सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आवारा कुत्तों के मामले में उसके समक्ष दायर होने वाले अंतरिम आवेदनों की बढ़ती संख्या पर संज्ञान लिया। कोर्ट ने कहा कि आमतौर पर इंसानों से जुड़े मामलों में भी इतनी अधिक संख्या में आवेदन नहीं आते हैं।
नई दिल्ली: भारत में आवारा कुत्तों के मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई में मंगलवार को एक अनोखी टिप्पणी सामने आई। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि आवारा कुत्तों से संबंधित अंतरिम याचिकाओं की संख्या इतनी अधिक है कि यह इंसानों के मामलों में भी शायद ही कभी देखने को मिलती है।
सुप्रीम कोर्ट में चर्चा का माहौल
सुप्रीम कोर्ट में दो वकीलों द्वारा आवारा कुत्तों के मामलों को उठाए जाने के दौरान यह टिप्पणी आई। एक वकील ने बताया कि उन्होंने इस विषय में एक अंतरिम याचिका दायर की है। इस पर जज मेहता ने कहा, इंसानों से जुड़े मामलों में भी आमतौर पर इतनी अधिक संख्या में याचिकाएं नहीं आतीं। कोर्ट ने बुधवार को इन याचिकाओं पर विस्तृत सुनवाई करने का निर्णय लिया है। इस दौरान जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन वी अंजारी की तीन जजों वाली विशेष पीठ सभी याचिकाकर्ताओं और वकीलों की बात सुनेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल नवंबर में आवारा कुत्तों और अन्य पशुओं से संबंधित मामलों पर गंभीर ध्यान दिया था। विशेष रूप से शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों और रेलवे स्टेशनों जैसे सार्वजनिक स्थानों पर कुत्तों के काटने की घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी को देखते हुए कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश जारी किए थे। नवंबर 2025 में कोर्ट ने कहा था कि आवारा कुत्तों को उचित नसबंदी और टीकाकरण के बाद निर्धारित आश्रयों में स्थानांतरित किया जाए।
इसके अलावा, कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया था कि पकड़े गए कुत्तों को उस स्थान पर वापस नहीं छोड़ा जाए, जहां से उन्हें पकड़ा गया था। राज्य और केंद्रीय अधिकारियों को राजमार्गों, राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे से सभी आवारा पशुओं को हटाने के लिए भी निर्देशित किया गया।

कुत्तों के काटने की घटनाओं पर चिंता
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि खेल परिसरों और संस्थागत क्षेत्रों में कुत्तों के काटने की घटनाओं की पुनरावृत्ति प्रशासनिक उदासीनता का संकेत देती है। कोर्ट ने इसे ऐसे परिसरों में सुरक्षा प्रबंधन की विफलता भी बताया। विशेष रूप से, कोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में बच्चों और नागरिकों के बीच रेबीज फैलने की मीडिया रिपोर्ट के मद्देनजर स्वतः संज्ञान लिया था। इसके तहत कई निर्देश जारी किए गए और आवारा कुत्तों की समस्या के समाधान के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जिम्मेदार ठहराया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बुधवार को आवारा कुत्तों के मामलों की सुनवाई में सभी याचिकाओं पर विचार किया जाएगा। कोर्ट इस दौरान राज्य सरकारों और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही को भी स्पष्ट करेगी।










