इस हफ्ते भारतीय शेयर बाजार में मिश्रित रुझान देखने को मिल सकता है। सेंसेक्स और निफ्टी ने मजबूती दिखाई, लेकिन विदेशी निवेशकों की निकासी और वैश्विक आर्थिक आंकड़े बाजार की दिशा तय करेंगे। DIIs की सक्रियता भी अहम रहेगी।
Stock Market: भारतीय शेयर बाजार में 2 जनवरी को समाप्त हुए सप्ताह में निवेशकों को मिश्रित अनुभव मिला। बीएसई सेंसेक्स 720.56 अंकों की तेजी के साथ 85,762.01 अंकों पर बंद हुआ, जबकि एनएसई का निफ्टी 50 इंडेक्स 286.25 अंकों की मजबूती के साथ 26,328.55 अंकों पर आ गया। इस दौरान निफ्टी ने शुक्रवार को 26,340 के अपने नए लाइफटाइम हाई को भी छुआ।
वहीं, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली जारी रही, जिन्होंने केवल 1 और 2 जनवरी को भारतीय शेयर बाजार से 7,608 करोड़ रुपये की निकासी की। एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले सप्ताह में भी बाजार की दिशा व्यापक आर्थिक आंकड़ों, वैश्विक रुझानों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर निर्भर करेगी।
घरेलू संस्थागत निवेशकों का बढ़ता प्रभाव
पिछले सप्ताह शेयर बाजार में तेजी का मुख्य कारण घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) रहे। उन्होंने बिना रुके पूंजी निवेश किया, जिससे बाजार में सकारात्मक माहौल बना। रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के अजीत मिश्रा के अनुसार, "इस हफ्ते घरेलू और वैश्विक स्तर पर कई महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़े सामने आएंगे। इसके अलावा, कंपनियों के तिमाही नतीजों की शुरुआत भी होने वाली है। भारत में निवेशकों की नजर एचएसबीसी सर्विस पीएमआई और संयुक्त पीएमआई के अंतिम आंकड़ों पर रहेगी।"
उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक स्तर पर निवेशक अमेरिकी और चीन के आर्थिक आंकड़ों पर ध्यान देंगे, जिससे मांग और महंगाई के रुझानों की जानकारी मिल सके। घरेलू संस्थागत निवेशकों की सक्रियता बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।
तीसरी तिमाही के नतीजों पर होगी नजर
ऑनलाइन ट्रेडिंग फर्म एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर. ने बताया कि निवेशकों का ध्यान अब तीसरी तिमाही के नतीजों पर रहेगा। "निवेशक प्रमुख कंपनियों में चुनिंदा पोजीशन बनाकर नतीजों के असर को समझ सकते हैं। सेवा और संयुक्त पीएमआई के आंकड़े व्यापारिक गति और रोजगार के रुझानों को दर्शाएंगे।"
तीसरी तिमाही के नतीजों से निवेशकों को यह अंदाजा होगा कि कंपनियों की आय और लाभ में क्या बदलाव आया है। इससे उन्हें अपनी रणनीति तैयार करने और पोर्टफोलियो को संतुलित रखने में मदद मिलेगी।
वैश्विक आर्थिक रुझानों की भूमिका
वैश्विक स्तर पर अमेरिकी गैर-कृषि पेरोल और बेरोजगारी के आंकड़े इस सप्ताह निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में रोजगार के रुझानों से वैश्विक वित्तीय बाजार पर असर पड़ता है। इसके अलावा, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल और ब्रेंट क्रूड के भाव पर भी निवेशकों की नजर रहेगी।
ब्रेंट क्रूड में बदलाव से न केवल ऊर्जा क्षेत्र के शेयर प्रभावित होते हैं, बल्कि पूरे बाजार में निवेशकों का मूड भी बदल सकता है। डॉलर-रुपये के रेट में उतार-चढ़ाव निर्यातक और आयातक कंपनियों के शेयरों को सीधे प्रभावित कर सकते हैं।











