डेरिवेटिव से लेकर विदेशी निवेश तक, सेबी का संतुलित दृष्टिकोण, तुहिन कांत पांडेय ने दी स्पष्ट दिशा

डेरिवेटिव से लेकर विदेशी निवेश तक, सेबी का संतुलित दृष्टिकोण, तुहिन कांत पांडेय ने दी स्पष्ट दिशा

Securities and Exchange Board of India के प्रमुख Tuhin Kanta Pandey ने संतुलित विनियमन पर जोर दिया। ‘4T’ सिद्धांत के तहत विश्वास, पारदर्शिता, प्रौद्योगिकी और टीम वर्क को आधार बनाकर निवेशक सुरक्षा तथा बाजार विकास साथ ले जाने की बात कही।

Business: भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने अपने पहले वर्ष में साफ संदेश दिया है कि बाजार में न ज्यादा सख्ती होगी और न ही ढील। उनका जोर संतुलित और इष्टतम विनियमन पर है। उनका मानना है कि निवेशकों की सुरक्षा और बाजार के विकास को साथ लेकर चलना ही असली चुनौती है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि समस्या डेरिवेटिव बाजार में नहीं है, बल्कि किसी विशेष क्षेत्र में अत्यधिक सट्टेबाजी चिंता का कारण बनती है। ऐसे में नियामक की भूमिका बाजार को बंद करना नहीं, बल्कि जोखिम को नियंत्रित करना है।

‘4T’ फॉर्मूला क्या है

पांडेय ने अपनी प्राथमिकताओं को ‘4T’ फॉर्मूले में रखा है। इसमें ट्रस्ट, ट्रांसपेरेंसी, टेक्नोलॉजी और टीम वर्क शामिल हैं। उनके अनुसार यही चार स्तंभ बाजार में भरोसा मजबूत करेंगे।

ट्रस्ट यानी विश्वास को उन्होंने सबसे ऊपर रखा। उनका कहना है कि विश्वास केवल शब्दों से नहीं आता, बल्कि निरंतर और पारदर्शी कार्रवाई से बनता है। ट्रांसपेरेंसी यानी पारदर्शिता के जरिए नियामक निर्णयों को स्पष्ट और सार्वजनिक बनाना जरूरी है। टेक्नोलॉजी का उपयोग निगरानी और सिस्टम सुधार के लिए किया जा रहा है। टीम वर्क के माध्यम से संस्था को मजबूत बनाने पर जोर दिया गया है।

उनका लक्ष्य स्पष्ट है कि विनियमन ऐसा हो जो निवेशकों की सुरक्षा करे, बाजार को बढ़ाए और अनावश्यक दखल से बचे।

भरोसा बहाल करने की कोशिश

जब उन्होंने पदभार संभाला, तब संस्था की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठ रहे थे। इस पर उन्होंने कहा कि भरोसा अमूर्त होता है, लेकिन इसकी नींव विश्वसनीयता में होती है।

हितों के टकराव को लेकर उठी चिंताओं पर उन्होंने एक स्वतंत्र समिति गठित की। समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है और वह सार्वजनिक भी है। बोर्ड स्तर पर इस पर चर्चा हो चुकी है और आगे भी विचार किया जाएगा।

उन्होंने यह भी कहा कि कुछ सिफारिशों के लिए सेबी से बाहर सरकारी स्तर पर कार्रवाई की जरूरत हो सकती है। हालांकि अंतिम निर्णय प्रक्रिया के तहत ही लिया जाएगा।

हितों के टकराव पर स्पष्टता

वर्तमान ढांचे पर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि पहले भी कई सुरक्षा उपाय लागू थे। लेकिन समिति ने खुलासे, रिकॉर्ड रखने और रिपोर्टिंग प्रक्रियाओं को और स्पष्ट किया है।

उनके अनुसार, सबसे बड़ी कमी सिस्टम में थी, जिसे अब बेहतर बनाया जा रहा है। टेक्नोलॉजी आधारित निगरानी और डेटा विश्लेषण से पारदर्शिता बढ़ाई जाएगी।

विदेशी निवेशकों की निकासी पर नजर

पिछले एक वर्ष में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने लगभग 2 लाख करोड़ रुपये निकाले हैं। इस पर पांडेय का कहना है कि यह चक्रीय प्रवाह है, संरचनात्मक समस्या नहीं।

निवेशक रिटर्न, वैश्विक ब्याज दरों, मुद्रा उतार-चढ़ाव और अन्य अवसरों के आधार पर पोर्टफोलियो को पुनर्संतुलित करते रहते हैं। भारत के प्रति भावना अभी भी सकारात्मक बनी हुई है।

उन्होंने यह भी कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के कर निवास प्रमाण पत्र से जुड़े फैसले से कुछ अनिश्चितता जरूर आई है, लेकिन सरकार इसका कैसे क्रियान्वयन करती है, यह अधिक महत्वपूर्ण होगा।

एफपीआई खुलासा नियमों की समीक्षा

कुछ विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने खुलासा नियमों को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि भारत उनके वैश्विक पोर्टफोलियो का छोटा हिस्सा है, लेकिन एक या दो शेयर में निवेश के कारण वे नियमों के दायरे में आ जाते हैं।

पांडेय ने कहा कि इन मुद्दों की समीक्षा की जा रही है। अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है, लेकिन आवश्यक हुआ तो समायोजन किया जा सकता है।

डेरिवेटिव और साप्ताहिक ऑप्शन पर नजर

डेरिवेटिव बाजार को लेकर उन्होंने स्पष्ट किया कि वायदा खंड में कोई प्रणालीगत समस्या नहीं है। अधिकतर विकल्प ट्रेडिंग भी सामान्य है।

चिंता मुख्य रूप से कम अवधि के साप्ताहिक ऑप्शन को लेकर है, जहां खुदरा निवेशकों को नुकसान हो सकता है। उन्होंने कहा कि सेबी डेटा का विश्लेषण कर रही है।

यदि सबूत बताते हैं कि हस्तक्षेप जरूरी है, तो उचित कदम उठाए जाएंगे। लेकिन बाजार को लगातार अनिश्चितता में रखना सही नहीं है।

आईपीओ में ओएफएस पर संतुलित दृष्टिकोण

आईपीओ के जरिए प्रवर्तकों द्वारा निवेश निकासी के सवाल पर उन्होंने कहा कि इसे संरचनात्मक समस्या नहीं कहा जा सकता। वर्ष 2020 में आईपीओ आय का लगभग 87 प्रतिशत हिस्सा ऑफर फॉर सेल से आया था। अब यह लगभग 55 प्रतिशत ओएफएस और 45 प्रतिशत नए शेयरों का मिश्रण है।

उन्होंने कहा कि ओएफएस को नकारात्मक रूप से नहीं देखा जाना चाहिए। प्रवर्तक लाभांश के माध्यम से भी पूंजी निकाल सकते हैं। महत्वपूर्ण यह है कि निवेशकों को पूरी जानकारी मिले और पारदर्शिता बनी रहे।

प्रवर्तन और निगरानी पर सख्ती

पांडेय ने कहा कि प्रवर्तन अभी भी प्राथमिकता है। विशेष रूप से इनसाइडर ट्रेडिंग, फ्रंट रनिंग और बाजार में हेरफेर जैसे मामलों पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

साथ ही निवारक उपायों में निवेश किया जा रहा है। बेहतर निगरानी सिस्टम, डेटा एनालिटिक्स और उन न्यासियों तक पहुंच बढ़ाई जा रही है जो अप्रकाशित मूल्य-संवेदनशील जानकारी संभालते हैं।

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