल होने आ सकता है। इसके बाद पुलिस टीम के एक कॉन्स्टेबल को समारोह में होने वाली गतिविधियों पर निरंतर नजर रखने के लिए तैनात किया गया।
दो दिन तक गुप्त रूप से निगरानी करने के बाद जैसे ही आरोपी भीड़ में दिखाई दिया, पुलिस ने तुरंत घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अब उससे गबन की पूरी राशि और नेटवर्क से जुड़े अन्य पहलुओं पर पूछताछ कर रही है।
बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता
जयपुर सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड की ओर से दर्ज शिकायत में सामने आया कि आरोपी शंकरलाल ने चौमूं सीसीबी शाखा में कार्यरत रहते हुए कई चरणों में करोड़ों रुपए का गबन किया। बैंक की रिपोर्ट के अनुसार आरोपी ने 4 करोड़ 60 लाख रुपए से अधिक की नकदी अनियमित तरीके से उठाई।
वहीं अन्य बैंकों के खाताधारकों से मिलीभगत कर उसने लगभग 1 करोड़ 75 लाख रुपए आरटीजीएस और ऑनलाइन माध्यम से ट्रांसफर किए। यह पूरा वित्तीय घोटाला कई महीनों तक बिना पकड़े चलता रहा, जिसकी जानकारी ऑडिट रिपोर्ट के बाद सामने आई।
आंतरिक लापरवाही
बैंक की जांच समिति ने खुलासा किया कि आरोपी ने कई एग्रो कंपनियों और सहकारी समितियों के साथ गठजोड़ कर रकम को अलग-अलग खातों में स्थानांतरित किया। जांच में सामने आए दस्तावेजों से पता चला कि यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था और रकम को छुपाने के लिए बार-बार खातों का उपयोग बदला जाता था।
इस मामले में आंतरिक लापरवाही भी उजागर हुई है। विभाग ने गबन की शृंखला में संदिग्ध भूमिका को देखते हुए सीसीबी शाखा की कैशियर प्रज्ञा पारीक और तत्कालीन मैनेजर गोकुल चंद को एपीओ कर दिया है। पुलिस अब पूरे वित्तीय प्रवाह की जांच कर रही है, ताकि गबन की वास्तविक सीमा और शामिल सभी लोगों की पहचान की जा सके।










